रुद्रपुर जामा मस्जिद में 27वीं रात तरावीह मुकम्मल, दुआओं के साथ नमाजियों ने दिया नजराना, गूंजा अमन-चैन का पैगाम

रुद्रपुर जामा मस्जिद में 27वीं रात तरावीह के बाद हाफिज फैजान रजा खान और सहयोगी को फूलमालाओं से सम्मानित करते हुए

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🖊️ इरफान अली लारी की रिपोर्ट

रमज़ान की 27वीं रात बनी रूहानी एहसास की मिसाल

देवरिया जनपद के रुद्रपुर नगर स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद में रमज़ान की 27वीं मुबारक रात एक खास रूहानी माहौल के साथ तरावीह की नमाज मुकम्मल हुई। इस अवसर पर मस्जिद परिसर में श्रद्धा, इबादत और आत्मिक शांति का अद्भुत संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में नमाजियों ने एकत्र होकर कुरआन की तिलावत सुनी और अल्लाह की बारगाह में सिर झुकाकर अपनी दुआएं पेश कीं। यह रात न केवल इबादत की थी बल्कि आपसी भाईचारे और इंसानियत की भी झलक लिए हुए थी।

रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए इबादत, सब्र और रहमतों का महीना माना जाता है, और 27वीं रात को विशेष रूप से अहम माना जाता है। इस रात में इबादत करने का सवाब कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए नमाजियों की भीड़ मस्जिद में उमड़ पड़ी और सभी ने दिल से इबादत की।

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हाफिज फैजान रजा खान ने पढ़ाई तरावीह

इस पवित्र अवसर पर तरावीह की नमाज हाफिज फैजान रजा खान साहब द्वारा अदा कराई गई। उनकी खूबसूरत तिलावत और मधुर आवाज ने नमाजियों को भाव-विभोर कर दिया। पूरी रमज़ान के दौरान उन्होंने जिस समर्पण और अनुशासन के साथ कुरआन शरीफ की तिलावत कराई, वह श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणादायक रही।

नमाजियों ने उनके इस प्रयास और सेवा भाव की सराहना करते हुए उन्हें नजराने के रूप में एक लाख तीस हजार रुपये की धनराशि भेंट की। यह सम्मान न केवल उनकी मेहनत का प्रतीक था बल्कि समाज की ओर से उनके प्रति आदर और प्रेम का भी संकेत था।

देश और समाज के लिए मांगी गई दुआ

तरावीह मुकम्मल होने के बाद जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना सद्दाम हुसैन साहब ने देश और मुल्क की सलामती के लिए विशेष दुआ कराई। उन्होंने अल्लाह तआला से प्रार्थना की कि देश में अमन, शांति और भाईचारा बना रहे तथा हर नागरिक सुरक्षित और खुशहाल जीवन व्यतीत कर सके।

दुआ के इस भावुक क्षण में नमाजियों की आंखें नम दिखाई दीं और सभी ने अपने-अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए बेहतर इंसान बनने का संकल्प लिया। इस दौरान समाज में एकता, सौहार्द और सहयोग की भावना को मजबूत करने का संदेश भी दिया गया।

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बड़ी संख्या में नमाजियों की रही मौजूदगी

इस अवसर पर मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे, जिनमें मौलाना अनवार साहब, मुहम्मद फखरुददीन अंसारी, रियाजुदीन अंसारी, फैयाज कुरैशी, रिजवान सिद्दिकी, हसनैन राईनी, रियाज कुरैशी, रब्बानी सिद्दीकी, अकबर अली, एजाज अंसारी, साजिद खान, मुस्तकीम अंसारी सहित कई अन्य लोग शामिल रहे। सभी ने मिलकर इस पवित्र आयोजन को सफल बनाया।

मस्जिद परिसर में अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और गरिमामय ढंग से सम्पन्न हुआ। स्थानीय लोगों ने इस आयोजन को समाज में एकता और धार्मिक सौहार्द का प्रतीक बताया।

रमज़ान का संदेश: इंसानियत और भाईचारा

रमज़ान का महीना केवल रोज़ा रखने और इबादत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसानियत, दया और सहयोग का भी संदेश देता है। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यदि हम रमज़ान की सीख को अपने जीवन में उतार लें तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

इस आयोजन ने यह भी साबित किया कि धार्मिक कार्यक्रम केवल आस्था का ही नहीं बल्कि सामाजिक एकता का भी माध्यम होते हैं। जब लोग एक साथ बैठकर इबादत करते हैं और एक-दूसरे के लिए दुआ करते हैं, तो समाज में प्रेम और विश्वास की भावना मजबूत होती है।

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सामूहिक इबादत से मजबूत होती है सामाजिक एकता

रुद्रपुर जामा मस्जिद में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण बना कि सामूहिक इबादत से समाज में एकता और भाईचारा किस तरह बढ़ता है। इस तरह के आयोजन लोगों को जोड़ने का कार्य करते हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे धार्मिक और सामाजिक आयोजन समाज को एक नई दिशा देते हैं और लोगों के बीच आपसी समझ और सहयोग को बढ़ाते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

तरावीह की नमाज क्या होती है?

तरावीह रमज़ान के महीने में इशा की नमाज के बाद अदा की जाने वाली विशेष नमाज है, जिसमें कुरआन शरीफ की तिलावत की जाती है।

27वीं रात का महत्व क्या है?

रमज़ान की 27वीं रात को शबे कद्र माना जाता है, जिसे इबादत और दुआ के लिए बेहद खास माना जाता है।

नजराना देने की परंपरा क्या है?

नजराना सम्मान और आभार व्यक्त करने का एक तरीका है, जिसमें लोग इमाम या हाफिज की सेवा के लिए स्वेच्छा से धनराशि भेंट करते हैं।

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