उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में उस समय हलचल मच गई जब एटा जिले में तैनात मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) नागेंद्र नारायण मिश्रा का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में उन्हें आंगनबाड़ी केंद्रों से पैसे की मांग करते हुए दिखाया जा रहा है। मामला सामने आते ही शासन स्तर पर इसकी गंभीरता से संज्ञान लिया गया और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई करते हुए सीडीओ नागेंद्र नारायण मिश्रा को निलंबित कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक तंत्र में भी खलबली मच गई थी। सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से फैलने के बाद यह मामला शासन तक पहुंचा और जांच के आदेश जारी कर दिए गए। फिलहाल निलंबन की कार्रवाई के साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
📌 वायरल वीडियो ने खड़ा किया विवाद
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कथित तौर पर सीडीओ नागेंद्र नारायण मिश्रा जिला समन्वयक संजीव पचौरी से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। इस बातचीत के दौरान वह प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र से 10 हजार रुपये की व्यवस्था कराने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में कथित तौर पर उन्हें यह कहते सुना जा सकता है कि हर आंगनबाड़ी केंद्र से दस हजार रुपये की व्यवस्था करनी होगी। साथ ही वह जिला समन्वयक से यह भी कहते नजर आते हैं कि आप अपने आदमी हैं और इस व्यवस्था को सुनिश्चित कराएं। यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आया, वैसे ही यह तेजी से वायरल हो गया और पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
⚠️ जिला समन्वयक ने बताई अलग कहानी
सूत्रों के अनुसार जिला समन्वयक संजीव पचौरी ने इस कथित मांग को मानने से इनकार कर दिया था। बताया जा रहा है कि उन्होंने किसी भी प्रकार के पैसे के लेनदेन में शामिल होने से साफ मना कर दिया। इसके बाद यह पूरा मामला विवाद का रूप लेता चला गया।
कहा जा रहा है कि इसी घटनाक्रम के बाद यह वीडियो किसी तरह सोशल मीडिया तक पहुंच गया और देखते ही देखते वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे।
🚨 उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर कार्रवाई
वीडियो वायरल होने के बाद मामला शासन के संज्ञान में लाया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद शासन स्तर से आदेश जारी करते हुए मुख्य विकास अधिकारी नागेंद्र नारायण मिश्रा को निलंबित कर दिया गया।
निलंबन के साथ ही उन्हें मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
📊 प्रशासनिक सेवा से जुड़ा करियर
नागेंद्र नारायण मिश्रा ग्राम्य विकास सेवा में बीडीओ पद से प्रोन्नत होकर मुख्य विकास अधिकारी बने थे। प्रशासनिक सेवा में उनका लंबा अनुभव बताया जाता है। हालांकि वायरल वीडियो के सामने आने के बाद उनकी कार्यशैली और आचरण को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी बहस छेड़ दी है। कई लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की घटनाओं की निष्पक्ष जांच की जाए तो प्रशासनिक व्यवस्था में विश्वास और मजबूत हो सकता है।
🔍 जांच में सामने आएंगे तथ्य
शासन ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जाए। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो में दिखाई दे रही बातचीत किस संदर्भ में की गई थी और इसमें कितनी सच्चाई है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
फिलहाल यह मामला प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
❓अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सीडीओ नागेंद्र नारायण मिश्रा को क्यों निलंबित किया गया?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में कथित तौर पर आंगनबाड़ी केंद्रों से पैसे मांगने की बात सामने आने के बाद उन्हें निलंबित किया गया।
क्या इस मामले की जांच हो रही है?
हाँ, शासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित अधिकारियों को इसकी जांच सौंपी गई है।
वीडियो में क्या दावा किया जा रहा है?
वीडियो में कथित तौर पर प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र से 10 हजार रुपये की व्यवस्था कराने की बात कही जा रही है।










