सड़कों और खाली मैदानों में बिखरी बेजुबानों की लाशें केवल दृश्य नहीं थीं—वे सवाल थीं, व्यवस्था पर, निगरानी पर और संवेदनशीलता पर।
वीआईपी ज़ोन में मौतें और उठते सवाल
स्थानीय लोगों के अनुसार, भेड़ें पूरी तरह स्वस्थ थीं। अचानक एक-एक कर गिरना और कुछ ही घंटों में दर्जनों की मौत—यह सब किसी गंभीर कारण की ओर इशारा करता है।
मड़ियांव में मौत का रहस्य: साजिश या ज़हरीला भोजन?
शिकायत में आशंका जताई गई है कि या तो कार्यक्रम के बाद खुले में फेंका गया जहरीला कचरा भेड़ों ने खा लिया, या फिर किसी ने जानबूझकर जहर देकर यह अमानवीय कृत्य किया।
CM योगी का सख्त रुख: प्रशासन हरकत में
सरकारी बयान में साफ कहा गया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय हो गया और पूरे इलाके की जांच शुरू कर दी गई।
17 लाख रुपये का मुआवजा: राहत या सांत्वना?
हालांकि यह आर्थिक मदद जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे उन गरीब पशुपालकों की आजीविका का नुकसान पूरा हो पाएगा, जिनकी पूरी दुनिया इन्हीं बेजुबानों पर टिकी थी?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
यह भी जांच का विषय है कि अगर भेड़ों ने जहरीला पदार्थ खाया, तो वह वहां आया कैसे? किसकी लापरवाही या साजिश से यह ज़हर खुले में पड़ा था?
पशु प्रेमियों में आक्रोश, जवाबदेही की मांग
राजधानी जैसे हाई-प्रोफाइल शहर में यदि बेजुबानों की सुरक्षा नहीं, तो बाकी प्रदेश का क्या?
क्या हम बेजुबानों की जान को केवल आंकड़ों और मुआवजे तक सीमित कर देंगे?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भेड़ों की मौत की मुख्य वजह क्या मानी जा रही है?
फिलहाल जहरीला भोजन या जानबूझकर जहर देने की आशंका है। अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगी।
सरकार ने कितना मुआवजा घोषित किया है?
प्रति मृत भेड़ 10,000 रुपये, कुल 17 लाख रुपये की सहायता।
क्या किसी की गिरफ्तारी हुई है?
अभी जांच जारी है। दोषियों की पहचान पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट के बाद होगी।








