ब्रेकिंग न्यूज़: लखनऊ में नहीं थम रही चोरियों की रफ्तार, लोहिया अस्पताल पार्किंग से दिनदहाड़े बाइक गायब


✍️ ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

सीसीटीवी कैमरे में कैद वारदात… अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह से खुलेआम बाइक चोरी… और पुलिस अब भी “जांच जारी” के भरोसे पर। सवाल यह है—क्या यही है डिजिटल लखनऊ की सुरक्षा व्यवस्था?

राजधानी लखनऊ, जिसे “डिजिटल सिटी” और “सुरक्षित शहर” के तौर पर प्रचारित किया जाता है, वहीं अब चोरी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला राम मनोहर लोहिया अस्पताल का है, जहां दिनदहाड़े पार्किंग से बाइक चोरी होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद है, फिर भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। पीड़ित परिवार लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है।

अस्पताल परिसर से गायब हुई बाइक

मिली जानकारी के अनुसार, रायबरेली जिले के थाना सरेनी क्षेत्र के काज़ीखेड़ा गांव निवासी जितेंद्र सिंह के नाम पंजीकृत एक अपाचे बाइक (UP33 BN 8292) को लोहिया अस्पताल की पार्किंग नंबर एक से चोरी कर लिया गया। बाइक का रंग ग्रे बताया गया है।

घटना उस समय की है जब पीड़ित का छोटा बेटा शैलेंद्र सिंह अपने मरीज को देखने अस्पताल आया था। वह दोपहर करीब 3 बजे अपनी बाइक पार्किंग में खड़ी कर अस्पताल के अंदर गया। जब कुछ समय बाद वह वापस लौटा, तो वहां उसकी बाइक गायब थी।

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सीसीटीवी में कैद, फिर भी बेखौफ चोर

इस पूरी घटना का वीडियो सीसीटीवी कैमरे में साफ देखा जा सकता है, जिसमें एक व्यक्ति आराम से पार्किंग में आता है और बिना किसी डर या हड़बड़ी के बाइक लेकर निकल जाता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि न तो वहां मौजूद किसी गार्ड को इसकी भनक लगती है और न ही मौके पर कोई रोक-टोक होती है।

यह दृश्य केवल एक चोरी नहीं, बल्कि सुरक्षा तंत्र की खुली पोल खोलता है। सवाल यह उठता है कि जब कैमरे लगे हैं, गार्ड तैनात हैं, फिर भी चोरी इतनी आसानी से कैसे हो जाती है?

डिजिटल शहर पर सवाल

लखनऊ को “डिजिटल और स्मार्ट सिटी” के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन इस तरह की घटनाएं इस दावे को कमजोर करती हैं। यदि अस्पताल जैसी जगह, जहां हर समय लोगों की आवाजाही रहती है, वहां भी चोरी सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक खुद को कितना सुरक्षित महसूस करेगा?

यह घटना केवल एक बाइक चोरी नहीं, बल्कि उस भरोसे की चोरी है, जो नागरिक प्रशासन और पुलिस पर करते हैं।

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

पीड़ित परिवार के अनुसार, उन्होंने घटना की जानकारी पुलिस को दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस की ओर से केवल “जांच जारी है” का आश्वासन दिया जा रहा है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज करने में भी आनाकानी की जा रही है। इससे पीड़ित परिवार की परेशानी और बढ़ गई है।

कौन जिम्मेदार?

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिम्मेदार कौन है? क्या यह अस्पताल प्रशासन की लापरवाही है, जिसने पार्किंग में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की? या फिर पुलिस की सुस्ती, जो समय पर कार्रवाई करने में विफल रही?

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यदि सीसीटीवी फुटेज मौजूद है, तो चोर की पहचान और गिरफ्तारी में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या यह केवल एक और मामला बनकर फाइलों में दब जाएगा?

पीड़ित की गुहार

पीड़ित परिवार का कहना है कि यह उनके लिए केवल एक वाहन की चोरी नहीं, बल्कि उनकी मेहनत की कमाई का नुकसान है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार कर उनकी बाइक बरामद की जाए।

उनका यह भी कहना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर समय रहते सख्ती नहीं हुई, तो चोरों के हौसले और बुलंद होते जाएंगे।

सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

लोहिया अस्पताल जैसे बड़े संस्थान में सुरक्षा की ऐसी स्थिति चिंताजनक है। यदि यहां पर गार्ड और निगरानी के बावजूद चोरी हो सकती है, तो यह पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी है।

अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस घटना को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वाकई “डिजिटल लखनऊ” में आम नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है या नहीं।

❓ घटना कहां हुई?

राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लखनऊ की पार्किंग में।

❓ चोरी हुई बाइक का नंबर क्या है?

UP33 BN 8292 (ग्रे रंग की अपाचे बाइक)।

❓ पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

फिलहाल पुलिस जांच का आश्वासन दे रही है, लेकिन ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

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