मिसाल ; पत्नी संभाल रही स्टेयरिंग और टिकट काट रहे हैं पतिदेव

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नौशाद अली की रिपोर्ट

कानपुर। तमाम लोगों ने अपनी पत्नियों को व्यवसायी, शिक्षिका, डॉक्टर-अफसर बनने की प्रेरणा दी होगी, लेकिन गाजियाबाद के बस कंडक्टर मुकेश कुमार उनसे अलग हैं। उन्होंने अपनी पत्नी वेद कुमारी को कुशल बस ड्राइवर बनने की प्रेरणा दी। वेद कुमारी ने भी बड़ी लगन से यह कौशल सीख लिया।

कानपुर के रोडवेज ड्राइविंग सेंटर में उनकी ट्रेनिंग पूरी होने वाली है। अब मुकेश टिकट काटेंगे तो वेद कुमारी बस की स्टीयरिंग संभालेंगी। मुकेश रोडवेज के गाजियाबाद डिपो में कंडक्टर हैं। वेद कुमारी ने भी गाजियाबाद डिपो में ही तैनाती मांगी है। उनके दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा सूर्यकांत (14) और बेटी भाविका दो साल की है। 17 साल पहले वेद कुमारी की शादी मुकेश कुमार के साथ हुई थी।

पत्नी की संघर्ष क्षमता देख पिछले साल मुकेश के मन में आया कि वेद कुमारी को बस ड्राइविंग सिखाई जाए। उन्हें पता चला कि देश में पहली बार महिलाओं को भारी वाहन चलाने की ट्रेनिंग कानपुर में दी जाएगी। पत्नी से बात की और उनकी सहमति पर ट्रेनिंग सेंटर में एडमिशन दिला दिया।

वेद कुमारी ने बताया कि मेरा ड्राइविंग से कोई वास्ता नहीं था। पति ने इसकी प्रेरणा दी। जुनून जागा और ससुराल ने हिम्मत दी। ट्रेनिंग सेंटर के प्रधानाचार्य व प्रशिक्षकों ने भी पूरी मदद की और मेरा उत्साह बढ़ाया। इसके बाद सब आसान हो गया। वरना सवा साल की बेटी को साथ में रखकर पहले कार और फिर बस ड्राइविंग सीखना आसान नहीं था।

रोडवेज ट्रेनिंग सेंटर प्रधानाचार्य एसपी सिंह ने बताया कि देश में पहली बार कौशल विकास मिशन के तहत महिलाओं को भारी वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण 15 मई को पूरा हो जाएगा।

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Author: samachar

"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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