लखनऊ में तैनात राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की पहली बटालियन इन दिनों एक असामान्य लेकिन चर्चित घटनाक्रम को लेकर सुर्खियों में है। पहरा ड्यूटी के दौरान अमरूद खाने पर एक सिपाही से स्पष्टीकरण मांगा गया और उसे अनुशासनहीनता का नोटिस जारी किया गया। बाद में सिपाही के जवाब और परिस्थितियों को देखते हुए विभाग ने चेतावनी देकर मामला समाप्त कर दिया।
आमतौर पर बाढ़, भूकंप, आगजनी और अन्य आपदाओं के समय जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचाने वाले एसडीआरएफ का नाम इस बार किसी रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि अनुशासन से जुड़े एक छोटे लेकिन संवेदनशील मामले के कारण चर्चा में आ गया है। यह घटना जनवरी के पहले सप्ताह की बताई जा रही है, जब लखनऊ स्थित एसडीआरएफ की पहली बटालियन परिसर में तैनात एक सिपाही ने ड्यूटी के दौरान अमरूद तोड़कर खा लिया।
📌 कहां और कैसे शुरू हुआ मामला
सूत्रों के मुताबिक, सिपाही की पहरा ड्यूटी एसडीआरएफ कार्यालय परिसर में बने कमांडेंट आवास पर लगी थी। उसी परिसर में अमरूद का एक पेड़ भी मौजूद है। ड्यूटी के दौरान सिपाही ने पेड़ से अमरूद तोड़कर खा लिया। इसी दौरान किसी वरिष्ठ अधिकारी की नजर उस पर पड़ गई और इसे ड्यूटी के समय अनुशासन उल्लंघन मानते हुए उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई।
📌 सूबेदार सैन्य नायक ने जारी किया नोटिस
मामले को गंभीर मानते हुए पहली बटालियन में तैनात सूबेदार सैन्य नायक की ओर से संबंधित सिपाही को लिखित स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया। नोटिस में पूछा गया कि ड्यूटी के दौरान फल तोड़कर खाने की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसे अनुशासन के विपरीत क्यों न माना जाए।
📌 पेट दर्द और यूट्यूब बना वजह
नोटिस मिलने के बाद सिपाही ने अपने जवाब में जो तथ्य रखे, उन्होंने पूरे मामले को मानवीय दृष्टिकोण से जोड़ दिया। सिपाही ने बताया कि ड्यूटी के दौरान उसे अचानक तेज पेट दर्द होने लगा था। छुट्टियां बंद थीं, इसलिए अवकाश लेना संभव नहीं था और ड्यूटी छोड़कर जाना भी उसके लिए नियमों के खिलाफ होता।
सिपाही के अनुसार, दर्द से राहत पाने के लिए उसने मोबाइल पर यूट्यूब पर घरेलू उपायों से जुड़े वीडियो देखे, जिनमें अमरूद को पेट दर्द में लाभकारी बताया गया था। इसी जानकारी के आधार पर उसने तत्काल राहत के लिए अमरूद खाया।
📌 मंशा पर नहीं, नियम पर उठा सवाल
अपने स्पष्टीकरण में सिपाही ने साफ कहा कि उसका किसी भी तरह की अनुशासनहीनता करने या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। उसने अपने कृत्य के लिए खेद जताया और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने का आश्वासन भी दिया।
📌 जांच के बाद चेतावनी देकर छोड़ा गया
सिपाही के जवाब और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विभागीय स्तर पर जांच की गई। जांच में यह निष्कर्ष निकला कि सिपाही की मंशा गलत नहीं थी और उसने मजबूरी में यह कदम उठाया था। इसके बाद विभाग ने सख़्त कार्रवाई के बजाय उसे चेतावनी देकर छोड़ने का निर्णय लिया।
📌 महकमे में क्यों हो रही चर्चा
हालांकि मामला औपचारिक रूप से समाप्त हो चुका है, लेकिन एसडीआरएफ और अन्य सुरक्षा बलों में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ इसे अनुशासन की सख़्ती से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे ड्यूटी के दौरान उत्पन्न मानवीय परिस्थिति से जोड़कर देख रहे हैं।
📌 अनुशासन बनाम मानवीय संवेदनशीलता
यह मामला एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है कि सुरक्षा बलों में अनुशासन और मानवीय संवेदनशीलता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। नियम जरूरी हैं, लेकिन अचानक आई स्वास्थ्य समस्या जैसी स्थितियों में व्यवहारिक दृष्टिकोण की भी उतनी ही अहम भूमिका होती है।
📌 निष्कर्ष
अमरूद खाने से जुड़ा यह मामला भले ही छोटा लगे, लेकिन इसके जरिए यह साफ होता है कि प्रशासनिक नियम, ड्यूटी का दबाव और मानवीय परिस्थितियां कई बार एक-दूसरे से टकरा जाती हैं। एसडीआरएफ सिपाही को चेतावनी देकर छोड़े जाने का फैसला इन्हीं पहलुओं के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है।
❓ क्लिक करें और जवाब पढ़ें (FAQ)
ड्यूटी के दौरान अमरूद खाने पर नोटिस क्यों दिया गया?
ड्यूटी के समय बिना अनुमति कोई भी गतिविधि अनुशासन उल्लंघन मानी जाती है, इसलिए सिपाही से स्पष्टीकरण मांगा गया।
सिपाही ने अपने बचाव में क्या कहा?
सिपाही ने बताया कि उसे तेज पेट दर्द था और यूट्यूब पर देखे घरेलू उपाय के आधार पर उसने अमरूद खाया।
क्या सिपाही पर कोई सख़्त कार्रवाई हुई?
नहीं, विभाग ने परिस्थितियों को देखते हुए केवल चेतावनी देकर मामला समाप्त कर दिया।
यह मामला क्यों चर्चा में है?
क्योंकि यह अनुशासन और मानवीय संवेदनशीलता के बीच संतुलन को लेकर बहस का विषय बन गया है।








