राजस्थान के कामवन- कामां क्षेत्र स्थित सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक तीर्थराज विमल कुंड आज एक गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। जिस कुंड में हर वर्ष हजारों-लाखों श्रद्धालु गंगा दशहरा जैसे पावन अवसरों पर स्नान और आचमन करने पहुंचते हैं, वही आज खुद पानी के लिए तरसता नजर आ रहा है। कुंड का जल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भी गहरी चिंता व्याप्त है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न समाजों और श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम सुभाष यादव को ज्ञापन सौंपकर कुंड में पानी भरवाने की मांग की। लेकिन जब इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो मजबूर होकर राधा मुरली मनोहर दास मंदिर, सूरज घाट के दिव्यांग महंत धर्म शरण बृजवासी बाबा ने रविवार सुबह कई श्रद्धालुओं के साथ अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
धरने की शुरुआत: आस्था बनाम प्रशासनिक उदासीनता
धरने को संबोधित करते हुए धर्म शरण बृजवासी बाबा ने प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्षों से हर बार इसी तरह की स्थिति उत्पन्न होती है, जब गंगा दशहरा या अन्य धार्मिक आयोजनों से पहले कुंड में पानी भरवाने के लिए आंदोलन, धरना, भूख हड़ताल और यहां तक कि आत्मदाह की चेतावनी तक देनी पड़ती है।
बाबा के अनुसार, प्रशासन केवल औपचारिकता निभाते हुए थोड़ी मात्रा में पानी डालकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है, जिससे समस्या का स्थायी समाधान कभी नहीं हो पाता।
गंगा दशहरा की तैयारी पर संकट
धार्मिक नगरी कामवन में आगामी 25 मई 2026 को गंगा दशहरा पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाना है। इस अवसर पर शाही स्नान का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु और साधु-संत विमल कुंड में स्नान और आचमन के लिए पहुंचते हैं।
लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह आयोजन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। यदि समय रहते कुंड में पर्याप्त जल की व्यवस्था नहीं की गई, तो श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, जिससे धार्मिक आस्था को भी ठेस पहुंच सकती है।
पानी की कमी से बढ़ा प्रदूषण और खतरा
कुंड में पानी की कमी के कारण न केवल धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, बल्कि पर्यावरणीय समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुंड के आसपास दुर्गंध फैलने लगी है, जिससे परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को असहजता का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा भीषण गर्मी के चलते कुंड में रहने वाले जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है। पानी का स्तर कम होने से उनका प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है, जो आने वाले दिनों में गंभीर पर्यावरणीय संकट का रूप ले सकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ: पहले भी सूख चुका है कुंड
धर्म शरण बृजवासी बाबा ने बताया कि वर्ष 1954 में भी विमल कुंड पूरी तरह सूख गया था। उस समय धर्मप्रेमी लोगों ने चंदा एकत्रित कर नहर का निर्माण कराया था, जिससे कुंड में पानी पहुंचाया गया। हालांकि बाद में अचानक तेज बारिश के कारण कुंड फिर से भर गया था।
करीब 82 वर्षों बाद आज फिर वही स्थिति सामने खड़ी है, जो यह दर्शाती है कि समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं खोजा जा सका है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से नाराजगी
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि जब सरकार गांव और धार्मिक स्थलों के विकास के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं चला रही है, तब ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थल की अनदेखी समझ से परे है।
श्रद्धालुओं ने क्षेत्रीय विधायक और मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप कर कुंड में पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
चेतावनी: आंदोलन हो सकता है तेज
धरने पर बैठे धर्म शरण बृजवासी बाबा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही विमल कुंड में पानी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कुंड का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है।
यदि प्रशासन अब भी गंभीरता नहीं दिखाता है, तो यह आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
विमल कुंड का यह जल संकट केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि आस्था, पर्यावरण और प्रशासनिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन का बड़ा सवाल है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन समय रहते इस चुनौती का समाधान करता है या फिर श्रद्धालुओं का यह आक्रोश और गहराता जाएगा।
❓ महत्वपूर्ण सवाल (FAQ)
विमल कुंड में पानी की समस्या क्यों हुई?
कुंड का जल स्तर लगातार गिरने और समय पर पानी की आपूर्ति नहीं होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
धरना क्यों शुरू किया गया?
प्रशासन द्वारा मांगों पर ध्यान नहीं देने के कारण श्रद्धालुओं और संतों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।
गंगा दशहरा पर क्या असर पड़ेगा?
यदि समय पर पानी की व्यवस्था नहीं हुई, तो श्रद्धालुओं को स्नान और आचमन में कठिनाई होगी।
क्या प्रशासन से कोई कार्रवाई की उम्मीद है?
श्रद्धालुओं और संतों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, अब कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।


