जब मंच बना संस्कारों का उत्सव: गुरुकुलम प्रवेश स्कूल का वार्षिकोत्सव, जहाँ शिक्षा ने रचा उजाले का संसार

✍️इरफान अली लारी की रिपोर्ट
हूक: देवरिया के भाटपार रानी में आयोजित गुरुकुलम प्रवेश स्कूल का वार्षिकोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि वह क्षण था जहाँ छोटे-छोटे बच्चों के सपनों ने मंच पर आकार लिया और शिक्षा ने जीवन के अंधकार को दूर करने का संदेश दिया।

देवरिया, भाटपार रानी। कभी-कभी स्कूल केवल शिक्षा देने का स्थान नहीं होते, बल्कि वे ऐसे जीवंत केंद्र बन जाते हैं जहाँ सपने आकार लेते हैं, संस्कार जन्म लेते हैं और भविष्य की नींव रखी जाती है। सोमवार, 30 मार्च 2026 का दिन भी कुछ ऐसा ही साक्षी बना, जब गुरुकुलम प्रवेश स्कूल का वार्षिकोत्सव पूरे उल्लास, ऊर्जा और भावनात्मक गरिमा के साथ मनाया गया। यह आयोजन मात्र एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि वह अवसर था जहाँ बच्चों की मेहनत, शिक्षकों की साधना और अभिभावकों की उम्मीदें एक ही मंच पर साकार होती नजर आईं।

🎓 शिक्षा: जीवन का उजाला

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रोफेसर विवेक नाथ त्रिपाठी रहे। उनके आगमन से कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा के महत्व को अत्यंत सरल लेकिन गहन शब्दों में व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह शक्ति है जो जीवन के हर अंधकार को समाप्त कर सकती है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली ऊर्जा है।

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उनके शब्दों ने उपस्थित विद्यार्थियों के मन में एक नई चेतना का संचार किया। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, लेकिन जो विद्यार्थी निरंतर प्रयास करते हैं और अनुशासन को अपनाते हैं, वही अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं। उनके विचारों ने पूरे वातावरण को प्रेरणादायक बना दिया।

🪔 गरिमा और अनुशासन का संगम

कार्यक्रम की अध्यक्षता मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. के. एन. ठाकुर ने की। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक संतुलित और अनुशासित दिशा प्रदान की। वहीं, कार्यक्रम का संचालन कप्तान राजेंद्र पांडे द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी सधी हुई शैली से पूरे आयोजन को व्यवस्थित बनाए रखा।

मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों और वक्ताओं ने अपने विचारों के माध्यम से शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। इस दौरान पूरा वातावरण ज्ञान, संस्कार और प्रेरणा से ओतप्रोत दिखाई दिया।

🌈 बच्चों की मुस्कान: सफलता की असली पहचान

कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक और उत्साहपूर्ण क्षण वह था, जब छोटे-छोटे बच्चों को उनके वार्षिक परीक्षा परिणाम के आधार पर रिपोर्ट कार्ड वितरित किए गए। बच्चों के चेहरे पर जो खुशी और आत्मविश्वास झलक रहा था, वह उनके पूरे वर्ष की मेहनत का प्रमाण था।

अभिभावकों की आंखों में भी गर्व साफ दिखाई दे रहा था। यह दृश्य केवल अंक प्राप्त करने का नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का प्रतीक था। बच्चों की मुस्कान और तालियों की गूंज ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।

🤝 समाज का सहयोग: एक मजबूत आधार

इस वार्षिकोत्सव को सफल बनाने में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में श्री गंगेश्वर नाथ तिवारी, स्वतंत्र तिवारी, हरिशंकर तिवारी, हेमंत तिवारी, डॉ. अरुण सिंह, रविकांत द्विवेदी, मानवी तिवारी, अजय मिश्रा, बृजेंद्र नाथ तिवारी, मुकेश पांडे, डॉ. राममूर्ति सिंह, कृष्ण गुप्ता, जितेंद्र जायसवाल, सतीश उपाध्याय, अरविंद यादव, सत्येंद्र पांडे, राजेश तिवारी, कृष्ण कुमार सिंह, बी. पांडे, बाबूलाल गुप्ता, विनय पांडे, ज्ञानेंद्र तिवारी और मोहन नारायण पांडे सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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इन सभी की उपस्थिति ने यह साबित किया कि शिक्षा केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही सशक्त बनती है।

🏫 विद्यालय की भूमिका: शिक्षा से आगे

विद्यालय के डायरेक्टर लोकेश दुबे, व्यवस्थापक बृजेश दुबे और प्रधानाचार्य अंजू सिंह के संयुक्त प्रयासों ने इस आयोजन को एक नई ऊंचाई प्रदान की। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विद्यालय केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विद्यालय प्रशासन का उद्देश्य है कि बच्चों को केवल किताबों का ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन के मूल्य, अनुशासन और आत्मविश्वास भी सिखाया जाए। यही कारण है कि यह विद्यालय क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है।

✨ शिक्षा: एक सतत यात्रा

कार्यक्रम के समापन के साथ ही एक बात स्पष्ट हो गई कि शिक्षा केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सतत यात्रा है। यह यात्रा बच्चों को न केवल ज्ञान देती है, बल्कि उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की शक्ति भी प्रदान करती है।

गुरुकुलम प्रवेश स्कूल का यह वार्षिकोत्सव इस बात का प्रमाण था कि जब शिक्षा को संस्कारों के साथ जोड़ा जाता है, तो वह केवल पढ़ाई नहीं रहती, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन बन जाती है।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों की उपलब्धियों को सम्मानित करना और शिक्षा के महत्व को समाज तक पहुंचाना था।

प्रो. विवेक नाथ त्रिपाठी ने शिक्षा को जीवन के अंधकार को समाप्त करने वाला सबसे सशक्त माध्यम बताया।
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विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास, संस्कार और आधुनिक शिक्षा के संतुलन पर विशेष ध्यान देता है।

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