उर्स पर प्रशासन का ब्रेक : अनुमति न मिलने से मजार पर छाया सन्नाटा, पुलिस छावनी में बदला इलाका

उत्तर प्रदेश के देवरिया शहर का हवाई दृश्य, शहरी इमारतों के साथ सांकेतिक समाचार बैनर

अर्जुन वर्मा की रिपोर्ट
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देवरिया शहर के गोरखपुर रोड ओवरब्रिज के नीचे स्थित मजार पर प्रस्तावित सालाना उर्स को प्रशासन से अनुमति न मिलने के बाद शनिवार को पूरे दिन वहां सन्नाटा पसरा रहा। आमतौर पर उर्स के दौरान चहल-पहल और श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहने वाला यह इलाका इस बार पूरी तरह शांत दिखाई दिया। दिनभर इक्का-दुक्का लोग आते-जाते दिखे, लेकिन किसी भी प्रकार का धार्मिक आयोजन या भीड़ नजर नहीं आई।

प्रशासनिक निर्णय के बाद बदला माहौल

दरअसल, नवंबर माह में एएसडीएम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए राजस्व अभिलेखों में दर्ज वक्फ मजार व कब्रिस्तान के इंद्राज को कूटरचित करार देते हुए निरस्त कर दिया था। इसके साथ ही इस भूमि को बंजर घोषित कर दिया गया। इस निर्णय के बाद से ही मजार की वैधानिक स्थिति को लेकर प्रशासनिक सख्ती बढ़ गई थी।

विधायक की आपत्ति और राजनीतिक हलचल

इस पूरे मामले को लेकर सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी लगातार मुखर रहे हैं। विधायक ने सार्वजनिक रूप से इस मजार को अवैध बताते हुए इसके ध्वस्तीकरण की मांग की है। उनका कहना है कि जब राजस्व अभिलेखों में इसे बंजर भूमि घोषित कर दिया गया है, तो यहां किसी भी प्रकार का धार्मिक आयोजन कानूनन गलत है।

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उर्स की अनुमति को लेकर उठा विवाद

इसी बीच 22 दिसंबर को मजार कमेटी के सदर मोहम्मद राशिद खान ने उपजिलाधिकारी को पत्र सौंपते हुए 3 और 4 जनवरी को सलाना उर्स आयोजित करने की अनुमति मांगी। पत्र में आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया था। हालांकि, इस आवेदन की जानकारी मिलते ही विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

प्रशासन का सख्त रुख

प्रशासन ने पूरे प्रकरण की समीक्षा के बाद उर्स आयोजन की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, मजार कमेटी के अध्यक्ष समेत छह पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर दिया गया। प्रशासन का स्पष्ट कहना था कि जब भूमि की वैधानिक स्थिति संदिग्ध है, तब किसी भी प्रकार का सार्वजनिक धार्मिक आयोजन कानून-व्यवस्था की दृष्टि से उचित नहीं है।

इलाका बना पुलिस छावनी

शनिवार की सुबह से ही मजार परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए। पुरवा क्षेत्र से लेकर मजार तक का पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील नजर आया। मौके पर सीओ सिटी संजय कुमार रेड्डी, सदर कोतवाल विजय शंकर तिवारी, मईल थानाध्यक्ष राकेश सिंह, खुखुंदू थानाध्यक्ष दिनेश मिश्र, श्रीरामपुर थाने की पुलिस तथा पीएसी के जवान तैनात रहे।

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इसके अतिरिक्त पुरवा चौराहे पर तीन थानों की संयुक्त पुलिस टीम तैनात रही। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए लगातार पेट्रोलिंग की जाती रही।

स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया

स्थानीय नागरिकों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने प्रशासन के फैसले को कानून व्यवस्था के हित में बताया, तो वहीं कुछ लोगों का मानना है कि मामले का स्थायी समाधान न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। हालांकि, प्रशासन की सख्ती के चलते किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शन या विवाद सामने नहीं आया।

कानून-व्यवस्था सर्वोपरि : प्रशासन

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। जब तक भूमि विवाद और वैधानिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक इस स्थान पर किसी भी प्रकार के सार्वजनिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

❓ महत्वपूर्ण सवाल-जवाब

उर्स की अनुमति क्यों नहीं दी गई?
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राजस्व अभिलेखों में मजार से जुड़ा इंद्राज निरस्त कर भूमि को बंजर घोषित किया गया है, इसलिए प्रशासन ने अनुमति नहीं दी।

क्या मजार को ध्वस्त किया जाएगा?

फिलहाल इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। मामला न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है।

पुलिस बल क्यों तैनात किया गया?

कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

क्या भविष्य में उर्स की अनुमति मिल सकती है?

यह पूरी तरह भूमि की वैधानिक स्थिति और प्रशासनिक निर्णय पर निर्भर करेगा।

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