बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव बढ़ा, आत्महत्या और हृदयाघात की घटनाओं ने उठाए सवाल

हिमांशु मोदी की रिपोर्ट,

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राजस्थान में बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय संकट के रूप में सामने आ रहा है। मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान बढ़ते कार्यभार, लगातार दबाव, देर रात तक फील्ड में ड्यूटी और प्रशासनिक संवेदनहीनता के कारण कई बीएलओ शिक्षकों पर असहनीय परिस्थितियाँ थोप दी गई हैं। आत्महत्या, हृदयाघात और स्वास्थ्य संबंधी अन्य घटनाएँ यह संकेत दे रही हैं कि बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव अब सीमा पार कर चुका है और इसे नज़रअंदाज़ करना भविष्य में और बड़ी त्रासदियों को जन्म दे सकता है।

इसी परिप्रेक्ष्य में राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने निर्णायक पहल करते हुए विभिन्न मोर्चों पर सक्रियता तेज की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चन्द पुष्करणा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त नवीन महाजन, शासन सचिव शिक्षा कृष्ण कुणाल तथा निदेशक माध्यमिक शिक्षा राजस्थान सीताराम जाट से मुलाकात कर बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव और उन पर बढ़ते प्रशासकीय दबाव से विस्तार से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने साफ कहा कि यदि तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव और बढ़ेगा तथा इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया दोनों पर पड़ेगा।

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राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय की पहल: बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव मुख्य मुद्दा

संभाग मीडिया प्रभारी भरतपुर राकेश खण्डेलवाल ने बताया कि संगठन ने पूरे प्रदेश से प्राप्त फीडबैक के आधार पर यह पाया कि बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव चिंताजनक स्तर तक पहुँच चुका है। शिक्षकों को नियमित शैक्षणिक कार्यों के साथ-साथ एसआईआर कार्यक्रम, घर-घर सर्वे, रिकॉर्ड अपडेट, ऑनलाइन प्रविष्टियाँ और प्रशासनिक बैठकों की लंबी सूची ने लगभग चौबीस घंटे की ड्यूटी जैसा माहौल बना दिया है। ऐसे में कई शिक्षक शारीरिक और मानसिक रूप से टूटने लगे हैं। खण्डेलवाल के अनुसार, संगठन की प्राथमिकता अब यही है कि बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव कम करने के लिए ठोस नीतिगत निर्णय लिए जाएँ।

प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में बीएलओ शिक्षक मुकेश जॉगिंग की आत्महत्या की घटना का विशेष तौर पर उल्लेख किया। ज्ञापन में कहा गया कि यह घटना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि इस बात का प्रतीक है कि बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव किस कदर घातक रूप ले चुका है। संघ ने मांग रखी कि मुकेश जॉगिंग के परिवार को पचास लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि यह संदेश जाए कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव समझते हुए संवेदनशीलता के साथ निर्णय ले रहे हैं।

महिला बीएलओ पर भी दबाव, फील्ड में देर रात तक ड्यूटी से बढ़ा मानसिक तनाव

संगठन के प्रदेश महामंत्री महेन्द्र लखारा ने बताया कि वर्तमान मतदाता गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान न केवल पुरुष बल्कि महिला कार्मिकों पर भी समान रूप से दबाव डाला जा रहा है। अनेक मतदान केंद्रों पर नियुक्त महिला बीएलओ को देर रात तक फील्ड में रहने के लिए कहा जा रहा है, जो सुरक्षा और गरिमा दोनों दृष्टियों से अनुचित है। उन्होंने कहा कि रात देर तक चलने वाली ड्यूटी, परिवार की जिम्मेदारियाँ और परिवहन की चुनौतियों के बीच बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव दोगुना हो जाता है।

प्रतिनिधि मंडल ने यह भी बताया कि कम संसाधन, कम स्टाफ, ऑनलाइन पोर्टलों की जटिलता और हर स्तर पर लक्ष्य का दबाव मिलकर बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव को लगभग असहनीय बना रहा है। कई शिक्षक स्कूल की ड्यूटी के बाद शाम को सर्वे करते-करते देर रात घर पहुँच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

एसआईआर कार्यक्रम में यथार्थवादी समय सीमा और संवेदनशील व्यवहार की मांग

प्रदेश अध्यक्ष रमेश चन्द पुष्करणा ने कहा कि संगठन शिक्षकों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर दृढ़संकल्पित है। उन्होंने बताया कि एसआईआर कार्यक्रम में समय सीमा यथार्थवादी हो, कार्यभार संतुलित किया जाए और फील्ड अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएँ कि वे बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव को समझें और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करें।

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उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में बैठकें, रिपोर्टिंग और दबाव के कारण युवा शिक्षक अतिरिक्त जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश कर रहे हैं, जो चुनावी प्रणाली के लिए चिंता का विषय है।

समाधान के सुझाव

राष्ट्रिय शिक्षक संघ ने सुझाव दिया है कि सभी बीएलओ को स्पष्ट गाइडलाइन के साथ प्रशिक्षण दिया जाए, ब्लॉक स्तर पर हेल्पलाइन बने, तनाव प्रबंधन और काउंसलिंग सत्र हों तथा स्वास्थ्य परीक्षण नियमित रूप से कराया जाए।

प्रतिनिधि मंडल में रमेश चन्द पुष्करणा, महेन्द्र लखारा, बसंत जिंदल और नोरंग सहाय शामिल रहे। सभी ने एकस्वर से कहा कि बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव कम किए बिना स्थिति सामान्य नहीं हो सकती।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: बीएलओ शिक्षकों का मानसिक तनाव किन कारणों से बढ़ रहा है?

अत्यधिक कार्यभार, अव्यावहारिक समय सीमा, देर रात तक ड्यूटी, बार–बार की मीटिंग और प्रशासनिक दबाव इसके मुख्य कारण हैं।

प्रश्न 2: राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने क्या मांग रखी?

मुकेश जॉगिंग के परिवार को सहायता, महिला बीएलओ के लिए सुरक्षा, यथार्थवादी समय सीमा और मानसिक तनाव में कमी के उपायों की मांग की गई।

प्रश्न 3: मानसिक तनाव कम करने के उपाय क्या हैं?

प्रशिक्षण, हेल्पलाइन, काउंसलिंग, योग–ध्यान शिविर और स्वास्थ्य परीक्षण तनाव कम कर सकते हैं।

प्रश्न 4: यदि कदम नहीं उठाए गए तो क्या होगा?

आत्महत्या, हृदयाघात और चुनावी तंत्र में प्रशिक्षित कार्मिकों की कमी जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

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