
चित्रकूट जनपद के मऊ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत करही में करही गौशाला गौवंश मौत मामला सामने आने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने जब नदी किनारे जाकर स्थिति देखी, तो वहां लगभग आधा दर्जन गौवंशों की मृत लाशें पड़ी हुई मिलीं। यह दृश्य न सिर्फ दिल दहला देने वाला था, बल्कि यह भी बताने के लिए काफी था कि यहां मौत सिर्फ प्राकृतिक नहीं, बल्कि व्यवस्था की देन है।
नियमों की खुलेआम अवहेलना: न दफन, न वैधानिक प्रक्रिया
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृत गौवंशों को न तो नियमानुसार दफनाया गया और न ही किसी प्रकार की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई। पशुपालन और स्थानीय प्रशासन से जुड़े स्पष्ट नियमों के बावजूद, शवों को यूं ही नदी किनारे फेंक दिया गया। यह न केवल पशु क्रूरता अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता और गैर-जिम्मेदारी का भी खुला प्रमाण है।
भूख और प्यास: मौत का सबसे बड़ा कारण
ग्रामीणों का आरोप है कि करही की गौशाला में लंबे समय से भूसा, हरा चारा और साफ पीने के पानी की भारी कमी बनी हुई है। गौवंशों को समय पर भोजन नहीं मिल रहा, पानी के लिए भी उन्हें संघर्ष करना पड़ता है। कमजोर और बीमार पड़ते गौवंश धीरे-धीरे दम तोड़ रहे हैं। करही गौशाला गौवंश मौत मामला इस बात की गवाही देता है कि यदि मूलभूत ज़रूरतें पूरी न हों, तो संरक्षण योजनाएं केवल दिखावा बनकर रह जाती हैं।
प्लास्टिक और पन्नी खाने को मजबूर जीव
हालात इतने भयावह हैं कि जीवित गौवंश गौशाला परिसर में पड़ी पन्नी, प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार, प्लास्टिक खाने से पशुओं की पाचन क्रिया बुरी तरह प्रभावित होती है और धीरे-धीरे यह मौत का कारण बन जाता है। सवाल यह है कि जब गौशाला में पर्याप्त चारा उपलब्ध नहीं, तो उसका संचालन किस उद्देश्य से किया जा रहा है?
मौत के बाद भी अपमान: ट्रैक्टर से घसीटकर नदी किनारे
स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जब भी किसी गौवंश की मौत होती है, तो मामले को छुपाने के उद्देश्य से उसके शव को ट्रैक्टर से घसीटते हुए नदी किनारे फेंक दिया जाता है। यह दृश्य न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि यह दिखाता है कि मृत पशु के प्रति भी सम्मान और नियमों की कोई परवाह नहीं की जा रही। करही गौशाला गौवंश मौत मामला में यह पहलू सबसे ज्यादा झकझोरने वाला है।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
नदी किनारे मृत पशुओं को फेंकना सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि यह पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है। सड़ते शवों से निकलने वाले बैक्टीरिया और दुर्गंध आसपास के गांवों के जल स्रोतों को दूषित कर सकते हैं। बरसात के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है, जब शवों के अवशेष पानी के साथ बहकर दूर-दराज़ के इलाकों तक पहुंच सकते हैं।
जीरो ग्राउंड रिपोर्ट ने खोली व्यवस्था की पोल
मामले की जानकारी मिलने पर मीडिया टीम ने मौके पर पहुंचकर जीरो ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में साफ दिखाई देता है कि किस तरह गौशाला प्रबंधन, पंचायत स्तर की जिम्मेदारी और प्रशासनिक निगरानी—तीनों ही स्तरों पर गंभीर लापरवाही बरती गई है। जिन योजनाओं का उद्देश्य गौवंशों को सुरक्षित आश्रय देना था, वही योजनाएं यहां पूरी तरह विफल नजर आईं।
सरकारी योजनाएं और ज़मीनी हकीकत
सरकार द्वारा गौवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं। गौशालाओं के संचालन, भूसा-चारा, पशु चिकित्सा सेवाएं और कर्मचारियों के मानदेय के लिए अलग-अलग मदों में बजट जारी होता है। लेकिन करही गौशाला गौवंश मौत मामला यह सवाल खड़ा करता है कि यदि बजट और योजनाएं मौजूद हैं, तो फिर गौवंश भूख-प्यास से क्यों मर रहे हैं?
जवाबदेही तय होगी या फाइलों में दब जाएगा मामला?
ग्रामीणों का कहना है कि अक्सर ऐसे मामलों में जांच के नाम पर औपचारिकताएं पूरी कर ली जाती हैं और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। यदि इस बार भी दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि गौवंशों की जान की कोई कीमत नहीं है। प्रशासन के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है।
ग्रामीणों की मांग: तत्काल जांच और ठोस कदम
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और गौशाला में तुरंत पर्याप्त भूसा, हरा चारा, साफ पानी और पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक ज़मीनी स्तर पर सुधार नहीं होगा, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराती रहेंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
करही गौशाला गौवंश मौत मामला क्या है?
यह मामला चित्रकूट के करही गांव की गौशाला में भूख-प्यास, अव्यवस्था और लापरवाही के कारण गौवंशों की मौत और उनके शवों को नदी किनारे फेंके जाने से जुड़ा है।
गौवंशों की मौत की मुख्य वजह क्या बताई जा रही है?
ग्रामीणों के अनुसार गौशाला में भूसा, हरा चारा और साफ पानी की कमी के कारण गौवंश कमजोर होकर दम तोड़ रहे हैं।
ग्रामीण प्रशासन से क्या मांग कर रहे हैं?
ग्रामीण तत्काल जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और गौशाला में मूलभूत सुविधाएं बहाल करने की मांग कर रहे हैं।










