बेसिक शिक्षा अधिकारी की छत्रछाया में अराजकता: शिक्षक मनमाने, अफ़सर मौन और मासूमों का भविष्य बंधक

सरकारी प्राथमिक स्कूल में अव्यवस्था, शिक्षकों की मनमानी और बेसिक शिक्षा अधिकारी की भूमिका पर सवाल दर्शाती फीचर इमेज
IMG_COM_202603081950166970
previous arrow
next arrow
IMG_COM_202603081950166970
previous arrow
next arrow
संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

बेसिक शिक्षा विभाग में व्याप्त अव्यवस्थाओं ने पूरी शिक्षा प्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
नियम, शासनादेश और दिशा-निर्देश केवल काग़ज़ों तक सिमटते नज़र आ रहे हैं,
जबकि ज़मीनी स्तर पर शिक्षकों की मनमानी, अधिकारियों की चुप्पी और विभागीय संरक्षण का खुला खेल चल रहा है।
इस पूरे परिदृश्य में सबसे अधिक नुकसान उन मासूम बच्चों को हो रहा है,
जिनका भविष्य इसी व्यवस्था के भरोसे टिका है।

■ बेसिक शिक्षा अधिकारी की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल

सबसे गंभीर प्रश्न जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं।
आरोप हैं कि उनकी जानकारी और संरक्षण में कई विद्यालयों में अनुशासन पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
शासनादेश के अनुसार जहाँ विद्यालयों का समय सुबह 10:00 बजे निर्धारित है,
वहीं शिक्षक न तो समय से विद्यालय पहुँचते हैं और न ही निर्धारित अवधि तक रुकते हैं।

इसे भी पढें  धूमधाम से मनादसवां वेदांता महोत्सव

इसके बावजूद विभागीय स्तर पर न तो प्रभावी निरीक्षण हो रहा है
और न ही किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई दिखाई दे रही है।
यह स्थिति सीधे-सीधे प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही के अभाव की ओर इशारा करती है।

■ खंड शिक्षा अधिकारी स्तर पर संरक्षण और वसूली के आरोप

खंड शिक्षा अधिकारी स्तर पर भी हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं।
आरोप हैं कि शिक्षकों से मनमाने तरीके से वसूली की जा रही है
और विद्यालयों में फैली अराजकता पर जानबूझकर आंख मूंदी जा रही है।
यदि ये आरोप सही हैं,
तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।

■ शिक्षक संघ की राजनीति और पुराना विवाद

शिक्षक संघ से जुड़े पदाधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है।
आरोप हैं कि विद्यालयी दायित्वों की बजाय संगठनात्मक राजनीति को प्राथमिकता दी जा रही है।
पूर्व में की गई विभागीय कार्रवाई यह दर्शाती है
कि यह विवाद नया नहीं बल्कि लंबे समय से चला आ रहा है।

■ विद्यालयों में मनमानी का असर: बच्चों का भविष्य खतरे में

शिक्षकों की गैरहाज़िरी और अधिकारियों की उदासीनता का सीधा असर
विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
कई स्कूलों में शैक्षणिक वातावरण लगभग समाप्त हो चुका है।
अभिभावकों की शिकायतें फाइलों में दब जाती हैं
और बच्चों का भविष्य हर दिन और अधिक असुरक्षित होता जा रहा है।

इसे भी पढें  स्मृतियों की चौखट पर लौट आए राजेंद्र पांडेय – प्रथम पुण्यतिथि पर गूँजी भागवत कथा

■ कंपोजिट विद्यालय का मामला: जातिगत भेदभाव और हिंसा के आरोप

हाल ही में सामने आए एक कंपोजिट विद्यालय के मामले ने पूरे तंत्र को झकझोर कर रख दिया।
आरोप हैं कि अनुसूचित जाति के बच्चों के साथ जातिगत भेदभाव किया गया,
जाति-सूचक शब्दों का प्रयोग हुआ
और एक मासूम छात्रा के साथ शारीरिक मारपीट तक की गई।

पीड़ित परिजनों का कहना है कि शिकायत करने पर उन्हें डराया गया
और मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं,
तो यह शिक्षा के अधिकार और बाल संरक्षण कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।

■ जांच और कार्रवाई के आश्वासन, लेकिन भरोसा कमजोर

प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई का आश्वासन जरूर दिया गया है,
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह आश्वासन ज़मीनी कार्रवाई में बदलेगा
या फिर अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

■ बड़ा सवाल: जवाबदेही कब तय होगी?

जब बेसिक शिक्षा अधिकारी की छत्रछाया में अराजकता पनप रही हो,
तो यह केवल एक विभाग की विफलता नहीं,
बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।
अब देखना यह है कि व्यवस्था जागती है
या फिर मासूमों का भविष्य यूँ ही बंधक बना रहेगा।

इसे भी पढें  मेडिकल कॉलेज हॉस्टल पहुंची प्रेम - दिवानी युवतीबोली—‘कहाँ हैं डॉक्टर साहब, मैं उनसे प्यार करती हूँ’

■ पाठकों के सवाल, व्यवस्था से जवाब

क्या बेसिक शिक्षा अधिकारी सीधे जिम्मेदार हैं?

विद्यालयों की निगरानी और अनुशासन की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की होती है।
यदि अनियमितताएँ जारी हैं और कार्रवाई नहीं हो रही,
तो जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।

शिक्षकों की मनमानी पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

सूत्रों के अनुसार निरीक्षण प्रक्रिया औपचारिक बनकर रह गई है
और कई मामलों में विभागीय संरक्षण के कारण शिकायतें दबा दी जाती हैं।

बच्चों के साथ हिंसा के मामलों में क्या कानून लागू होता है?

ऐसे मामलों में बाल संरक्षण कानून और शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत
कठोर आपराधिक कार्रवाई अनिवार्य होती है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top