हिमांशु मोदी की रिपोर्ट
डीग (राजस्थान)। गोपाष्टमी उत्सव 2025 का पर्व इस वर्ष राजस्थान के डीग जिले में स्थित श्रीजड़खोर गोधाम में भव्य रूप से मनाया गया। श्रीजड़खोर गोधाम गोपाष्टमी महोत्सव में करीब 10 हजार गोवंशों की एक साथ पूजा अर्चना की गई। यह आयोजन गोपालन निदेशालय, राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ, जिसमें देशभर से आए गोभक्तों, साधु-संतों और गौसेवकों ने भाग लेकर गोरक्षा का संकल्प लिया।
इस पवित्र अवसर पर भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण और बलराम की नित्य गोचारण स्थली पर गोमाताओं की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की। गोपाष्टमी पर्व पर पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया। साध्वी श्री पूर्णिमा दीदी के करुणामय भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उनकी भक्ति प्रस्तुति ने गोपाष्टमी उत्सव को और अधिक पावन बना दिया।
गोपालन निदेशालय के तत्वावधान में हुआ भव्य आयोजन
राजस्थान सरकार के गोपालन निदेशालय के निदेशक पंकज कुमार ओझा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार गोसेवा और गोरक्षा के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं एक बड़े गोभक्त हैं और उन्होंने राज्य में गौशालाओं के निर्माण, पोषण और प्रबंधन के लिए कई योजनाएं लागू की हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार गो-संवर्धन, गो-उत्पादों के प्रोत्साहन और गोपालकों की आर्थिक स्थिति सुधारनेगोरक्षा की शपथ दिलाई जिसमें गोवंश की रक्षा, गोमाता के प्रति करुणा और गोसंवर्धन में योगदान देने की प्रतिज्ञा शामिल थी।
श्रीजड़खोर गोधाम : गोसेवा का अद्भुत केंद्र
श्रीजड़खोर गोधाम को स्वामी श्री राजेंद्र दास जी महाराज की प्रेरणा से स्थापित किया गया है। यह गोधाम न केवल गोमाता का आश्रयस्थल है बल्कि गोआस्था और भारतीय संस्कृति का प्रतीक भी है। यहां प्रतिदिन गोसेवा, गोपूजन और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ गो कल्याण की भावना को जीवंत रखा जाता है।
गोधाम के सचिव अचिंत्य गर्ग ने बताया कि 170 बीघा क्षेत्र में फैले इस परिसर में पांच गौशालाएं हैं जहां हजारों गोवंश की सेवा की जाती है। गोपाष्टमी पर्व पर विशेष सजावट, दीपदान और भव्य शोभायात्रा का आयोजन हुआ। इस मौके पर राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, दिल्ली और गुजरात से भी श्रद्धालु पहुंचे।
कामवन जीव सेवा समिति में भी मनाया गया उत्सव
इसी अवसर पर कामवन जीव सेवा समिति द्वारा भी गोपाष्टमी उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। गोपालक निरंजन लाल गोटवारिया ने अपनी गोमाता का श्रृंगार कर मंदिर श्री गोपाल जी में लाकर पूजा-अर्चना की। समिति अध्यक्ष भागचंद जैन और आयोजन प्रभारी गोलू तमौलिया ने अतिथियों, भजन मंडलियों और गोसेवकों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में बरौलीधाऊं भजन मंडली, थाना प्रभारी, महिला शक्ति व सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गौमाता के जयघोष के साथ पूजा की। समापन पर गोसेवा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विशंभर जी सोनी, भूरा जी व टीम, रामवीर जी व टीम सहित कई सेवाभावी कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया।
भजन और भंडारे ने बढ़ाई गोपाष्टमी की भव्यता
भक्तिमय वातावरण में आयोजित पूर्णिमा दीदी के भजन प्रवाह ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मधुर सुरों और भावनात्मक प्रस्तुति से वातावरण में भक्ति रस भर गया। इसके साथ ही विशाल भंडारे का भी आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
श्रीजड़खोर गोधाम गोपाष्टमी उत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा बल्कि इसने गोसंवर्धन, गोसेवा और गोरक्षा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम बना। यह आयोजन भारतीय संस्कृति की सनातन परंपरा और गोमाता के महत्व को पुनर्स्थापित करने का प्रतीक है।
गोपाष्टमी उत्सव : सनातन संस्कृति की आत्मा
गोपाष्टमी उत्सव 2025 ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि गोमाता केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि भारतीय जीवनशैली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी हैं। श्रीजड़खोर गोधाम में आयोजित यह भव्य पर्व गोरक्षा आंदोलन को नई ऊर्जा देता है और भविष्य में गोसेवा की भावना को सशक्त बनाता है।
🕉️ गोपाष्टमी उत्सव से जुड़े सवाल-जवाब
गोपाष्टमी उत्सव 2025 कहाँ मनाया गया?
गोपाष्टमी उत्सव 2025 राजस्थान के डीग जिले में स्थित श्रीजड़खोर गोधाम में भव्य रूप से मनाया गया।
इस आयोजन में कितने गोवंशों की पूजा की गई?
इस आयोजन में लगभग 10 हजार गोवंशों की एक साथ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना की गई।
कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि कौन थे?
राजस्थान सरकार के गोपालन निदेशालय के निदेशक पंकज कुमार ओझा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे।
गोपाष्टमी उत्सव का मुख्य उद्देश्य क्या है?
गोपाष्टमी उत्सव का उद्देश्य गोसेवा, गोसंवर्धन और गोरक्षा के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना और सनातन संस्कृति की रक्षा करना है।
गोपाष्टमी पर्व का धार्मिक महत्व क्या है?
गोपाष्टमी पर्व भगवान श्रीकृष्ण और गोमाता की आराधना का दिन है। इस दिन को गोसेवा और गोसंवर्धन के प्रतीक रूप में मनाया जाता है।
© 2025 — गोपाष्टमी उत्सव विशेष रिपोर्ट | हिमांशु मोदी









