बर्फ़ की चुप्पी में सांस लेता जन्नत सा प्यारा यहाँ का नजारा
— जहाँ सफ़ेदी भी ईमानदार है

✍️ अनिल अनूप 

जन्नत कभी-कभी बर्फ़ की चुप्पी में भी सांस लेती है… यहाँ की बर्फ सिर्फ़ सफ़ेद ही नहीं, ईमानदार भी है। यह कोई आम पर्यटन अनुभव नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ बिताया गया वह समय है, जहाँ शब्द धीरे बोलते हैं और अनुभूतियाँ गहराई से उतरती हैं। आइए, न आप भी इस एहसास को अनुभव करें।

IMG-20260212-WA0009
previous arrow
next arrow

यह कोई पर्यटन पोस्टर का वाक्य नहीं, न ही किसी यात्रा ब्लॉग की अतिशयोक्ति। यह उस अनुभूति का सार है, जो हिमाचल की बर्फ़ीली वादियों में कदम रखते ही मन और आत्मा पर उतर आती है। एक ऐसा अनुभव, जिसे शब्दों में बाँधना कठिन है, लेकिन फिर भी शब्द कोशिश करते हैं—क्योंकि कुछ दृश्य इतने गहरे होते हैं कि उन्हें सहेजने के लिए भाषा का सहारा लेना ही पड़ता है।

वैसे तो पूरा हिमाचल ही प्रकृति की खुली हुई कविता है। यहाँ हर मोड़ पर कोई नया शेर, हर घाटी में कोई नई तुक और हर पहाड़ पर कोई अधूरी लेकिन सुंदर पंक्ति बिखरी पड़ी है। कहीं देवदारों की कतारें किसी ध्यानस्थ साधु की तरह खड़ी हैं, तो कहीं नदियाँ चांदी की रेखाओं-सी धरती पर बहती चली जाती हैं। लेकिन जब बात बर्फ़ की होती है—उस सफ़ेद, शुद्ध और मौन सौंदर्य की—तो हिमाचल की हर जगह एक-सी नहीं होती।

इसे भी पढें  भारत-नेपाल सीमा पर चैरिटी की आड़ में आईएसआई की हलचल तेज? सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर

आज जब शिमला, कुल्लू-मनाली, कुफरी, नारकंडा, मैक्लोडगंज और डलहौजी जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल बर्फ़ के इंतज़ार में हैं, तब सैलानी थोड़े असमंजस में हैं। आसमान से उम्मीदें टपक रही हैं, लेकिन बादल अब तक उदार नहीं हुए। बारिश भी इतनी नहीं हुई कि बर्फ़ का भरोसा दिला सके। इसके बावजूद देश-विदेश से लोग हिमाचल का रुख कर रहे हैं—खासकर व्हाइट क्रिसमस की आस में।

लेकिन प्रकृति हर बार कैलेंडर के हिसाब से नहीं चलती। और यहीं से शुरू होती है उस जगह की कहानी, जो इंतज़ार नहीं करवाती—जो अभी, इसी क्षण, बर्फ़ का जादू दिखाने को तैयार है।

❄️ बर्फ़ से घिरी वह धरती, जहाँ मौन भी बोलता है — सिस्सू

हिमाचल प्रदेश के लाहौल क्षेत्र में बसा सिस्सू कोई चकाचौंध वाला हिल स्टेशन नहीं है। यहाँ न तो मॉल रोड है, न कैफे की कतारें, न ही सेल्फी लेने की भीड़। सिस्सू एक अनुभव है—धीमा, गहरा और ठहराव से भरा हुआ।

इसे भी पढें  बिहार एग्जिट पोल — क्या एग्जिट पोल ने महागठबंधन की उम्मीदें तोड़ दी?

यह गाँव चारों ओर से ऊँचे, बर्फ़ से लदे पहाड़ों से घिरा है। सर्दियों में जब यहाँ बर्फ़ पड़ती है, तो पूरा इलाका किसी श्वेत स्वप्नलोक में बदल जाता है। घरों की छतें, खेतों की मेड़ें, पेड़ों की शाखाएँ—सब पर बर्फ़ ऐसे टिक जाती है, जैसे प्रकृति ने किसी कलाकार की तरह एक ही रंग से पूरी तस्वीर बना दी हो।

सिस्सू की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहाँ की बर्फ़ शोर नहीं करती। यहाँ बर्फ़ गिरती है तो खामोशी और गहरी हो जाती है। यहाँ की सफ़ेदी आँखों को चकाचौंध नहीं देती, बल्कि मन को शांत करती है।

🌬️ हवा, जो सिर्फ़ ठंडी नहीं—शुद्ध होती है

जब आप सिस्सू की हवा में पहली बार साँस लेते हैं, तो आपको ठंड जरूर महसूस होगी, लेकिन उससे पहले एक और एहसास होगा—शुद्धता का। यह हवा शहरों की तरह फेफड़ों पर बोझ नहीं डालती, बल्कि भीतर तक ताज़गी भर देती है।

इसे भी पढें  आजमगढ़ में सीबीएसई शिक्षक कार्यशाला का भव्य आयोजन, साइबर सेफ्टी और सिक्योरिटी पर दिया गया विशेष प्रशिक्षण

यहाँ सुबह की हवा में एक हल्की सी नमी होती है, जो बर्फ़ की खुशबू साथ लाती है। शाम होते-होते पहाड़ों की परछाइयाँ लंबी हो जाती हैं और ठंड के साथ एक अद्भुत सुकून उतरने लगता है।

✨ क्यों संग्रहणीय है सिस्सू का अनुभव?

क्योंकि यह जगह आपको बदल देती है—धीरे से, बिना शोर किए। क्योंकि यहाँ की बर्फ़ सिर्फ़ सफ़ेद नहीं, ईमानदार है। क्योंकि यहाँ की खामोशी आपके भीतर की बेचैनी को पिघला देती है। यह यात्रा पर्यटन नहीं, आत्मा का विश्राम है।

हिमाचल को जन्नत कहा जाता है—लेकिन सिस्सू आकर एहसास होता है कि जन्नत कभी-कभी बर्फ़ की चुप्पी में भी सांस लेती है।

2 thoughts on “<h1 style="text-align:center; font-size:34px; line-height:1.35; margin-bottom:20px;"> <span style="color:#0d47a1; font-weight:700;">बर्फ़ की चुप्पी में सांस लेता जन्नत सा प्यारा यहाँ का नजारा</span><br> <span style="color:#2e7d32; font-weight:700;">— जहाँ सफ़ेदी भी ईमानदार है</span> </h1>”

  1. प्रकृति की सुंदरता और मनोभावों का विश्लेषण बहुत ही मार्मिक ढंग से किया गया है। लेकिन मैं प्रकृति को अपने जीवन में उतर करके अपने संदेश को साझा किया है। यह आलेख प्रकृति और मनुष्य के अटूट संबंधों को परिलक्षित करता है।

  2. निबंध में लेखक का प्राकृतिक प्रेम हिलो रे लेता हुआ प्रतीत होता है। प्रकृति और मनुष्य के अटूट संबंध को बहुत तिल शानदार तरीके और हृदय की गहराइयों से
    रसानुभुति को महसूस किया जा सकता हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top