
देवरिया जिले के लार विकास खण्ड के एक गांव में बुधवार की रात आई एक बारात उस समय बैरंग लौट गई, जब शादी की रस्मों के बीच चढ़ाए गए गहनों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बताया जा रहा है कि सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव से 25 फरवरी की शाम बारात बड़े ही धूमधाम से लार थाना क्षेत्र के एक गांव में पहुंची थी। गाजे-बाजे, आतिशबाजी और स्वागत सत्कार के बीच माहौल पूरी तरह उत्सव में डूबा हुआ था। किसी को अंदेशा नहीं था कि कुछ ही घंटों बाद यही समारोह विवाद का रूप ले लेगा।
धूमधाम से हुआ स्वागत, पूरी हुई जयमाला
जानकारी के अनुसार बारात के दरवाजे पर पहुंचते ही लड़की पक्ष ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया। फूलमालाओं से बारातियों का अभिनंदन हुआ और द्वारपूजा की रस्म भी शांतिपूर्वक संपन्न हुई। इसके बाद जयमाला का कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें दूल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई। फोटो सेशन और वीडियो रिकॉर्डिंग के बीच दोनों पक्षों के परिजन और मेहमान खुशी के माहौल में शामिल रहे। भोज का भी आयोजन किया गया, जिसमें दोनों ओर से आए मेहमानों ने भोजन ग्रहण किया।
अब तक सब कुछ सामान्य था। शादी की प्रमुख रस्में पूरी हो चुकी थीं और परिजन आगे की परंपराओं की तैयारी में जुटे थे। दुल्हन को जयमाला स्टेज तक लाया गया और पूरी औपचारिकता के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
गुरहथन की रस्म में उठा नकली जेवर का सवाल
विवाद की शुरुआत तब हुई जब लड़के पक्ष के लोग आंगन में पहुंचकर गुरहथन की रस्म निभाने लगे। इसी दौरान चढ़ाए गए गहनों को लेकर लड़की पक्ष के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। आरोप लगाया गया कि कुछ गहने नकली हैं। देखते ही देखते यह आपत्ति बहस में बदली और बहस ने तीखा रूप ले लिया। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। परिवार के बुजुर्गों और गांव के जिम्मेदार लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की। पंचायत बैठाई गई ताकि मामला आपसी सहमति से सुलझ जाए। हालांकि कई दौर की बातचीत के बाद भी सहमति नहीं बन सकी।
डायल 112 को दी गई सूचना, मामला पहुंचा थाने
गुरुवार की सुबह लड़के पक्ष ने डायल 112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो लड़के पक्ष की ओर से शिकायत की गई कि शादी की रस्में पूरी होने के बाद भी लड़की पक्ष विदाई नहीं कर रहा है। दूसरी ओर लड़की पक्ष का कहना था कि गहनों को लेकर स्पष्टता आवश्यक है।
डायल 112 की टीम दोनों पक्षों को थाने लेकर आई। वहां घंटों चली बातचीत के बाद सुलहनामा तैयार किया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तत्काल विवाद को समाप्त करने पर सहमति जताई। हालांकि विदाई नहीं हुई और बारात बिना दुल्हन लौट गई।
दरवाजे पर रखा रहा विदाई का सामान
घटना के बाद गांव में चर्चा का विषय यही बना रहा कि शादी की सभी प्रमुख रस्में पूरी होने के बावजूद विवाद के कारण विदाई टल गई। दुल्हन के घर पर विदाई का सारा सामान दरवाजे पर रखा रह गया। ग्रामीणों के बीच इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक संबंधों पर भी इस विवाद का असर पड़ने की बात कही जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दोनों पक्ष आपसी संवाद से मसले को सुलझा लेते तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। फिलहाल पुलिस की मध्यस्थता से तत्काल टकराव टल गया है, लेकिन भविष्य में संबंध किस दिशा में जाएंगे, यह स्पष्ट नहीं है।
सामाजिक संदेश और बढ़ते विवाद
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि शादी जैसे सामाजिक और पारिवारिक आयोजन में पारदर्शिता और संवाद कितना महत्वपूर्ण है। छोटी-सी शंका भी यदि समय पर स्पष्ट न हो, तो वह बड़े विवाद का रूप ले सकती है। गांवों में अब भी परंपराओं और मान-सम्मान का महत्व अधिक है, ऐसे में सार्वजनिक रूप से उठे आरोप रिश्तों पर गहरा असर डालते हैं।
हालांकि पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रण में किया, लेकिन इस घटना ने क्षेत्र में चर्चा और चिंता दोनों को जन्म दिया है। सामाजिक स्तर पर ऐसे मामलों में संयम और समझदारी की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: विवाद की मुख्य वजह क्या थी?
विवाद शादी में चढ़ाए गए गहनों को लेकर हुआ। लड़की पक्ष ने कुछ गहनों को नकली बताते हुए आपत्ति जताई, जिसके बाद बहस बढ़ गई।
प्रश्न 2: क्या शादी की रस्में पूरी हो चुकी थीं?
हाँ, द्वारपूजा, जयमाला और भोज जैसी प्रमुख रस्में पूरी हो चुकी थीं। विवाद गुरहथन की रस्म के दौरान हुआ।
प्रश्न 3: पुलिस की क्या भूमिका रही?
लड़के पक्ष द्वारा डायल 112 पर सूचना देने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने बुलाकर सुलहनामा कराया।
प्रश्न 4: क्या दुल्हन की विदाई हुई?
नहीं, विवाद सुलझने के बावजूद विदाई नहीं हो सकी और बारात बिना दुल्हन लौट गई।








