अक्षय सिंह हत्याकांड : चाचा-चचेरे भाइयों के हमले में गई जान, क्या थी इतनी बड़ी रंजिश?

हरदोई के अक्षय सिंह हत्याकांड में मृतक 36 वर्षीय युवक अक्षय सिंह की तस्वीर

✍️अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
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अक्षय सिंह हत्याकांड ने हरदोई के एक गांव में रिश्तों की जड़ों तक को हिला दिया है। जिस घर में खून का नाता था, वहीं से जान लेने की साजिश रची गई। चार साल पुरानी रंजिश ने आखिरकार एक युवक की जिंदगी छीन ली—और गांव में छोड़ गई दहशत, सवाल और सन्नाटा।

अक्षय सिंह हत्याकांड उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के बलेहरा गांव से सामने आया एक ऐसा मामला है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। गुरुवार सुबह गांव के बीचोंबीच 36 वर्षीय अक्षय सिंह की बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि रिश्ते के चाचा और चचेरे भाइयों ने उसे घेरकर धारदार हथियारों से हमला किया और तब तक वार करते रहे जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने ग्रामीणों को दहला दिया है और परिवार के भीतर पल रही रंजिश को उजागर कर दिया है।

सरेआम हमला, ग्रामीण बने मूकदर्शक

बताया जा रहा है कि घटना सुबह उस समय हुई जब अक्षय सिंह गांव में शौच के लिए घर से निकले थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उन्हें घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अक्षय ने अपनी जान बचाने की कोशिश की, भागे भी और मदद के लिए चिल्लाए भी, लेकिन हमलावरों की संख्या अधिक थी और उनके हाथों में धारदार हथियार थे। देखते ही देखते अक्षय लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े। गांव के लोग आसपास मौजूद थे, परंतु भय और अचानक हुए हमले के कारण कोई आगे नहीं बढ़ सका।

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भाले और कांता से लगातार वार

आरोप है कि हमलावरों ने भाले और कांता जैसे धारदार हथियारों से अक्षय पर कई वार किए। हमला इतना निर्मम था कि मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी फरार हो गए। वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

चार साल पुरानी रंजिश बनी वजह?

मिली जानकारी के अनुसार, मृतक अक्षय सिंह और आरोपियों के बीच पुरानी पारिवारिक रंजिश चल रही थी। बताया जा रहा है कि लगभग चार वर्ष पहले अक्षय के भाई अभय सिंह ने अपने ही चचेरे भाई अंकित सिंह की पत्नी को अपने साथ भगा लिया था। इस घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच गहरा विवाद पैदा हो गया। हालांकि, अभय और उसकी पत्नी गांव छोड़कर बाहर चले गए थे और लंबे समय तक वापस नहीं आए, लेकिन मन में पड़ी रंजिश खत्म नहीं हुई।

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करीब एक वर्ष पहले अक्षय, उसका भाई और भाभी हिमाचल प्रदेश से लौटकर हरदोई में रहने लगे, जबकि उनकी मां गांव में ही रहती थीं। इसी बीच वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए अक्षय गांव आए थे। आरोप है कि इसी अवसर को हमलावरों ने बदले की कार्रवाई के लिए चुना।

रिश्तों ने लिया खूनी मोड़

इस हत्याकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पारिवारिक विवाद किस हद तक घातक रूप ले सकते हैं। मृतक के चाचा अजीत सिंह उर्फ पिंकू सिंह और चचेरे भाई अंकित सिंह पर हत्या का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ था। हालांकि, किसी ने नहीं सोचा था कि यह विवाद हत्या तक पहुंच जाएगा।

पुलिस का बयान और कार्रवाई

हरदोई के पुलिस अधीक्षक अशोक मीणा ने बताया कि प्राथमिक जांच में पूर्व की रंजिश हत्या की मुख्य वजह प्रतीत हो रही है। आरोप गांव के ही अजीत सिंह उर्फ पिंकू सिंह, अंकित सिंह और अन्य कुछ व्यक्तियों पर है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। घटनास्थल की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है ताकि साक्ष्य एकत्र किए जा सकें।

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गांव में दहशत और सन्नाटा

घटना के बाद बलेहरा गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीणों के चेहरों पर भय साफ झलक रहा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के सदस्यों ने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है। पुलिस लगातार दबिश दे रही है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक मुख्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

कानून और समाज के लिए चुनौती

अक्षय सिंह हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह सामाजिक ताने-बाने पर भी सवाल उठाता है। जब रिश्तों के भीतर ही अविश्वास और प्रतिशोध की भावना घर कर जाए, तो परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं, यह घटना उसी का उदाहरण है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि पारिवारिक विवादों का समय रहते समाधान न होने पर वे हिंसक रूप ले सकते हैं।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। परिजनों और ग्रामीणों की नजर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कानून कितनी तेजी से अपना काम करता है और पीड़ित परिवार को न्याय कब तक मिल पाता है।

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