तानों की चोट इतनी गहरी थी कि पत्नी ने जिंदगी पर ही सवाल उठा दिया

लखनऊ में घरेलू विवाद के बाद आत्महत्या करने वाली युवती की सांकेतिक तस्वीर

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
IMG-20260131-WA0029
previous arrow
next arrow

हूक पॉइंट: घर के भीतर मज़ाक में कही गई एक टिप्पणी किस तरह संवेदनशील रिश्तों में दरार बन जाती है—लखनऊ की यह घटना उसी सामाजिक सच की ओर इशारा करती है, जहां शब्दों की हिंसा अक्सर अनदेखी रह जाती है।

तानों की चोट इतनी गहरी थी कि पत्नी ने जिंदगी पर ही सवाल उठा दिया—यह वाक्य महज़ एक शीर्षक नहीं, बल्कि उस त्रासदी का सार है जो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरानगर थाना क्षेत्र में सामने आई। यहां 28 वर्षीय मॉडलिंग से जुड़ी युवती तन्नू सिंह की कथित आत्महत्या ने न केवल एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया, बल्कि समाज के उस पक्ष पर भी सवाल खड़े किए हैं, जहां रिश्तों में बोले गए शब्दों की गंभीरता को अक्सर हल्के में ले लिया जाता है।

पुलिस के अनुसार, तन्नू सिंह अपने पति राहुल सिंह के साथ इंदिरानगर सेक्टर-14 में रहती थीं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बुधवार शाम परिवार के बीच हंसी-मजाक के दौरान पति द्वारा मज़ाक में कही गई एक टिप्पणी से वह गहराई से आहत हो गई थीं। परिजनों का दावा है कि इसी मानसिक आघात के बाद तन्नू अपने कमरे में चली गईं और बाद में उन्होंने फांसी लगाकर जीवन समाप्त कर लिया।

इसे भी पढें  ‘वो मुझे फूलन देवी बनने को मजबूर कर रहे हैं’ — उन्नाव रेप सर्वाइवर का डर, ग़ुस्सा या ऐलान❓

घटना की पृष्ठभूमि: सामान्य शाम से असामान्य अंत तक

परिजनों ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन पूरा परिवार सीतापुर में एक रिश्तेदार के यहां गया था। शाम को लौटने के बाद घर में सामान्य माहौल था। सभी सदस्य साथ बैठे, बातचीत हुई और हल्का-फुल्का मज़ाक भी चला। किसी को अंदेशा नहीं था कि यह सामान्य-सी शाम कुछ ही घंटों में इतनी भयावह परिणति तक पहुंच जाएगी।

इसी दौरान पति राहुल सिंह ने मज़ाक के लहजे में तन्नू को “बंदरिया” कह दिया। परिवार के अनुसार, यह शब्द सुनते ही तन्नू असहज हो गईं। उन्होंने कुछ नहीं कहा, लेकिन नाराज़ होकर अपने कमरे में चली गईं। परिजनों को लगा कि थोड़ी देर में वह सामान्य हो जाएंगी, जैसा अक्सर छोटे घरेलू मतभेदों में हो जाता है।

करीब एक घंटे बाद जब उन्हें भोजन के लिए बुलाया गया और अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो परिवार को चिंता हुई। दरवाज़ा खोलने पर जो दृश्य सामने आया, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया। तन्नू का शव कमरे में छत के पंखे से दुपट्टे के फंदे पर लटका मिला। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस कार्रवाई और जांच की स्थिति

सूचना मिलते ही इंदिरानगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया, जिसके बाद आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस का कहना है कि अभी तक इस मामले में कोई लिखित तहरीर प्राप्त नहीं हुई है।

इसे भी पढें  कानून के रक्षक बने लुटेरे ; CO ऋषिकांत शुक्ला सस्पेंड, विजिलेंस जांच में 100 करोड़ का राज

जांच अधिकारी के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, जिसका कारण पारिवारिक विवाद या मज़ाक में कही गई बात से उत्पन्न मानसिक आघात हो सकता है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। यदि परिजनों की ओर से कोई शिकायत या तहरीर दी जाती है, तो उसी आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

मॉडलिंग और संवेदनशीलता: एक अनदेखा पहलू

परिवार के सदस्यों ने बताया कि तन्नू सिंह मॉडलिंग के क्षेत्र में सक्रिय थीं और अपने करियर को लेकर काफी गंभीर और संवेदनशील थीं। यह पेशा जहां आत्मविश्वास की मांग करता है, वहीं लगातार होने वाली टिप्पणियां, तुलना और मानसिक दबाव भी साथ लाता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर कही गई कोई बात, जो बाहर से देखने में मामूली लगे, भीतर गहरी चोट कर सकती है।

परिजनों का कहना है कि तन्नू अपने काम को लेकर अक्सर भावनात्मक हो जाती थीं। वह सम्मान और समझ की अपेक्षा रखती थीं। ऐसे में पति द्वारा कही गई टिप्पणी ने संभवतः उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई, जिसका प्रभाव वह संभाल नहीं पाईं।

इसे भी पढें  सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने बनाया नया संगठन ‘RSS’ — पूर्वांचल में तेजी से फैल रहा नेटवर्क, वर्दी वितरण का वीडियो वायरल

शब्दों की हिंसा और सामाजिक जिम्मेदारी

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। रिश्तों में बोले गए शब्द, विशेषकर पति-पत्नी जैसे संवेदनशील संबंधों में, गहरा प्रभाव डालते हैं। मज़ाक और अपमान के बीच की रेखा कई बार इतनी महीन होती है कि एक क्षण की असावधानी भारी पड़ सकती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी और भावनाओं को हल्के में लेने की प्रवृत्ति ऐसे मामलों को जन्म देती है। आत्महत्या जैसे कदम अचानक नहीं उठाए जाते, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चल रहा मानसिक संघर्ष होता है, जो कभी-कभी किसी एक घटना से चरम पर पहुंच जाता है।

परिवार सदमे में, जवाबों की तलाश जारी

तन्नू के परिवार वाले गहरे सदमे में हैं। घर में मातम पसरा हुआ है और हर कोई यही सवाल कर रहा है कि क्या इस त्रासदी को रोका जा सकता था। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और परिजन भी खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

यह मामला एक बार फिर इस सच्चाई की ओर इशारा करता है कि घरेलू जीवन में संवाद, संवेदनशीलता और सम्मान कितने आवश्यक हैं। एक शब्द, एक टिप्पणी, और उसका असर—कभी-कभी पूरी ज़िंदगी की दिशा बदल देता है।

लखनऊ में नगर निगम की कार्रवाई के दौरान घर के बेडरूम से बाहर निकाली गई गाय और भैंसें
लखनऊ के रॉयल सिटी कॉलोनी में छापेमारी के दौरान घर के अंदर से निकाली गई गाय-भैंसें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top