पीलीभीत: एक साधारण दिखने वाला चपरासी जब करोड़ों रुपये के गबन का केंद्र बन जाए, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं रह जाती—यह पूरे सिस्टम की परतें खोलने वाली घटना बन जाती है। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय से जुड़ा इल्हाम उर रहमान शम्सी अब जांच एजेंसियों के घेरे में है, और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नए-नए चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।
जांच में खुली परतें: चपरासी से ‘करोड़पति’ तक का सफर
प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि आरोपी ने लगभग 1.02 करोड़ रुपये का गबन किया, लेकिन जैसे ही पुलिस ने गहराई से जांच शुरू की, यह रकम कई गुना बढ़ती हुई नजर आई। अब तक की जांच में 53 बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं, जिनमें कुल 5.28 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज कराई जा चुकी है।
यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक सुनियोजित वित्तीय नेटवर्क की झलक भी मिल रही है, जो वर्षों से संचालित हो रहा था।
तीन पत्नियां और करोड़ों का लेनदेन
जांच में यह भी सामने आया कि इल्हाम शम्सी की तीन पत्नियां हैं, जो अलग-अलग जिलों में रहती हैं। पुलिस के अनुसार, दो पत्नियों और एक रिश्तेदार महिला के खातों में कुल 59 लाख रुपये की एफडी कराई गई थी, जिसे अब फ्रीज कर दिया गया है।
पीलीभीत में रहने वाली पत्नी अर्शी खातून के खाते में 33.30 लाख रुपये, जबकि बुलंदशहर के खुर्जा में रहने वाली दूसरी पत्नी अजरा के खाते में 25 लाख रुपये की एफडी पाई गई। तीसरी पत्नी लुबना के खाते में अब तक कोई स्पष्ट लेनदेन सामने नहीं आया है, लेकिन जांच जारी है।
फर्जी ट्रांजेक्शन का जाल: 98 लेनदेन से करोड़ों की निकासी
एफआईआर के अनुसार, आरोपी ने 12 सितंबर 2024 से दिसंबर 2025 के बीच 98 ट्रांजेक्शन के माध्यम से सरकारी धन को एनईएफटी के जरिए निकालकर गबन किया। यह रकम वेतन मद से फर्जी लाभार्थी बनाकर निकाली गई थी।
इस पूरे खेल में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ और कूटरचित तरीके अपनाए गए, जिससे सिस्टम की खामियों का भी खुलासा होता है।
बिल्डर कंपनियों तक पहुंचा पैसा
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपनी पत्नी के खाते से बरेली की जेएचएम इंफ्रा होम प्राइवेट लिमिटेड में 90 लाख रुपये और ओरिका होम्स में 17.18 लाख रुपये ट्रांसफर किए।
पुलिस ने इन कंपनियों के संचालकों को नोटिस जारी कर दिया है और संबंधित रकम के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करने के निर्देश दिए हैं।
जांच टीम की सख्ती और व्यापक पड़ताल
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी के निर्देश पर चार सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो पूरे प्रकरण की सघन जांच कर रही है। पुलिस ने वर्ष 2014 से 2026 तक जिले के 57 विद्यालयों के कर्मचारियों के बैंक खातों और वित्तीय रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई है।
इस व्यापक जांच से यह संकेत मिलता है कि यह घोटाला एक लंबे समय से चल रहा था और इसमें कई स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
कानूनी कार्रवाई और जमानत का पहलू
इस मामले में इल्हाम शम्सी और अर्शी खातून के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अर्शी खातून को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, लेकिन बाद में उसे जमानत मिल गई। वहीं, इल्हाम शम्सी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत प्राप्त हो चुकी है।
हालांकि, जमानत के बावजूद जांच की प्रक्रिया लगातार जारी है और पुलिस हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है।
सिस्टम पर उठते सवाल
इस पूरे मामले ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक चपरासी स्तर का कर्मचारी यदि करोड़ों रुपये का गबन कर सकता है, तो यह केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरी का भी संकेत है।
यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि निगरानी और पारदर्शिता के तंत्र में सुधार की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
आगे की राह: सख्त कार्रवाई की उम्मीद
एसपी सुकीर्ति माधव के अनुसार, अब तक 5.28 करोड़ रुपये फ्रीज किए जा चुके हैं और जांच टीम को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि पूरे मामले की तह तक पहुंचा जाए।
यह मामला केवल एक व्यक्ति की सजा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि सिस्टम की खामियों को दूर किया जाए।
एक घोटाला, कई सबक
इल्हाम शम्सी का यह मामला केवल एक आर्थिक अपराध नहीं है—यह एक चेतावनी है। यह दिखाता है कि कैसे छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़े घोटालों का रूप ले सकती हैं।
अब देखना यह होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले में कितनी गहराई तक पहुंचती हैं और क्या यह मामला वास्तव में एक उदाहरण बन पाता है या नहीं।
❓ FAQ
इस मामले में कुल कितनी राशि फ्रीज की गई है?
अब तक 5.28 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज किए जा चुके हैं।
आरोपी ने कितने ट्रांजेक्शन के जरिए गबन किया?
आरोपी ने 98 ट्रांजेक्शन के माध्यम से सरकारी धन का गबन किया।
क्या आरोपी को गिरफ्तार किया गया है?
आरोपी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जबकि सह-आरोपी को जेल भेजा गया था।


