भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर : मुख्यमंत्री के गृह जिले की बदहाल तस्वीर

भरतपुर के वैर उपजिला अस्पताल में बेहोश छात्रा को एम्बुलेंस से लाते परिजन, अस्पताल स्टाफ की अनुपस्थिति के बीच खुद उठाना पड़ा स्ट्रेचर


हिमांशु मोदी की रिपोर्ट

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राजस्थान के भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर होती जा रही हैं। शनिवार को वैर उपजिला अस्पताल में हुई एक घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी। स्कूल में बेहोश हुई एक छात्रा को अस्पताल लाने के बाद जब परिजनों को खुद ही स्ट्रेचर पर उठाकर इमरजेंसी वार्ड तक ले जाना पड़ा, तो हर कोई हैरान रह गया। इस दौरान अस्पताल में कोई वार्ड बॉय या सहायक कर्मचारी मौजूद नहीं था। सवाल उठता है कि जब मुख्यमंत्री का गृह जिला भरतपुर ही स्वास्थ्य लापरवाही का शिकार है, तो बाकी जिलों की हालत कैसी होगी?

वैर उपजिला अस्पताल में लापरवाही का नया मामला

शनिवार को वैर उपजिला अस्पताल में घटी यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर हैं और प्रशासन इस ओर आंखें मूंदे बैठा है। जानकारी के अनुसार, स्थानीय निजी स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्रा निशि महर्षि क्लासरूम में अचानक चक्कर खाकर गिर पड़ी। जब परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें खुद ही स्ट्रेचर खींचना पड़ा क्योंकि अस्पताल में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था।

अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी

यह घटना कोई नई नहीं है। भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर होने के पीछे सबसे बड़ा कारण है — अस्पतालों में स्टाफ की कमी। अधिकांश सरकारी अस्पतालों में वार्ड बॉय, नर्सिंग स्टाफ और तकनीशियन पद वर्षों से खाली पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास योजनाएं तो हैं, लेकिन अमल करने वाला कोई नहीं। नतीजतन मरीजों और उनके परिजनों को खुद जिम्मेदारी उठानी पड़ती है।

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मुख्यमंत्री के गृह जिले की यह तस्वीर चौंकाने वाली

भरतपुर, जो कि राजस्थान के मुख्यमंत्री का गृह जिला है, वहां की यह हालत आमजन के लिए चिंता का विषय है। जब भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर हैं, तब बाकी जिलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्रामीण इलाकों में न तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर हैं और न ही दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता। कई बार मरीजों को इलाज के लिए जयपुर या आगरा तक ले जाना पड़ता है।

जनता में आक्रोश और प्रशासन की उदासीनता

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर होने की शिकायतें पहले भी कई बार उठाई जा चुकी हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सोशल मीडिया पर भी इस घटना का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे परिजन खुद ही स्ट्रेचर संभालते हुए मरीज को इमरजेंसी वार्ड तक ले जा रहे हैं।

आरबीएम अस्पताल में भी वही कहानी

बेहोश छात्रा को प्राथमिक उपचार के बाद आरबीएम अस्पताल, भरतपुर रेफर किया गया। लेकिन यहां भी हालात कुछ बेहतर नहीं हैं। मरीजों की लंबी कतारें, डॉक्टरों की कमी और दवाओं का अभाव आम बात बन चुकी है। भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर होने का असर न सिर्फ मरीजों पर बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों पर भी पड़ रहा है, जो सीमित संसाधनों में काम करने को मजबूर हैं।

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पिछले मामलों की यादें ताज़ा

इससे पहले भी वैर और कुम्हेर क्षेत्र के अस्पतालों में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां मरीजों को स्ट्रेचर या व्हीलचेयर तक नहीं मिली। स्थानीय लोग बताते हैं कि भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर होने का मुद्दा हर चुनाव में उठता है, लेकिन परिणाम शून्य रहते हैं। सरकारें बदलती हैं, लेकिन व्यवस्था जस की तस बनी रहती है।

स्वास्थ्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल

स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ और संसाधन हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहती है। भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर होने की वजह सिर्फ संसाधनों की कमी नहीं बल्कि निगरानी की कमी भी है। अधिकारियों की अनियमित विजिट, लापरवाह रवैया और जवाबदेही का अभाव इस स्थिति को और बिगाड़ रहा है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी

वैर और आसपास के क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी इस घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा कि भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर होने के कारण आम जनता पीड़ित है और सरकार को तत्काल जांच के आदेश देने चाहिए। जनता अब बदलाव चाहती है — सिर्फ आश्वासन नहीं।

जनता को चाहिए जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था

लोगों का कहना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर ही रहेंगी। लोगों को उम्मीद है कि सरकार अब इस मामले को गंभीरता से लेगी और अस्पतालों में कर्मचारियों की नियुक्ति, दवाओं की उपलब्धता तथा निगरानी व्यवस्था को मजबूत करेगी।

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यह समय है जब प्रशासन को जागना होगा। भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर होने का कलंक तभी मिटेगा जब अस्पतालों में मानवीय संवेदनाएं लौटेंगी। मरीजों के परिजन स्ट्रेचर खींचने के बजाय राहत की सांस ले सकेंगे — यही एक संवेदनशील समाज की पहचान है।

सवाल-जवाब (FAQ)

1. भरतपुर जिले में चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर क्यों हैं?

मुख्य कारण हैं – स्टाफ की कमी, संसाधनों की अनुपलब्धता, प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही का अभाव।

2. वैर उपजिला अस्पताल में हाल ही में क्या हुआ?

एक छात्रा बेहोश होने पर अस्पताल लाई गई, लेकिन वार्ड बॉय न होने के कारण परिजनों को खुद स्ट्रेचर खींचना पड़ा।

3. क्या मुख्यमंत्री के गृह जिले में भी ऐसी लापरवाही आम है?

हां, यह घटना दर्शाती है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में भी चिकित्सा व्यवस्थाएं लचर हैं और तत्काल सुधार की आवश्यकता है।

4. जनता क्या मांग कर रही है?

जनता चाहती है कि अस्पतालों में स्टाफ की बहाली, दवाओं की उपलब्धता और जवाबदेही की प्रणाली सुनिश्चित की जाए।

5. आगे की कार्रवाई क्या अपेक्षित है?

स्वास्थ्य विभाग से उम्मीद है कि वह इस लापरवाही की जांच करेगा और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करेगा।

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