उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले से सामने आई यह घटना न केवल एक सड़क–रेल दुर्घटना है, बल्कि उस सामाजिक लापरवाही और अव्यवस्था का भी आईना है, जिसमें आम लोग रोज़ अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। रोजा रेलवे स्टेशन के आउटर इलाके में हुए इस भयावह हादसे ने पूरे जनपद को झकझोर कर रख दिया है। तेज रफ्तार गरीब रथ ट्रेन की चपेट में आने से एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत कुल पांच लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद स्टेशन परिसर और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई और जिसने भी मंजर देखा, वह सन्न रह गया।
📍 रोजा स्टेशन आउटर पर कैसे हुआ हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह दर्दनाक घटना उस समय हुई जब हरिओम नाम का युवक अपने रिश्तेदार सेठपाल, उनकी पत्नी पूजा और उनके दो मासूम बच्चों को रेलवे स्टेशन छोड़ने गया था। सभी लोग एक ही बाइक पर सवार थे। स्टेशन के आउटर इलाके में रेलवे ट्रैक पार करने के लिए उन्होंने उस कच्चे रास्ते का इस्तेमाल किया, जिसे आमतौर पर रेलवे कर्मचारी आंतरिक आवागमन के लिए प्रयोग करते हैं। यह कोई अधिकृत क्रॉसिंग नहीं थी, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच यह रास्ता वर्षों से प्रचलन में रहा है।
🚆 ट्रेन की दिशा का अंदाज़ा बना काल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाइक सवारों को ट्रेन की वास्तविक दिशा और रफ्तार का सही अंदाज़ा नहीं हो सका। उसी दौरान दिल्ली की ओर से आ रही गरीब रथ एक्सप्रेस पूरी रफ्तार में आउटर ट्रैक से गुजर रही थी। कुछ ही पलों में तेज आवाज़ के साथ ट्रेन बाइक समेत सभी लोगों को अपनी चपेट में ले गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और मानव शरीर के अंग दूर-दूर तक बिखर गए।
💔 मौके पर ही पांचों की मौत, क्षत-विक्षत मिले शव
हादसा इतना भीषण था कि दो पुरुष, एक महिला और दो छोटे बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। किसी को संभलने या मदद की गुहार लगाने तक का अवसर नहीं मिला। रेलवे ट्रैक पर पड़े शव इस कदर क्षत-विक्षत थे कि पहचान कर पाना मुश्किल हो गया। आसपास मौजूद लोग चीख-पुकार सुनकर दौड़े, लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।
🚔 सूचना पर GRP और रेलवे अधिकारी मौके पर
घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा। ट्रैक को कुछ समय के लिए बंद कर शवों को हटाने का कार्य किया गया। पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हादसे के कारण कुछ समय तक रेल यातायात भी प्रभावित रहा।
🗣️ परिजनों का बयान: “सब कुछ एक पल में खत्म हो गया”
मृतकों के परिजन लालाराम ने रोते हुए बताया कि हरिओम अपनी मां को शहर छोड़ने आया था। इसके बाद वह अपने साढ़ू सेठपाल और उसके परिवार के साथ गांव लौट रहा था। उन्हें क्या पता था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी। परिवार में मातम पसरा हुआ है और गांव में हर आंख नम है।
👮 पुलिस का पक्ष और प्रारंभिक जांच
जीआरपी थाना प्रभारी मदनपाल के अनुसार जिस रास्ते से बाइक सवार ट्रैक पार कर रहे थे, वह अधिकृत क्रॉसिंग नहीं है। आमतौर पर रेलवे कर्मचारी इसका इस्तेमाल करते हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि ट्रेन की गति और दिशा का सही आकलन न हो पाने के कारण यह हादसा हुआ। वहीं एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि मामले की विधिक जांच जारी है और सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
⚠️ सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
यह हादसा एक बार फिर रेलवे ट्रैक के आसपास सुरक्षा इंतज़ामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे अनधिकृत रास्ते, जिनका इस्तेमाल मजबूरी में आम लोग करते हैं, कब मौत का रास्ता बन जाएं—कहा नहीं जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेशन आउटर इलाकों में फेंसिंग, चेतावनी बोर्ड और वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग अनिवार्य किए जाने चाहिए।
🕯️ एक परिवार, एक सफर और अंतहीन सन्नाटा
इस हादसे ने न केवल पांच जिंदगियां छीन लीं, बल्कि उन सपनों, उम्मीदों और रिश्तों को भी खत्म कर दिया जो एक साधारण यात्रा के साथ जुड़े थे। शाहजहांपुर का यह हादसा आने वाले समय में एक चेतावनी के रूप में याद रखा जाएगा—कि लापरवाही और अव्यवस्था की कीमत अक्सर मासूम जिंदगियों को चुकानी पड़ती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यह हादसा कहां हुआ?
यह हादसा शाहजहांपुर जिले के रोजा रेलवे स्टेशन के आउटर इलाके में हुआ।
हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
इस दर्दनाक हादसे में कुल पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
मृतकों में कौन-कौन शामिल थे?
मृतकों में एक ही परिवार के पति-पत्नी, उनके दो बच्चे और एक रिश्तेदार शामिल है।
हादसे की मुख्य वजह क्या बताई जा रही है?
प्रारंभिक जांच में ट्रेन की दिशा और रफ्तार का सही अंदाज़ा न लग पाना मुख्य वजह माना जा रहा है।
क्या मामले में कोई कार्रवाई हो रही है?
जीआरपी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और विधिक जांच प्रक्रिया जारी है।









