प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का धरना — पालकी रोके जाने से संत समाज में उबाल, यूपी से हरियाणा तक प्रशासन पर गंभीर सवाल

प्रयागराज माघ मेले में पालकी रोके जाने के विरोध में धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, रथ यात्रा और संत समाज का आक्रोश।
अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट
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प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का धरना अब केवल एक संत के व्यक्तिगत अपमान का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह घटना प्रशासनिक संवेदनशीलता, धार्मिक परंपराओं और सत्ता-व्यवस्था के संबंधों पर व्यापक बहस का कारण बनती जा रही है। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर पालकी (रथ) यात्रा रोके जाने के विरोध में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उसी स्थान पर धरने पर बैठ गए, जहां पुलिस उन्हें छोड़कर चली गई थी। बीते 24 घंटे से अधिक समय से वे ठंड में खुले पंडाल में बैठे हैं, उन्होंने न तो अन्न ग्रहण किया है और न ही जल, और स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, वे अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे।

पालकी रोके जाने पर धरना, ‘फुटपाथ ही मेरा शिविर’ का संकल्प

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार दोपहर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशासन पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य जब भी स्नान के लिए जाते हैं, पालकी में ही जाते हैं। यह कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि शताब्दियों से चली आ रही धार्मिक मर्यादा है। उन्होंने कहा, “जब कोई बच्चा हिंदू धर्म में जन्म लेता है, तभी से उसका गंगा-यमुना में स्नान का अधिकार होता है, लेकिन मुझसे यह अधिकार भी छीन लिया गया।” उन्होंने ऐलान किया कि वे प्रत्येक मेले में प्रयागराज आएंगे, लेकिन कभी भी शिविर में नहीं रहेंगे, बल्कि फुटपाथ पर ही डेरा डालेंगे।

अखिलेश यादव का फोन, ‘मैं आपके साथ हूं’

इस घटनाक्रम के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बातचीत की। अखिलेश यादव ने उन्हें आश्वस्त किया कि वे उनके साथ हैं और जल्द ही प्रयागराज आकर व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे। राजनीतिक हलकों में इस फोन कॉल को प्रशासन पर बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह मामला अब धार्मिक से आगे बढ़कर राजनीतिक विमर्श का रूप लेता जा रहा है।

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हर्षा रिछारिया का समर्थन, ‘ये बेटी आपके साथ है’

माघ मेले में चर्चित चेहरा बनीं हर्षा रिछारिया ने भी एक वीडियो जारी कर शंकराचार्य के समर्थन में आवाज उठाई। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि यह बेटी उनके साथ खड़ी है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और इससे संत समाज के साथ-साथ आम श्रद्धालुओं में भी रोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।

प्रशासनिक चुप्पी और भूख-प्यास का त्याग

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रविवार से अब तक कुछ भी नहीं खाया-पिया है। आश्चर्यजनक तथ्य यह भी है कि इतने लंबे समय तक चले इस धरने के दौरान कोई भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा। सोमवार सुबह शंकराचार्य ने उसी स्थान पर अपनी पूजा और दंड तर्पण संपन्न किया, जिससे यह संदेश गया कि वे किसी भी परिस्थिति में अपने संकल्प से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

CCTV फुटेज में क्या दिखा?

इस बीच मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य की रथ यात्रा के दौरान हुए बवाल का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि पुलिस ने मार्ग पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। जैसे ही शंकराचार्य के समर्थक आगे बढ़े, पुलिस से उनकी कहासुनी हो गई। तनाव बढ़ने पर समर्थकों ने बैरिकेडिंग हटाकर आगे निकलने का प्रयास किया, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ गई। इसी घटनाक्रम को लेकर संत समाज पुलिस पर अभद्रता और बल प्रयोग के आरोप लगा रहा है।

संतों और अखाड़ों की प्रतिक्रिया

यति नरसिंहानंद ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को साहसी धर्मगुरु बताते हुए कहा कि वे पहले भी कई मुद्दों पर मुखर रहे हैं। निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी रमण पुरी ने कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च होता है और जिस पीठ के वे आचार्य हैं, उसकी परंपरा आदि अनंत काल से चली आ रही है। ऐसे में उनके साथ हुआ व्यवहार पूरे संत समाज के लिए अपमानजनक है।

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‘प्रोटोकॉल किसके लिए?’—सतुआ बाबा पर उठे सवाल

मेले में मौजूद कई संतों और श्रद्धालुओं ने यह सवाल भी उठाया कि यदि प्रशासनिक प्रोटोकॉल का पालन हो रहा है, तो वह किसके लिए है। आरोप लगाए गए कि माघ मेले में सबसे अधिक व्यवस्था और सम्मान सतुआ बाबा के लिए दिखाया जा रहा है, जहां ADM से लेकर SP स्तर के अधिकारी नतमस्तक नजर आते हैं, जबकि शंकराचार्य जैसे सर्वोच्च धार्मिक पद पर आसीन संत के साथ व्यवहार स्तरहीन रहा।

हरिद्वार से हरियाणा तक विरोध

इस घटना के विरोध में हरिद्वार के कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में शिष्यों और श्री अखंड परशुराम अखाड़े के पदाधिकारियों ने श्रीराम नाम का कीर्तन कर विरोध दर्ज कराया। अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने प्रशासन पर संत समाज के अपमान का आरोप लगाते हुए मांग की कि उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारी स्वयं जाकर शंकराचार्य से माफी मांगें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो राष्ट्रपति को खून से पत्र लिखकर शिकायत की जाएगी।

‘मारपीट और अभद्रता अस्वीकार्य’

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य आचार्य पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि प्रयागराज का माघ मेला मूल रूप से साधु-संतों के स्नान और साधना के लिए आयोजित होता है। यदि प्रशासन व्यवस्था बनाने में विफल रहा, तो यह उसकी जिम्मेदारी है, लेकिन संतों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने शिष्यों की चोटियां पकड़कर उन्हें घसीटा, जो अत्यंत शर्मनाक है।

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मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग

हरियाणा में भी हिंदू संगठनों और गौसेवकों में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। गौसेवक और बजरंग दल से जुड़े समाजसेवी जोगिंदर सिंह ने शंकराचार्य के साथ हुए व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से उचित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस मामले में शीघ्र न्याय नहीं हुआ, तो यह आंदोलन का रूप ले सकता है।

एक घटना, कई सवाल

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का धरना प्रशासन और संत समाज के संबंधों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। क्या परंपराओं की अनदेखी कर व्यवस्था बनाई जा सकती है? क्या प्रोटोकॉल सभी के लिए समान है? और क्या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने पर भी प्रशासनिक चुप्पी बनी रह सकती है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में न केवल इस धरने की दिशा तय करेंगे, बल्कि माघ मेले की व्यवस्था और सरकार की संवेदनशीलता की भी परीक्षा लेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर क्यों बैठे हैं?

मौनी अमावस्या पर उनकी पालकी (रथ) यात्रा रोके जाने और कथित पुलिस दुर्व्यवहार के विरोध में वे धरने पर बैठे हैं।

उन्होंने कब से कुछ नहीं खाया-पिया है?

रविवार से अब तक उन्होंने अन्न और जल का त्याग किया हुआ है।

इस मुद्दे पर किन-किन ने समर्थन दिया?

अखिलेश यादव, हर्षा रिछारिया सहित कई संत, अखाड़े और हिंदू संगठन शंकराचार्य के समर्थन में सामने आए हैं।

आगे क्या चेतावनी दी गई है?

यदि प्रशासन माफी नहीं मांगता, तो विरोध को और तेज करने तथा राष्ट्रपति तक शिकायत पहुंचाने की चेतावनी दी गई है।

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