शाहाबाद (हरदोई)। देश की सांस्कृतिक चेतना और बलिदान परंपरा को नमन करने का दिन—वीर बाल दिवस—शाहाबाद क्षेत्र में श्रद्धा, अनुशासन और सामाजिक एकता के भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शक्तिकेन्द्र कांशीराम कॉलोनी के बूथ पर आयोजित कार्यक्रम में सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने गुरु गोविंद सिंह जी के साहबजादे बाबा जोरावर सिंह जी एवं बाबा फतेह सिंह जी के चित्रों पर माल्यार्पण कर उनकी अमर शहादत को नमन किया। कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह ने दो बाल वीरों के अद्वितीय साहस और धर्मनिष्ठा से प्रेरणा लेने का संकल्प दोहराया।
वीर बाल दिवस का ऐतिहासिक और नैतिक महत्व
वीर बाल दिवस केवल एक स्मृति-दिवस नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास के उन उज्ज्वल अध्यायों की पुनर्पुष्टि है, जहाँ अल्पायु में भी राष्ट्र, धर्म और मानवीय मूल्यों के लिए सर्वोच्च बलिदान दिए गए। साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह की शहादत हमें यह सिखाती है कि सत्य, आस्था और न्याय के मार्ग पर अडिग रहना ही सच्चा शौर्य है। शाहाबाद में आयोजित इस कार्यक्रम ने नई पीढ़ी को यह संदेश दिया कि वीरता उम्र की मोहताज नहीं होती, बल्कि विचारों की दृढ़ता से जन्म लेती है।
शक्तिकेन्द्र कांशीराम कॉलोनी बूथ पर श्रद्धा-सम्मान का आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन शक्तिकेन्द्र कांशीराम कॉलोनी के बूथ पर सुव्यवस्थित और गरिमामयी ढंग से किया गया। मंच सादगीपूर्ण था, पर भावनाएँ प्रखर। उपस्थित पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर दो बाल शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, समयबद्धता और सामूहिक सहभागिता ने आयोजन को विशेष बना दिया।
वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति से बढ़ी गरिमा
इस अवसर पर आदरणीय जिलामहामंत्री श्री सतेन्द्र राजपूत जी, नगर महामंत्री श्री शुभाष सिंह जी, श्री सौरभ सिंह जी, नगर अध्यक्ष श्री अनिल पाण्डेय जी, श्री देवेंद्र प्रताप जी, श्री राजवीन्द्र सिंह, श्री रतन सिंह, श्री बिट्टू सिंह, श्री लखविन्द्र सिंह सहित अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में साहिबजादों के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की बात कही।
विचार-प्रस्तुति: शहादत से संस्कार तक
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वीर बाल दिवस हमें आत्मबल, धैर्य और सत्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाता है। साहिबजादों की शहादत केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए नैतिक मार्गदर्शन है। समाज में जब भी चुनौतियाँ आएँ, तब यह स्मरण आवश्यक है कि मूल्य-आधारित निर्णय ही दीर्घकालीन समाधान देते हैं।
युवाओं और समाज के लिए प्रेरक संदेश
शाहाबाद में हुए इस आयोजन का सबसे बड़ा संदेश युवाओं के लिए था—साहस, अनुशासन और सेवा-भाव। वक्ताओं ने युवाओं से आग्रह किया कि वे इतिहास से प्रेरणा लेकर राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ। सामाजिक समरसता, परस्पर सम्मान और संविधानिक मूल्यों की रक्षा ही सच्ची देशभक्ति है।
सामूहिक संकल्प और सामाजिक एकता
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक संकल्प लिया कि वे साहिबजादों के आदर्शों—सत्य, साहस और सेवा—को दैनिक जीवन में अपनाएँगे। यह आयोजन न केवल श्रद्धांजलि था, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त प्रदर्शन भी रहा।
क्लिकेबल सवाल-जवाब
वीर बाल दिवस क्यों मनाया जाता है?
वीर बाल दिवस साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह की शहादत को स्मरण कर उनके साहस और आदर्शों से प्रेरणा लेने के लिए मनाया जाता है।
शाहाबाद में कार्यक्रम कहाँ आयोजित हुआ?
यह कार्यक्रम शक्तिकेन्द्र कांशीराम कॉलोनी के बूथ पर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में कौन-कौन उपस्थित रहा?
जिलामहामंत्री, नगर महामंत्री, नगर अध्यक्ष सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
इस आयोजन का मुख्य संदेश क्या रहा?
साहस, सत्यनिष्ठा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा को जीवन में उतारने का संदेश।
युवाओं के लिए इस दिन का क्या महत्व है?
यह दिन युवाओं को मूल्य-आधारित नेतृत्व, अनुशासन और सेवा-भाव के लिए प्रेरित करता है।








