अमीन सुरेश उपाध्याय हत्याकांड ने आज़मगढ़ प्रशासनिक व्यवस्था, पुलिस जांच और न्याय प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। तहसील सदर में कार्यरत अमीन की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद अब यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की कसौटी बन गया है। परिजनों और शुभचिंतकों ने इस प्रकरण की CBI जांच की मांग करते हुए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को ज्ञापन सौंपा है।
📌 कौन थे सुरेश उपाध्याय और क्या था उनका पद
सुरेश उपाध्याय, मोहल्ला कोलबाजबहादुर, रोडवेज क्षेत्र, थाना कोतवाली, तहसील सदर, जनपद आजमगढ़ के निवासी थे। वह तहसील सदर में अमीन के पद पर कार्यरत थे और राजस्व विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में उनकी भूमिका रहती थी। परिजनों के अनुसार सुरेश उपाध्याय अपने कार्य को लेकर गंभीर और जिम्मेदार अधिकारी थे, जिनका किसी से खुला विवाद सामने नहीं आया था।
🕘 लापता होने की टाइमलाइन: CCTV से मोबाइल स्विच ऑफ तक
ज्ञापन में दी गई जानकारी के अनुसार 17 जनवरी 2026 की सुबह लगभग 9 बजे सुरेश उपाध्याय रोज़ की तरह ड्यूटी के लिए घर से निकले थे। CCTV फुटेज के अनुसार वह सुबह 10:22 बजे तहसील सदर परिसर में मौजूद थे। इसके बाद अचानक उनका कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों ने बताया कि उसी दिन सुबह करीब 11 बजे के बाद उनका मोबाइल नंबर 9450736417 स्विच ऑफ हो गया, जो संदेह को और गहरा करता है।
🔍 तलाश, बेबसी और तीन दिन की खामोशी
लगातार खोजबीन, रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क तथा संभावित स्थानों पर तलाश के बावजूद तीन दिनों तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। परिजनों का आरोप है कि प्रारंभिक स्तर पर प्रशासन और पुलिस की सक्रियता अपेक्षित स्तर की नहीं रही। यही वह बिंदु है, जहां से जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे।
🌾 खेत में मिला शव, थाने से मात्र 150 मीटर की दूरी
20 जनवरी 2026 की शाम लगभग 5 बजे सिधारी थाना क्षेत्र में एक सरसों के खेत से सुरेश उपाध्याय का शव बरामद हुआ। हैरानी की बात यह रही कि यह स्थान थाने से महज़ 150 मीटर की दूरी पर था। इतने नज़दीक शव मिलने के बावजूद तीन दिनों तक किसी को इसकी जानकारी न होना, जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
⚖️ पोस्टमार्टम रिपोर्ट: ज़हर से मौत, लेकिन कौन-सा ज़हर?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुरेश उपाध्याय की मौत का कारण ज़हर बताया गया है। रिपोर्ट में कार्बाइड जैसे जहरीले पदार्थ से मौत की आशंका जताई गई है। मृतक की नाक से खून निकलने की पुष्टि भी हुई है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ज़हर किस प्रकार का था और यह शरीर में कैसे पहुंचा। पुलिस ने बिसरा सुरक्षित कर विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
📄 CBI जांच की मांग क्यों?
हरिबंश मिश्र द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि इस संवेदनशील मामले में जनपद प्रशासन निष्पक्ष जांच नहीं कर रहा है। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते स्वतंत्र एजेंसी से जांच नहीं हुई तो साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। इसी कारण मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की गई है।
🧭 प्रशासन, पुलिस और जनता के सवाल
तहसील परिसर से लापता व्यक्ति का शव थाने के इतने करीब मिलना, मोबाइल का अचानक बंद होना और पोस्टमार्टम में ज़हर की पुष्टि—ये सभी तथ्य यह संकेत देते हैं कि मामला साधारण नहीं है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा आम है कि कहीं यह हत्या किसी पेशेवर या संस्थागत दबाव से जुड़ी तो नहीं।
🗣️ उप मुख्यमंत्री से क्या मांग की गई
ज्ञापन में उप मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि वह इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए CBI जांच के आदेश दें, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को कड़ी सजा मिल सके। परिजनों का कहना है कि उन्हें केवल न्याय चाहिए, न कि आश्वासन।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सुरेश उपाध्याय कब लापता हुए थे?
वह 17 जनवरी 2026 की सुबह ड्यूटी के लिए निकले थे और 10:22 बजे के बाद उनका कोई पता नहीं चला।
शव कहां से बरामद हुआ?
सिधारी थाना क्षेत्र में एक सरसों के खेत से, जो थाने से लगभग 150 मीटर दूर था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?
पोस्टमार्टम में ज़हर से मौत की पुष्टि हुई है, कार्बाइड जैसे पदार्थ की आशंका जताई गई है।
CBI जांच की मांग क्यों की जा रही है?
परिजनों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच नहीं हो रही, इसलिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच आवश्यक है।










