उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की रफ्तार अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गई है। राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले ने निवेश, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में जिस गति से छलांग लगाई है, उसने इसे प्रदेश के उभरते औद्योगिक हब के रूप में स्थापित कर दिया है। मुख्यमंत्री 0 के नेतृत्व में लागू की गई निवेश-अनुकूल नीतियों का असर अब ज़मीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है।
निवेश के आंकड़ों में दिख रही औद्योगिक उड़ान
जिला प्रशासन द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बाराबंकी में अब तक कुल 21,854 करोड़ रुपये के निवेश समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित किए जा चुके हैं। इन समझौतों में 314 निवेशकों की सक्रिय भागीदारी शामिल है। यह आंकड़ा केवल निवेश की राशि नहीं बताता, बल्कि इस जिले में निवेशकों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण भी है।
यह औद्योगिक गतिविधि न केवल कागज़ों तक सीमित है, बल्कि इसका प्रत्यक्ष असर ज़मीन पर भी दिखाई दे रहा है। अब तक 7,261 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है, जो प्रशासनिक समन्वय और निवेशकों को दी गई सुविधाओं की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
110 औद्योगिक इकाइयों में शुरू हुआ उत्पादन
बाराबंकी जिले के औद्योगिक परिदृश्य में सबसे अहम उपलब्धि यह है कि अब तक 110 औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन कार्य शुरू हो चुका है। ये इकाइयाँ विभिन्न सेक्टरों से जुड़ी हैं और जिले की आर्थिक संरचना को बहुआयामी बना रही हैं।
इन औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से लगभग 17,571 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। यह आंकड़ा खासतौर पर स्थानीय युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण है, जिन्हें अब रोज़गार के लिए महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
किन क्षेत्रों में हो रहा है निवेश
बाराबंकी में आए निवेश प्रस्ताव केवल एक या दो सेक्टर तक सीमित नहीं हैं। यहां डेयरी, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट, डिस्टिलरी, सीबीजी गैस, मेडिकल इक्विपमेंट, रियल एस्टेट और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन विविध क्षेत्रों में निवेश से जिले की अर्थव्यवस्था अधिक स्थिर और टिकाऊ बनेगी। साथ ही, इससे अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, जिनका लाभ परिवहन, व्यापार और सेवा क्षेत्र को मिलेगा।
GBC-5 में 9 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य
ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (GBC-5) के तहत बाराबंकी जिले को 9,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य दिया गया है। इनमें से 8,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव पहले ही पोर्टल पर स्वीकृत हो चुके हैं।
यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश सरकार के उस विजन को दर्शाती है, जिसके तहत प्रदेश को देश का प्रमुख निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
हैदरगढ़ और रामसनेहीघाट बनेंगे नए औद्योगिक केंद्र
निवेश को धरातल पर उतारने के लिए जिले में कुल 518.92 एकड़ भूमि निवेशकों को उपलब्ध कराई गई है। तहसील रामसनेहीघाट में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र, तहसील हैदरगढ़ में औद्योगिक कॉरिडोर तथा नवाबगंज स्थित सुतमिल परिसर इस विकास की धुरी बन रहे हैं।
इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ सड़क, बिजली, पानी और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया जा रहा है।
निवेश मित्र पोर्टल से मिल रही तेज़ स्वीकृतियां
योगी सरकार द्वारा शुरू किए गए निवेश सारथी और निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से परियोजनाओं की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। इससे निवेशकों को पारदर्शी, समयबद्ध और सरल स्वीकृति प्रक्रिया का लाभ मिल रहा है।
जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के अनुसार, जिला प्रशासन निवेशकों को हर स्तर पर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि कोई भी परियोजना अनावश्यक देरी का शिकार न हो।
औद्योगिक विकास से बदलेगी सामाजिक-आर्थिक तस्वीर
बाराबंकी में हो रहा औद्योगिक विकास केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इससे जिले की सामाजिक-आर्थिक संरचना में भी बड़ा बदलाव आने की संभावना है। रोजगार बढ़ने से आय में वृद्धि होगी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर होगी।
प्रशासन का मानना है कि आने वाले वर्षों में बाराबंकी न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख औद्योगिक जिलों में गिना जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बाराबंकी को औद्योगिक हब क्यों कहा जा रहा है?
क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर निवेश, उत्पादन शुरू होने और हज़ारों रोजगार सृजित होने की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है।
कितने लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है?
अब तक शुरू हुई औद्योगिक इकाइयों से लगभग 17,571 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
कौन-कौन से सेक्टर में निवेश हो रहा है?
डेयरी, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट, मेडिकल इक्विपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग प्रमुख सेक्टर हैं।










