कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) को प्रदेश के सबसे बड़े और भरोसेमंद चिकित्सा संस्थानों में गिना जाता है। यहां रोजाना हजारों मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं। लेकिन इन दिनों इस प्रतिष्ठित संस्थान में इलाज के साथ-साथ भोजन की व्यवस्था भी चर्चा का विषय बन गई है। शहर में उत्पन्न गैस संकट का असर अब अस्पताल की रसोई तक पहुंच गया है, जिसके कारण मरीजों की थाली में कटौती की खबर सामने आई है।
गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में आई कमी ने अस्पताल के किचन संचालन को मुश्किल बना दिया है। स्थिति यह हो गई है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को पहले जहां चार रोटियां दी जाती थीं, वहीं अब उन्हें केवल दो रोटियां ही दी जा रही हैं। रोटियों की इस कटौती ने मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है।
थाली में आधी हुई रोटियां, मरीजों की बढ़ी परेशानी
अस्पताल के किचन संचालकों का कहना है कि गैस की भारी कमी के कारण उन्हें भोजन व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा है। पहले मरीजों की थाली में चार रोटियां दी जाती थीं, लेकिन अब यह संख्या घटाकर दो कर दी गई है। इसके बदले मरीजों को ज्यादा मात्रा में चावल दिए जा रहे हैं।
हालांकि यह व्यवस्था कई मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। मरीजों और उनके तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने के कारण वे पहले ही शारीरिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे होते हैं। ऐसे में भोजन की कमी उन्हें और अधिक परेशान कर रही है। कई तीमारदारों का कहना है कि उन्हें आधा पेट खाना खाकर रात गुजारनी पड़ रही है।
कुछ मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में मिलने वाला खाना पहले से ही सीमित मात्रा में होता है। अब रोटियों की संख्या घटने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
डॉक्टरी सलाह और नई व्यवस्था के बीच टकराव
रोटियों की जगह चावल की मात्रा बढ़ाना हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में कई ऐसे मरीज भर्ती होते हैं जिन्हें विशेष आहार की जरूरत होती है।
विशेष रूप से डायबिटीज, अस्थमा, हृदय रोग या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अक्सर चावल खाने से मना किया जाता है। ऐसे मरीजों के लिए संतुलित भोजन बेहद जरूरी होता है।
चिकित्सकों का मानना है कि यदि मरीजों को उनकी बीमारी के अनुरूप भोजन न मिले तो उनके उपचार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए भोजन व्यवस्था में अचानक बदलाव स्वास्थ्य की दृष्टि से चिंता का विषय बन सकता है।
छात्रावासों की मेस में भी पड़ा असर
गैस संकट का असर केवल मरीजों तक सीमित नहीं है। KGMU के छात्रावासों में रहने वाले मेडिकल छात्रों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
बुधवार को कई छात्रावासों की मेस में गैस खत्म हो जाने के कारण भोजन तैयार ही नहीं हो पाया या फिर अधूरा रह गया। इस कारण मेडिकल छात्रों को मजबूरी में बाहर के ढाबों और होटलों में जाकर खाना खाना पड़ा।
मेस संचालकों का कहना है कि यदि गैस सिलेंडरों की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो मेस का संचालन करना बेहद कठिन हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से लकड़ी या वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करने की अनुमति भी मांगी है।
प्रशासन सक्रिय, तैयार हो रहा वैकल्पिक इंतजाम
मरीजों और छात्रों की बढ़ती शिकायतों के बाद KGMU प्रशासन अब इस समस्या के समाधान के लिए सक्रिय हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि गैस पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
बताया गया है कि अस्पताल प्रशासन बिजली से चलने वाले आधुनिक रोटी मेकर मशीन खरीदने की योजना बना रहा है। इससे गैस पर निर्भरता कम होगी और भोजन व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी।
इसके अलावा जिला प्रशासन ने भी भरोसा दिलाया है कि अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के लिए गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी और जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी।
बड़ी संस्था, छोटी समस्या नहीं
KGMU जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में भोजन व्यवस्था का प्रभावित होना केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा भी है। यहां रोजाना प्रदेश के अलग-अलग जिलों से मरीज इलाज कराने आते हैं।
ऐसे में अस्पताल में भोजन की पर्याप्त और संतुलित व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य संस्थानों में भोजन को भी उपचार का हिस्सा माना जाता है। इसलिए भोजन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
फिलहाल मरीजों और छात्रों की नजरें प्रशासन के उस वादे पर टिकी हैं जिसमें जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य करने और वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है।
FAQ
KGMU में रोटियों की संख्या क्यों घटाई गई?
गैस सिलेंडरों की कमी के कारण अस्पताल के किचन में भोजन बनाना मुश्किल हो गया, जिसके चलते रोटियों की संख्या चार से घटाकर दो कर दी गई।
मरीजों को रोटियों की जगह क्या दिया जा रहा है?
रोटियों की संख्या कम होने के कारण मरीजों को चावल की मात्रा बढ़ाकर दी जा रही है।
क्या इस संकट का असर छात्रों पर भी पड़ा है?
हां, KGMU के छात्रावासों की कई मेस में गैस खत्म होने से खाना नहीं बन पाया, जिससे छात्रों को बाहर जाकर भोजन करना पड़ा।
प्रशासन इस समस्या को कैसे हल करने की योजना बना रहा है?
KGMU प्रशासन बिजली से चलने वाले रोटी मेकर खरीदने की तैयारी कर रहा है और जिला प्रशासन ने गैस सिलेंडर की आपूर्ति जल्द सामान्य करने का आश्वासन दिया है।










