सीतापुर: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के लहरपुर क्षेत्र में सोमवार तड़के उस समय हलचल मच गई, जब प्रशासन ने कथित रूप से अवैध रूप से निर्मित एक मस्जिद पर बुलडोजर चला दिया। करीब 12 वर्ष पुरानी इस संरचना को ध्वस्त किए जाने के बाद न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
प्रशासन के अनुसार, यह मस्जिद तालाब की जमीन पर अवैध रूप से निर्मित की गई थी। लंबे समय से चल रहे विवाद और न्यायालय के आदेश के बाद आखिरकार प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया।
तड़के पहुंचा प्रशासन, भारी सुरक्षा तैनात
अपर जिलाधिकारी नीतीश कुमार सोमवार सुबह अधिकारियों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने इस कार्रवाई को संवेदनशील मानते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। मौके पर एडीएम, एएसपी और स्थानीय थाना प्रभारी सहित करीब 500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
पूरे ऑपरेशन को सख्त निगरानी में अंजाम दिया गया, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो सके।
अदालत के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, नयागांव बेहटी स्थित इस मस्जिद को लेकर ग्राम सभा की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में कहा गया था कि मस्जिद का निर्माण तालाब और कब्रिस्तान की जमीन पर किया गया है।
इस मामले में 18 दिसंबर 2025 को तहसील अदालत में मुकदमा दायर किया गया था। इसके बाद 6 जनवरी 2026 को अदालत ने मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए संबंधित पक्ष को बेदखल करने का आदेश दिया था। साथ ही निर्माण हटाने के लिए 15 दिन की समयसीमा भी दी गई थी।
नोटिस के बाद भी नहीं हटाया गया निर्माण
प्रशासन का कहना है कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया था। बावजूद इसके, निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण नहीं हटाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का फैसला लिया।
समयसीमा समाप्त होने के बाद बुलडोजर कार्रवाई की गई और पूरी संरचना को ध्वस्त कर दिया गया।
लंबे समय से चल रहा था विवाद
अधिकारियों के अनुसार, इस मस्जिद को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई थी। ग्राम सभा का लगातार दावा था कि निर्माण सार्वजनिक भूमि पर किया गया है, जिससे भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
इसी पृष्ठभूमि में मामला न्यायालय तक पहुंचा और अंततः प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी।
ध्वस्तीकरण पर उठे सवाल
इस कार्रवाई के बाद विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मस्जिद के मौलाना अब्दुल रहमान ने इस पूरे प्रकरण पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए इसे एक राजनीतिक मुद्दा बताया है।
दूसरी ओर, प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से न्यायालय के आदेश और विधिक प्रक्रिया के तहत की गई है।
कानूनी प्रक्रिया बनाम सामाजिक संवेदनशीलता
यह मामला केवल एक अवैध निर्माण की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस संतुलन का भी परीक्षण है, जिसमें प्रशासन को कानून का पालन करते हुए सामाजिक संवेदनशीलता को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
एक ओर प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इस कदम के सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों को लेकर चर्चा जारी है।
निष्कर्ष: कार्रवाई के बाद बढ़ी बहस
सीतापुर की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई किस तरह और किन परिस्थितियों में की जानी चाहिए।
जहां प्रशासन इसे कानून के दायरे में लिया गया आवश्यक कदम बता रहा है, वहीं इस पर उठ रही प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और संवाद की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन यह घटना आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का विषय बनी रह सकती है।
❓ मस्जिद को क्यों ध्वस्त किया गया?
प्रशासन के अनुसार, मस्जिद तालाब की जमीन पर अवैध रूप से निर्मित थी और अदालत के आदेश के बाद कार्रवाई की गई।
❓ क्या पहले नोटिस दिया गया था?
जी हां, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत नोटिस जारी किया गया था और समयसीमा भी दी गई थी।
❓ सुरक्षा के क्या इंतजाम थे?
कार्रवाई के दौरान लगभग 500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।





