प्रोफेसर की श्रद्धांजलि सभा में टूटीं दलीय सीमाएं

देवरिया में आयोजित प्रोफेसर रामेश्वर सिंह बघेल की श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और बड़ी संख्या में लोग एक साथ उपस्थित।

इरफान लारी की रिपोर्ट
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कृषि विज्ञान के विद्वान प्रोफेसर रामेश्वर सिंह बघेल के निधन पर उमड़ा जनसमर्थन, राजनीति से ऊपर दिखी संवेदना

देवरिया जनपद के भाटपार रानी क्षेत्र में आयोजित श्रद्धांजलि सभा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम भर नहीं रही, बल्कि वह एक ऐसे सामाजिक–राजनीतिक दृश्य में बदल गई, जहाँ वैचारिक मतभेद, दलगत सीमाएं और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा क्षणभर को स्थगित हो गईं। चंद्रशेखर आज़ाद कृषि विश्वविद्यालय, कानपुर के सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर रामेश्वर सिंह बघेल के असामयिक निधन पर आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा ने यह स्पष्ट कर दिया कि कुछ व्यक्तित्व अपने जीवन और कर्मों से राजनीति से कहीं ऊपर स्थान बना लेते हैं।

कृषि विज्ञान का एक युग और सामाजिक चेतना का प्रतीक

प्रोफेसर रामेश्वर सिंह बघेल केवल एक शिक्षाविद या वैज्ञानिक नहीं थे, बल्कि वे ग्रामीण समाज, किसानों की समस्याओं और कृषि शिक्षा के प्रति गहरी संवेदनशीलता रखने वाले ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनका प्रभाव कक्षा से निकलकर खेतों तक जाता था। उनके निधन को कृषि विज्ञान के क्षेत्र में अपूर्णीय क्षति बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने शोध को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे ज़मीनी स्तर पर किसानों के हित में प्रयोग किया।

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सभा में वक्ताओं ने बार-बार इस तथ्य को रेखांकित किया कि प्रोफेसर बघेल का व्यक्तित्व सरल, सौम्य और संवादप्रिय था। वे असहमति को भी सम्मान के साथ सुनते थे और युवाओं को प्रोत्साहित करने में कभी पीछे नहीं रहते थे। यही कारण रहा कि उनकी श्रद्धांजलि सभा में राजनीतिक दलों की सीमाएं स्वतः टूटती चली गईं।

राजनीति से ऊपर उठी संवेदना की साझा ज़मीन

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पंडित गिरीश चंद्र तिवारी ने कहा कि प्रोफेसर बघेल के निधन से न केवल कृषि विज्ञान का क्षेत्र, बल्कि पूरा जनपद एक अनुभवी मार्गदर्शक से वंचित हो गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे विद्वान विरले होते हैं, जिनका प्रभाव पीढ़ियों तक महसूस किया जाता है।

डॉ. पवन कुमार राय ने उन्हें मिलनसार, मधुर व्यवहार और सकारात्मक सोच से परिपूर्ण व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर बघेल के साथ बिताया गया हर संवाद सीख देने वाला होता था और उनकी सरलता ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।

परिवार का दर्द और सामाजिक स्वीकार्यता

सभा में भावुक क्षण तब आए जब राघवेंद्र वीर विक्रम सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सुहावल कोठी और पूरा क्षेत्र इस अपूर्णीय क्षति की भरपाई भविष्य में नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा कि परिवार ने केवल एक सदस्य नहीं खोया, बल्कि समाज ने अपना एक मार्गदर्शक खो दिया है।

उनके शब्दों में केवल पारिवारिक शोक ही नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व की पीड़ा भी स्पष्ट दिखाई दी। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर बघेल का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

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भाजपा, सपा और अन्य दलों की साझा उपस्थिति

श्रद्धांजलि सभा की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक मंच साझा किया। भाजपा विधायक सभाकुंवर कुशवाहा, पूर्व सांसद रविन्द्र कुशवाहा, सेवानिवृत्त जिला जज एवं वरिष्ठ भाजपा नेता अशोक सिंह कुशवाहा, पूर्वांचल विकास बोर्ड के सदस्य राजकुमार शाही, सपा के पूर्व विधायक मनबोध प्रसाद सहित अनेक राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

यह उपस्थिति केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि वक्ताओं के शब्दों में सम्मान और आत्मीयता स्पष्ट दिखाई दी। राजनीति के तीखे दौर में ऐसी एकजुटता दुर्लभ मानी जाती है।

सरकार और संगठन की ओर से संवेदनाएं

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने पारिवारिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर पूरे बघेल परिवार को इस गहरे दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर बघेल का जीवन कृषि और समाज के लिए समर्पित रहा, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

संवेदना व्यक्त करने वालों में राज्य मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम, पूर्व विधायक रुद्र प्रताप सिंह, प्रधानाचार्य शक्ति प्रताप सिंह, कुल मुख्य तेज प्रताप सिंह, भाजपा नेत्री बिंदा सिंह कुशवाहा और हरिचरण कुशवाहा सहित कई प्रमुख नाम शामिल रहे।

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मौन, प्रार्थना और स्मृतियों का संगम

सभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई। यह मौन केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि उस सामूहिक शोक का प्रतीक था, जो हर चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।

श्रद्धांजलि सभा यह संदेश देकर समाप्त हुई कि कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने जीवन में ही सामाजिक सहमति और मानवीय मूल्यों की मिसाल बन जाते हैं। प्रोफेसर रामेश्वर सिंह बघेल का जीवन भी ऐसा ही एक उदाहरण रहा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

श्रद्धांजलि सभा की सबसे बड़ी विशेषता क्या रही?

सभा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता एक साथ उपस्थित हुए और दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर संवेदना व्यक्त की।

प्रोफेसर रामेश्वर सिंह बघेल का योगदान किस क्षेत्र में रहा?

उन्होंने कृषि विज्ञान, शोध और किसानों के हित में ज़मीनी स्तर पर उल्लेखनीय योगदान दिया।

सभा में किन प्रमुख नेताओं ने भाग लिया?

भाजपा, सपा और अन्य संगठनों से जुड़े विधायक, पूर्व सांसद, मंत्री, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

इस श्रद्धांजलि सभा का सामाजिक संदेश क्या रहा?

सभा ने यह संदेश दिया कि शिक्षा, सेवा और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित व्यक्तित्व राजनीति से ऊपर होते हैं।

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