चित्रकूट के कर्वी स्थित शहीद स्मारक पार्क, एलआईसी तिराहा इन दिनों एक ऐसे जनसंघर्ष का साक्षी बना हुआ है, जो केवल विरोध नहीं बल्कि वर्षों की उपेक्षा के खिलाफ खड़ी हुई सामूहिक चेतना का प्रतीक बन चुका है। बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में पाठा क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर शुरू हुआ क्रमिक अनशन आज आठवें दिन भी अनवरत जारी है।
आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक वे घर वापसी नहीं करेंगे। मौसम की मार—आंधी, बारिश और तेज हवाएं—भी उनके संकल्प को डिगा नहीं सकीं। यह केवल आंदोलन नहीं, बल्कि उस पीड़ा की अभिव्यक्ति है, जो लंबे समय से अनसुनी होती रही है।
संघर्ष का केंद्र बना शहीद स्मारक पार्क
अनशन स्थल पर लगातार बढ़ती भीड़ यह संकेत दे रही है कि यह मुद्दा अब केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जनभावनाओं का आंदोलन बन चुका है। आमजन, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर अपना समर्थन दे रहे हैं। आंदोलनकारियों ने भी सभी क्रांतिकारी साथियों और क्षेत्रवासियों से सहयोग की अपील की है।
सड़क से स्वास्थ्य तक—मांगों का लंबा दायरा
इस आंदोलन की प्रमुख मांगों में देवांगना घाटी से ददरी मारकुंडी संपर्क मार्ग का चौड़ीकरण सबसे अहम है। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रुकमा खुर्द में एंबुलेंस की तैनाती और पर्याप्त स्टाफ की मांग भी जोर पकड़ रही है। क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी लोगों के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है।
शिक्षा और पुस्तकालयों पर विशेष जोर
आंदोलनकारियों ने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की मांग करते हुए ग्राम पंचायत रुकमा बुजुर्ग में बने पुस्तकालय को चालू करने तथा मारकुंडी, इटवा डुडैला और सरैया में नए पुस्तकालय स्थापित करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही डिग्री कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज और बालिका इंटर कॉलेज की स्थापना की मांग भी प्रमुख है।
युवाओं के लिए खेल और रोजगार की मांग
युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए न्याय पंचायत रुकमा खुर्द, मारकुंडी और सरैया में खेलो इंडिया योजना के तहत स्टेडियम बनाने की मांग की गई है। वहीं क्षेत्र में पलायन रोकने के लिए फैक्ट्रियों और रोजगार के साधन विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
बिजली, पानी और सिंचाई भी मुद्दे में शामिल
पाठा क्षेत्र में विद्युत कटौती और लो वोल्टेज की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इसके अलावा हर घर जल योजना को शीघ्र पूरा करने और तालाबों के सुंदरीकरण की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है। माडो बांध के गेट की मरम्मत और नहरों की खुदाई की मांग सिंचाई व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से की गई है।
परिवहन और आधारभूत सुविधाओं पर सवाल
कर्वी से ददरी माफी होते हुए मारकुंडी तक सरकारी बस सेवा शुरू करने, बहिलपुरवा रेलवे स्टेशन के अंडरपास की मरम्मत और फ्लाईओवर निर्माण, तथा मारकुंडी रेलवे स्टेशन पर फ्लाईओवर की मांगें भी प्रमुख रूप से उठाई गई हैं। इसके अलावा हर ग्राम पंचायत में श्मशान घाट और ददरी माफी में पुलिस चौकी की स्थापना की मांग भी शामिल है।
प्रशासन की भूमिका पर उठते सवाल
आठ दिनों से लगातार जारी इस अनशन के बावजूद अब तक ठोस समाधान सामने नहीं आना कई सवाल खड़े करता है। क्या यह आंदोलन भी अन्य आंदोलनों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा, या फिर प्रशासन इस बार गंभीरता दिखाएगा—यह देखना बाकी है।
निष्कर्ष: संघर्ष या चेतावनी?
पाठा क्षेत्र का यह आंदोलन केवल मांगों की सूची नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि यदि बुनियादी समस्याओं को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो यह असंतोष और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल, अनशन स्थल पर बैठे लोग अपने संकल्प पर अडिग हैं और उनकी यह दृढ़ता ही इस आंदोलन की असली ताकत है।
❓ यह अनशन कहां चल रहा है?
चित्रकूट के कर्वी स्थित शहीद स्मारक पार्क, एलआईसी तिराहा पर।
❓ अनशन किसके नेतृत्व में हो रहा है?
बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में।
❓ आंदोलन की मुख्य मांग क्या है?
सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी और रोजगार सहित कुल 20 प्रमुख मांगें उठाई गई हैं।
❓ आंदोलन कितने दिन से जारी है?
यह क्रमिक अनशन आठवें दिन भी लगातार जारी है।




