खप्टिहाकला से राष्ट्रपति भवन तक विज्ञान की उड़ान



✍️ संतोष कुमार सोनी की रिपोर्ट
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उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा के लिए यह क्षण केवल एक समाचार नहीं, बल्कि आत्मगौरव से भरा ऐतिहासिक अध्याय बन गया है। पैलानी तहसील के छोटे से गांव खप्टिहाकला में जन्मे और पले-बढ़े डॉ. सत्येंद्र कुमार मंगरौठिया को देश के सर्वोच्च वैज्ञानिक सम्मानों में से एक राष्ट्रीय विज्ञान अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया।

इस गरिमामयी अवसर पर डॉ. मंगरौठिया के साथ उनकी पत्नी डॉ. सुरेखा, बहन सुषमा, छोटे भाई धर्मेंद्र मंगरौठिया और भाभी दीपाली की उपस्थिति ने इस पल को और भी भावुक तथा स्मरणीय बना दिया। गांव की मिट्टी से निकलकर देश के सर्वोच्च मंच तक पहुंचने की यह यात्रा केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की वैज्ञानिक संभावनाओं का सशक्त प्रमाण है।

धान अनुसंधान में उल्लेखनीय योगदान

डॉ. सत्येंद्र मंगरौठिया को यह सम्मान राइस रिसर्च (धान अनुसंधान) के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट, दीर्घकालिक और नवाचारी योगदान के लिए प्रदान किया गया है। वे वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट हैदराबाद में सीनियर साइंटिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। उनके शोध कार्यों का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के अनुकूल किस्में, किसानों की लागत में कमी और पोषण सुरक्षा जैसे जमीनी सवालों का समाधान करना रहा है।

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धान भारत की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। ऐसे में डॉ. मंगरौठिया का शोध किसानों की आय, पर्यावरण संतुलन और देश की दीर्घकालिक कृषि नीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके वैज्ञानिक प्रयोग और फील्ड-आधारित अध्ययन आज कई राज्यों में अपनाए जा रहे हैं।

सम्मानों की लंबी श्रृंखला

यह पहली बार नहीं है जब डॉ. मंगरौठिया के कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया हो। वर्ष 2009 में उन्हें यंग साइंटिस्ट अवार्ड से नवाजा गया था। इसके बाद 2010, 2019 और 2021 में उन्हें गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। अब तक वे एक दर्जन से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं, जो उनके निरंतर वैज्ञानिक समर्पण का प्रमाण हैं।

गांव से शुरू हुआ सफर, देश तक पहचान

डॉ. मंगरौठिया की प्रारंभिक शिक्षा परमहंस श्री रणछोड़ दास इंटर कॉलेज, खप्टिहाकला से हुई। उनके पिता स्वर्गीय श्रीनिवास मंगरौठिया उसी विद्यालय में गणित और विज्ञान के शिक्षक थे। मां स्वर्गीय कमला मंगरौठिया एक साधारण गृहिणी थीं, लेकिन शिक्षा और अनुशासन को उन्होंने परिवार की सबसे बड़ी पूंजी माना।

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माता-पिता के असमय निधन ने जीवन में गहरी चुनौतियां खड़ी कीं, किंतु डॉ. मंगरौठिया ने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। मां से मिली प्रेरणा, पिता से मिला वैज्ञानिक दृष्टिकोण और गांव की सादगी—इन्हीं मूल्यों ने उन्हें विज्ञान की ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

गांव में खुशी और गर्व का माहौल

जैसे ही राष्ट्रीय विज्ञान अवार्ड मिलने की सूचना खप्टिहाकला गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटी, ढोल-नगाड़े बजे और हर घर में गर्व की चर्चा होने लगी। डॉ. मंगरौठिया के बड़े भाई राजा मंगरौठिया को बधाइयों का तांता लग गया।

इस अवसर पर पूर्व नौसेना अधिकारी राकेश बाजपेई, जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विशंभर प्रसाद निषाद, ग्राम प्रधान मैना देवी निषाद सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने इसे पूरे जनपद बांदा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

परिवार और जिले के लिए प्रेरणा

डॉ. मंगरौठिया के बड़े भाई राजा मंगरौठिया ने कहा कि यह सम्मान केवल उनके परिवार या गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे जनपद बांदा और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि यदि सीमित संसाधनों में पले-बढ़े गांव के बच्चे को सही दिशा, मेहनत और अवसर मिले, तो वह देश का नाम रोशन कर सकता है।

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डॉ. सत्येंद्र मंगरौठिया की कहानी आज के युवाओं के लिए यह संदेश देती है कि विज्ञान केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। गांवों की मिट्टी में भी विश्वस्तरीय वैज्ञानिक बनने की क्षमता छिपी है—जरूरत है तो केवल अवसर, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास की।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

डॉ. सत्येंद्र मंगरौठिया को राष्ट्रीय विज्ञान अवार्ड क्यों मिला?

उन्हें धान अनुसंधान के क्षेत्र में दीर्घकालिक, नवाचारी और किसानों के लिए उपयोगी वैज्ञानिक योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया।

डॉ. मंगरौठिया वर्तमान में कहां कार्यरत हैं?

वे वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट हैदराबाद में सीनियर साइंटिस्ट के पद पर कार्यरत हैं।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा कहां से हुई?

उनकी प्रारंभिक शिक्षा परमहंस श्री रणछोड़ दास इंटर कॉलेज, खप्टिहाकला गांव से हुई।

क्या उन्हें पहले भी पुरस्कार मिल चुके हैं?

हां, वे यंग साइंटिस्ट अवार्ड सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।

इस सम्मान का बांदा जिले के लिए क्या महत्व है?

यह सम्मान बांदा जिले के युवाओं को शिक्षा, विज्ञान और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

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