एक ही दिन में दो हादसे , दो छात्राओं की मौत ने झकझोरा पूरा इलाका

सांकेतिक फीचर इमेज: सड़क हादसे और गिरने की घटना में दो छात्राओं की मौत दर्शाता दृश्य

सुनील शुक्ला की रिपोर्ट
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एक ही दिन में दो हादसे—शनिवार का दिन क्षेत्र के लिए गहरे शोक और बेचैनी से भरा रहा। अलग-अलग परिस्थितियों में हुई दो दर्दनाक घटनाओं में दो नाबालिग छात्राओं की मौत हो गई। एक बच्ची तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आ गई, जबकि दूसरी छात्रा मामूली ठोकर के बाद सिर में गंभीर चोट लगने से जान गंवा बैठी। दोनों घटनाओं ने न सिर्फ परिवारों को तोड़ दिया, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और रोजमर्रा के रास्तों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

एक ही दिन, दो अलग हादसे—लेकिन दोनों में एक समान दर्द और टूटती हुई उम्मीदें।

नेशनल हाईवे पार करते समय हुआ दर्दनाक हादसा

शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब राष्ट्रीय राजमार्ग पार कर रही 11 वर्षीय बालिका तेज रफ्तार कार की चपेट में आ गई। हादसा इतना गंभीर था कि उसे पहले जिला अस्पताल और फिर हालत नाजुक होने पर लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

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मृतका प्रियंका (11) मछरेहटा क्षेत्र के जमलापुर मिरचौड़ी गांव की रहने वाली थी। वह अपनी मां मोनिका यादव और भाइयों के साथ प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में गई थी। मेला देखने के बाद वह सुल्तानपुर कमैचा गांव स्थित अपनी मौसी के घर कुछ समय के लिए रुकी थी।

शनिवार को परिजनों के साथ घर लौटते समय जैसे ही परिवार जलालपुर कस्बे के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पहुंचा, प्रियंका सड़क पार करने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इसी दौरान उसने अचानक सड़क पर दौड़ लगा दी, जबकि उसके परिजन सड़क किनारे खड़े रहे।

कार की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हुई बच्ची

उसी समय दूसरी दिशा से आ रही जिला औषधि निरीक्षक अनीता कुरील की कार बच्ची से टकरा गई। हादसे के वक्त अनीता कुरील स्वयं कार में मौजूद थीं। टक्कर के बाद प्रियंका सड़क पर गिर पड़ी और गंभीर रूप से घायल हो गई।

स्थानीय लोगों की मदद से बच्ची को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने उसे लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इंस्पेक्टर इतुल चौधरी ने बताया कि परिजनों की तहरीर मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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इस मामले में जब जिला औषधि निरीक्षक अनीता कुरील से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने आवाज न आने की बात कहते हुए कॉल काट दी।

दूसरी घटना: स्कूल से लौटते समय ठोकर बनी जानलेवा

इसी दिन दूसरी दुखद घटना सामने आई, जहां स्कूल से घर लौट रही आठवीं कक्षा की छात्रा की मामूली ठोकर मौत का कारण बन गई। सुकेठा गांव निवासी नंदिनी (12) शनिवार दोपहर उच्च प्राथमिक विद्यालय से पैदल घर लौट रही थी।

रास्ते में अचानक उसका पैर फिसल गया और वह सिर के बल पास पड़े पत्थर पर गिर पड़ी। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण वह बेहोश हो गई। परिजन उसे तुरंत सीएचसी सांडा लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

सीएचसी में तैनात चिकित्सक डॉ. सुनील यादव ने बताया कि छात्रा के सिर में गंभीर अंदरूनी चोट थी। परिजनों ने किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं कराई और बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया।

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दो मासूम मौतों से पसरा मातम, उठे गंभीर सवाल

एक ही दिन में हुई इन दो घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। एक ओर तेज रफ्तार वाहनों और सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी, तो दूसरी ओर ग्रामीण रास्तों की अनदेखी—दोनों ही परिस्थितियों में सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को उठाना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों और गांवों के संपर्क मार्गों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। नतीजतन, छोटी-सी चूक या फिसलन भी जानलेवा साबित हो रही है।

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