‘लड़की बुलवाएं, 23-24 साल की’ ; BKU भानु के जिलाध्यक्ष का कथित वीडियो वायरल होते ही दी सफाई

बाराबंकी में BKU भानु जिलाध्यक्ष का कथित वीडियो वायरल।

अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
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‘लड़की बुलवाएं, 23-24 साल की’ — इस वाक्यांश से जुड़ा BKU भानु का कथित वीडियो वायरल होते ही उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सियासी और संगठनात्मक हलचल तेज हो गई। भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) के जिलाध्यक्ष राधा रमन वर्मा से जुड़े इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। वीडियो के सामने आने के बाद जहां एक ओर संगठन की छवि पर सवाल उठे, वहीं दूसरी ओर जिलाध्यक्ष ने इसे साजिश बताते हुए सार्वजनिक रूप से सफाई पेश की।

कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद

बाराबंकी में गुरुवार को एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से प्रसारित हुआ। इस वीडियो में कथित तौर पर राधा रमन वर्मा एक कार की ड्राइविंग सीट पर बैठे दिखाई दे रहे हैं और बगल में बैठे व्यक्ति से बातचीत करते हुए सुने जा रहे हैं। वायरल क्लिप में 23–24 वर्ष की एक लड़की को बुलवाने और कार्यालय से जुड़ी कुछ बातें कही जाने का आरोप लगाया जा रहा है। हालांकि, वीडियो कब और किस परिस्थिति में रिकॉर्ड हुआ, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

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सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ यूजर्स ने किसान संगठन से जुड़े पदाधिकारी के आचरण पर सवाल उठाए, जबकि कई लोगों ने वीडियो की सत्यता और एडिटिंग को लेकर संदेह जताया। BKU भानु का कथित वीडियो वायरल होने के साथ ही यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद न रहकर संगठन की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बन गया।

जिलाध्यक्ष राधा रमन वर्मा की सफाई

विवाद गहराने पर जिलाध्यक्ष राधा रमन वर्मा सामने आए और उन्होंने वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताया। उनका कहना है कि यह वीडियो एआई तकनीक की मदद से तैयार किया गया है और इसमें छेड़छाड़ कर उन्हें बदनाम करने की साजिश रची गई है। उन्होंने दावा किया कि संगठन से जुड़े एक किसान नेता से पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था और उसी रंजिश में यह वीडियो वायरल कराया गया।

AI तकनीक से छेड़छाड़ का दावा

राधा रमन वर्मा के अनुसार, वीडियो में उनकी आवाज और कथित संवाद को तकनीकी रूप से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनका कहना है कि BKU भानु का कथित वीडियो वायरल होना आज के डिजिटल दौर में डीपफेक और फर्जी कंटेंट के खतरे को भी उजागर करता है।

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पुलिस से शिकायत और कानूनी कदम

जिलाध्यक्ष ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। साथ ही, कथित साजिशकर्ता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की मांग भी की गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, तहरीर के आधार पर वीडियो की तकनीकी जांच पर विचार किया जा रहा है।

संगठन की छवि पर असर

भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) लंबे समय से किसानों और गरीब तबकों के मुद्दों को उठाने वाला संगठन रहा है। ऐसे में इस तरह का विवाद संगठन की नैतिक और सार्वजनिक छवि को प्रभावित करता है। कई किसान नेताओं का कहना है कि व्यक्तिगत विवादों के कारण किसान आंदोलन के मूल मुद्दे—जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य, सिंचाई और कर्ज—हाशिये पर चले जाते हैं।

राष्ट्रीय नेतृत्व की सख्त कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष
भानु प्रताप सिंह
ने लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में पदाधिकारियों के साथ आपात बैठक की। बैठक के बाद बाराबंकी जिले की पूरी कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया और सभी पदाधिकारियों को पदमुक्त कर दिया गया। संगठन का कहना है कि यह कदम छवि की रक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

जून में नई कार्यकारिणी की घोषणा

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जानकारी दी कि आगामी जून माह में आयोजित राष्ट्रीय शिविर सम्मेलन के दौरान बाराबंकी जिले के लिए नए पदाधिकारियों की घोषणा की जाएगी। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की स्थितियों से बचने के लिए आंतरिक निगरानी और अनुशासन को और मजबूत किया जाएगा।

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राजनीतिक और सामाजिक मायने

विशेषज्ञों का मानना है कि BKU भानु का कथित वीडियो वायरल होना केवल एक संगठनात्मक विवाद नहीं है, बल्कि यह डिजिटल युग में सार्वजनिक व्यक्तियों की जवाबदेही और तकनीकी दुरुपयोग दोनों पर सवाल खड़े करता है। बिना पुष्टि वायरल होने वाले कंटेंट से न केवल व्यक्ति बल्कि पूरे संगठन की साख प्रभावित हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

‘लड़की बुलवाएं, 23-24 साल की’ विवाद क्या है?

यह विवाद BKU भानु के जिलाध्यक्ष से जुड़े एक कथित वीडियो के वायरल होने के बाद सामने आया है।

जिलाध्यक्ष ने क्या सफाई दी है?

उन्होंने वीडियो को AI से छेड़छाड़ कर बनाया गया बताया है और इसे साजिश करार दिया है।

संगठन ने क्या कार्रवाई की?

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बाराबंकी जिले की पूरी कार्यकारिणी भंग कर दी है।

आगे क्या प्रक्रिया होगी?

जून में राष्ट्रीय शिविर सम्मेलन के दौरान नए पदाधिकारियों की घोषणा की जाएगी।



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