
हिमांशु मोदी की रिपोर्ट
वृन्दावन। ब्रजभूमि के पावन तीर्थ कामवन धाम में इस बार का दर्शन पर्व अद्भुत और अलौकिक बन गया जब हनुमान दास जी महाराज के सानिध्य में हजारों कृष्ण भक्तों ने इस भूमि पर पधारकर दिव्यता का अनुभव किया। श्रद्धालुओं ने विमलकुण्ड और विमल बिहारी मंदिर में पूजा-अर्चना कर राधा-कृष्ण की लीलाओं का साक्षात्कार किया। पूरा वृन्दावन भक्ति रस में डूबा रहा।
तीर्थराज कामवन में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
कामवन धाम का महत्व केवल एक तीर्थस्थल के रूप में नहीं बल्कि राधा-कृष्ण लीलास्थली के रूप में भी अतुलनीय है। इस अवसर पर देशभर से आए हजारों भक्तों ने तीर्थराज विमलकुण्ड में आचमन किया और ब्रज की परिक्रमा पूरी की। विमल बिहारी मंदिर के सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने बताया कि यहां की हर रजकण में भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीलाओं की स्मृतियाँ जीवंत हैं।
उन्होंने कहा कि कामवन धाम वह स्थान है जहां भक्त अपने जीवन के समस्त दुःख भूल जाते हैं। इस भूमि का हर कण राधा-कृष्ण की प्रेममयी लीलाओं से ओतप्रोत है। इसलिए ब्रजभूमि के इस पवित्र स्थल की यात्रा का महत्व पुराणों में सर्वोच्च बताया गया है।
5500 वर्ष पुराना विमलकुण्ड — आस्था का केंद्र
विमलकुण्ड को कामवन धाम का हृदय माना जाता है। कहा जाता है कि लगभग 5500 वर्ष पूर्व विमल कन्याओं के प्रेमाश्रुओं से इस तीर्थराज का प्राकट्य हुआ था। विष्णु पुराण, पद्म पुराण, नारद पुराण, आदिवाराह पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, महाभारत और गर्ग संहिता में कामवन धाम और विमलकुण्ड की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है।
संजय लवानिया ने बताया कि कामवन की परिक्रमा करने वाले भक्तों को ऐसा दिव्य आनंद प्राप्त होता है जो अन्यत्र नहीं मिलता। यहां श्रीकृष्ण की लीलाओं के ऐसे चिन्ह आज भी मौजूद हैं जो भक्ति और आनंद का अनोखा संगम हैं।
कामवन में विराजित हैं चारों धाम
कामवन धाम को अद्वितीय इसीलिए कहा जाता है क्योंकि यहां चारों धाम — बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथपुरी और रामेश्वरम् — के प्रतीक स्वरूप मंदिर विराजमान हैं। तीर्थयात्रियों ने विमल बिहारी मंदिर के साथ-साथ गया कुण्ड, चरण पहाड़ी, खिसलनी शिला, भामासुर की गुफा, महाप्रभु जी की बैठक, श्रीकुण्ड, सेतुबन्ध रामेश्वर, लंका-यशोदा स्थल, कामेश्वर महादेव, पंचमुखी महादेव तथा चौरासी खम्भा जैसे लीलास्थलों का भी दर्शन किया।
इस अवसर पर हनुमान दास जी महाराज ने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि “जो व्यक्ति सच्चे मन से कामवन धाम की परिक्रमा करता है, उसके जीवन से अज्ञान और दुख का अंत हो जाता है।” उन्होंने ब्रजवासियों के प्रेम और सेवा भावना की भी प्रशंसा की।
देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
वृन्दावन और कामवन धाम की भक्ति की ख्याति अब सीमाओं से परे पहुंच चुकी है। अमेरिका, रूस, मॉरिशस और नेपाल से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें इस पावन धाम में वह शांति मिली जो कहीं और नहीं। विमलकुण्ड के जल में आचमन कर उन्होंने श्रीकृष्ण से आशीर्वाद मांगा और राधा नाम का जप किया।
ब्रज के हर कोने में राधे-राधे की गूंज सुनाई दी। फूलों से सजी गलियों में भक्तों ने हरिनाम संकीर्तन किया और चारों ओर भक्ति का अनोखा वातावरण बना रहा।
कामवन धाम का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों में वर्णित है कि जो भक्त तीर्थराज विमलकुण्ड में स्नान करता है, वह सात जन्मों के पापों से मुक्त होता है। कामवन का नाम “काम” यानी “प्रेम” से जुड़ा है — यहां राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम की अनगिनत लीलाएं घटित हुई थीं। इसलिए कामवन धाम को “प्रेमभूमि” भी कहा जाता है।
वृन्दावन और कामवन धाम का यह धार्मिक उत्सव ब्रज संस्कृति की आत्मा को जीवंत कर गया। हजारों भक्तों के हृदय में भक्ति का ऐसा दीप जला जो अनंत काल तक जलता रहेगा।
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