आस्था सिंह–ऋतु त्रिपाठी विवाद :
आरोप-प्रत्यारोप के बीच सुसाइड बयान से मचा बवाल, एफआईआर की तैयारी

निजी बैंक विवाद में आस्था सिंह और ऋतु त्रिपाठी की साथ में दिखाई गई तस्वीर, डबल स्टैंडर्ड कलर रुल्ड बॉक्स फ्रेम में

✍️दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

आस्था सिंह–ऋतु त्रिपाठी विवाद उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आया एक संवेदनशील मामला है, जिसने निजी बैंकिंग क्षेत्र और सोशल मीडिया दोनों में हलचल मचा दी है। कानपुर में कार्यरत दो महिला कर्मचारियों के बीच शुरू हुआ यह विवाद अब आरोप-प्रत्यारोप, वीडियो बयान और एफआईआर की तैयारी तक पहुंच गया है। सुसाइड जैसे बयान और धमकी के दावों ने मामले को गंभीर कानूनी मोड़ पर ला खड़ा किया है।

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आस्था सिंह–ऋतु त्रिपाठी विवाद अब निजी मतभेद से आगे बढ़कर कानूनी और प्रशासनिक दायरे में प्रवेश करता दिख रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, आत्महत्या जैसा बयान और एफआईआर की तैयारी ने मामले को गंभीर मोड़ दे दिया है।

आस्था सिंह–ऋतु त्रिपाठी विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। निजी बैंक में कार्यरत दो महिला कर्मचारियों के बीच शुरू हुआ यह विवाद अब सोशल मीडिया की बहस, सार्वजनिक आरोपों और कानूनी चेतावनियों तक पहुंच चुका है। दोनों पक्षों की ओर से लगाए जा रहे आरोप-प्रत्यारोप ने स्थिति को संवेदनशील बना दिया है। एक ओर आस्था सिंह ने खुद को बदनाम किए जाने का आरोप लगाते हुए सुसाइड जैसा कदम उठाने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर ऋतु त्रिपाठी ने किसी भी वीडियो को वायरल करने से इनकार करते हुए धमकियां मिलने का दावा किया है।

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मामले ने तब नया मोड़ लिया जब आस्था सिंह का एक और वीडियो सामने आया। इस वीडियो में वह भावुक दिखाई देती हैं और कहती हैं कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया गया है। दूसरी तरफ ऋतु त्रिपाठी ने स्पष्ट किया है कि उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है और वह खुद भी कानूनी कार्रवाई करेंगी।

आस्था सिंह का बयान: “चरित्र से बड़ा दाग क्या होगा?”

वीडियो में आस्था सिंह कहती सुनाई दे रही हैं, “मुझे डिफेम किया गया है। मुझे ऐसा लगता है कि अब सुसाइड कर लेना चाहिए। चरित्र से बड़ा दाग और क्या लगेगा मेरे ऊपर।” यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे मानसिक दबाव का परिणाम बता रहे हैं, तो कुछ लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

आस्था का कहना है कि उनके खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया गया है। उन्होंने साफ कहा है कि वह अब ऋतु त्रिपाठी के परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगी और मानहानि का मुकदमा भी करेंगी। उनका आरोप है कि उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई है।

ऋतु त्रिपाठी का पक्ष: “मुझे भी मिल रही हैं धमकियां”

ऋतु त्रिपाठी ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर कोई वीडियो वायरल नहीं किया है। उनका कहना है कि उन्हें लगातार धमकी भरे संदेश मिल रहे हैं और उन्हें अनावश्यक रूप से विवाद में घसीटा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए जाते हैं तो वह भी कानूनी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगी।

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ऋतु के अनुसार, यह विवाद सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक उछाला गया है, जिससे दोनों पक्षों की निजी और पेशेवर जिंदगी प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि यदि जरूरत पड़ी तो वह भी एफआईआर दर्ज कराएंगी।

बैंक प्रशासन की भूमिका और जांच प्रक्रिया

मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक प्रशासन ने भी सक्रियता दिखाई है। बैंक के अधिकारियों ने जिला प्रशासन से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है। बताया जा रहा है कि बैंक की एक आंतरिक जांच टीम गठित की गई है, जो तथ्यों की पड़ताल कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को वीडियो कॉल के जरिए ऋतु त्रिपाठी का बयान दर्ज किया गया। हालांकि आस्था सिंह फिलहाल अवकाश पर हैं और अभी तक जांच टीम ने उनसे औपचारिक संपर्क नहीं किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि जांच प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है।

इस्तीफा और संस्थागत साख पर असर

ऋतु त्रिपाठी ने यह भी बताया कि उन्होंने इस्तीफा दिया है, लेकिन अभी तक उसे स्वीकार नहीं किया गया है। बैंक प्रबंधन पहले आंतरिक जांच पूरी करना चाहता है। इस विवाद का असर संस्थान की साख पर भी पड़ सकता है, क्योंकि दोनों कर्मचारी एक निजी बैंक से जुड़े हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संस्थानों को त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि विवाद सार्वजनिक मंचों पर और न बढ़े।

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सोशल मीडिया ट्रायल और मानसिक स्वास्थ्य

आस्था सिंह–ऋतु त्रिपाठी विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया ट्रायल किस हद तक किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। बिना जांच के आरोप, ट्रोलिंग और सार्वजनिक टिप्पणियां व्यक्ति को मानसिक रूप से तोड़ सकती हैं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे संवेदनशील मामलों में संयम बरतना चाहिए और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए। मानसिक तनाव की स्थिति में मनोवैज्ञानिक सहायता लेना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

कानूनी कार्रवाई की दिशा में अगला कदम

दोनों पक्षों द्वारा एफआईआर दर्ज कराने की घोषणा से स्पष्ट है कि मामला कानूनी दायरे में प्रवेश कर सकता है। यदि शिकायत दर्ज होती है तो पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और बयानों के आधार पर जांच करेगी। मानहानि और आईटी एक्ट से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई संभव है।

अंततः जांच एजेंसियों और न्यायालय के समक्ष ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल आवश्यकता है कि दोनों पक्ष संयम रखें और तथ्य सामने आने दें।

और अंततः

आस्था सिंह–ऋतु त्रिपाठी विवाद अब एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है। सुसाइड जैसा बयान, धमकियों के आरोप और एफआईआर की तैयारी ने मामले को गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और संस्थागत जवाबदेही दोनों के लिए एक बड़ा परीक्षण बन गया है।

समाचार दर्पण 24 के संपादक कार्य करते हुए, संयमित शब्द और गहरे असर वाली पत्रकारिता का प्रतीकात्मक दृश्य
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