सीबीआई का करप्शन ट्रैप : सीजीएसटी झांसी में डेढ़ करोड़ की रिश्वत डील का भंडाफोड़

सीजीएसटी झांसी रिश्वत मामले में सीबीआई द्वारा बरामद नकदी और गिरफ्तार डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी की तस्वीर

चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
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उत्तर प्रदेश के झांसी से सामने आया यह मामला न केवल कर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है,
बल्कि यह भी उजागर करता है कि जब भ्रष्टाचार व्यवस्था का हिस्सा बनने लगता है,
तब जांच एजेंसियां किस तरह योजनाबद्ध और गोपनीय रणनीति के साथ कार्रवाई करती हैं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो
की लखनऊ स्थित एंटी करप्शन ब्रांच ने
केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग
(सीजीएसटी) झांसी में करोड़ों रुपये की कर चोरी से जुड़े एक मामले में
डेढ़ करोड़ रुपये की रिश्वत डीलिंग की शिकायत पर ऐसा जाल बिछाया,
जिससे पूरा विभाग हिल गया।

आठ दिन चली डीलिंग, फिर फंसा पूरा नेटवर्क

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, कर चोरी के एक बड़े मामले में कारोबारी को राहत दिलाने के बदले
डेढ़ करोड़ रुपये की डीलिंग पिछले करीब आठ दिनों से चल रही थी।
इस दौरान अफसरों, अधिवक्ता और कारोबारी के बीच लगातार संपर्क और सौदेबाजी होती रही।
सीबीआई ने इस पूरे घटनाक्रम को चुपचाप दर्ज किया और हर कड़ी को जोड़ते हुए
आखिरकार निर्णायक कार्रवाई की।

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डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी समेत पांच आरोपी गिरफ्तार

मामले में सीजीएसटी झांसी की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को
दिल्ली स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया,
जबकि झांसी में तैनात दो अधीक्षक,
जीएसटी मामलों के अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता
और जय दुर्गा हार्डवेयर के प्रोपराइटर राजू मंगनानी को
स्थानीय स्तर पर हिरासत में लिया गया।

जीएसटी छापा बना रिश्वत डील की जड़

करीब आठ दिन पहले जय दुर्गा हार्डवेयर पर सेंट्रल जीएसटी टीम ने छापा मारा था।
छापे के दौरान कर चोरी से जुड़े कई अहम दस्तावेज सामने आए।
इसी कार्रवाई के बाद कारोबारी से पहले 70 लाख रुपये,
और बाद में डेढ़ करोड़ रुपये की रिश्वत मांगे जाने का आरोप है।

सूत्रधार अधिवक्ता, भागने की कोशिश और चोट

जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरी डीलिंग का संचालन
एक जीएसटी अधिवक्ता कर रहा था,
जो अफसरों और कारोबारी के बीच सेतु बना हुआ था।
सीबीआई के अनुसार जब टीम ने अधिवक्ता और कारोबारी को दबोचा,
तो उन्होंने भागने का प्रयास किया,
जिसमें कारोबारी के पैर में चोट आने की भी सूचना है।

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सुबह-सुबह कई ठिकानों पर छापेमारी

बुधवार सुबह सीबीआई की कई टीमें एक साथ सक्रिय हुईं।
सीपरी बाजार, सेवाराम मिल कंपाउंड,
आरएनएस वर्ल्ड स्कूल के आसपास
और इलाहाबाद बैंक तिराहे के पास स्थित आवासों पर छापे मारे गए।
इस दौरान दस्तावेज, मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए।

विभाग में हड़कंप, सिस्टम पर उठे सवाल

इस कार्रवाई के बाद सीजीएसटी विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
आंतरिक स्तर पर समीक्षा शुरू हो गई है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है
कि कर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही
किस हद तक सुनिश्चित की जा रही है।

आम सवाल – जवाब

सीबीआई ने यह कार्रवाई क्यों की?

करोड़ों की कर चोरी में राहत दिलाने के बदले
डेढ़ करोड़ रुपये की रिश्वत डीलिंग की पुख्ता शिकायत के आधार पर।

इस केस में कितने लोग गिरफ्तार हुए?

डिप्टी कमिश्नर, दो अधीक्षक, एक अधिवक्ता और एक कारोबारी सहित कुल पांच।

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आरोपियों को कहां पेश किया जाएगा?

सभी आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाकर
विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

क्या स्थानीय अधिकारियों की मदद ली गई थी?

नहीं, सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी कार्रवाई
बिना किसी स्थानीय सहयोग के की गई।


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