
एनकाउंटर की धमकी देकर वसूली 21 लाख रुपये की रंगदारी का सनसनीखेज मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ से सामने आया है, जहां कानून की रक्षा करने वाली वर्दी पर ही अपराध का गंभीर आरोप लगा है। एक सूत/धागा कारोबारी से कथित तौर पर हवाला लेनदेन का झूठा भय दिखाकर 21 लाख रुपये की अवैध वसूली किए जाने की पुष्टि के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले में दो दरोगाओं को निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि कार्रवाई के दौरान ही दोनों आरोपी फरार हो गए।
यह मामला केवल रंगदारी या भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि जब डराने वाला खुद पुलिस हो, तो आम नागरिक न्याय के लिए आखिर जाए कहां?
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
मेरठ के टीपी नगर और लिसाड़ी गेट क्षेत्र में कारोबार करने वाले एक सूत व्यापारी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत की थी कि लोहिया नगर थाने और उसके अंतर्गत आने वाली बिजली बंबा चौकी पर तैनात दो दरोगाओं ने उसे हवाला कारोबार में फंसाने की धमकी दी। आरोप है कि व्यापारी को यह कहकर डराया गया कि यदि उसने पैसा नहीं दिया तो उसका एनकाउंटर करा दिया जाएगा या किसी बड़े मामले में फंसा दिया जाएगा।
डेढ़ दिन तक चौकी में रोके जाने का आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया कि पीड़ित कारोबारी को करीब डेढ़ दिन तक चौकी में बैठाकर रखा गया। इस दौरान न तो उसे परिजनों से मिलने दिया गया और न ही किसी कानूनी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। मानसिक दबाव और डर के माहौल में उससे करीब 21 लाख रुपये की वसूली कर ली गई।
वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची शिकायत
पीड़ित कारोबारी ने आखिरकार हिम्मत जुटाकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से सीधे शिकायत की। शिकायत को गंभीर मानते हुए पूरे प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक नगर को सौंपी गई। जांच के दौरान दस्तावेज, बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया गया।
जांच में आरोप साबित, हवाला का आरोप झूठा
जांच रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि कारोबारी के खिलाफ हवाला लेनदेन का कोई ठोस प्रमाण नहीं था। यह आरोप केवल दबाव बनाने और अवैध वसूली के उद्देश्य से गढ़ा गया था। जांच में यह भी सामने आया कि वसूली की गई रकम व्यक्तिगत लाभ के लिए ली गई थी, न कि किसी वैधानिक कार्रवाई के तहत।
मुकदमा दर्ज, दोनों दरोगा निलंबित
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर दोनों दरोगाओं लोकेंद्र साहू और मुकेश कुमार के खिलाफ रंगदारी, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
क्राइम ब्रांच कार्यालय से फरारी
मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया जब पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए दोनों दरोगा पुलिस लाइन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय से फरार हो गए। यह घटना पुलिस व्यवस्था की आंतरिक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।
थाना प्रभारी की भूमिका भी जांच के घेरे में
प्रकरण में लोहिया नगर थाने के प्रभारी की भूमिका को भी संदिग्ध मानते हुए उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर मिलीभगत या लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वर्दी पर लगे दाग और सिस्टम पर सवाल
एनकाउंटर की धमकी देकर वसूली 21 लाख रुपये की रंगदारी का यह मामला पुलिस की उस छवि को गहरी चोट पहुंचाता है, जिसे आम जनता सुरक्षा और न्याय का प्रतीक मानती है। ऐसे मामलों से न केवल पीड़ित व्यक्ति, बल्कि पूरा समाज भय और अविश्वास के माहौल में चला जाता है।
फिलहाल, फरार दरोगाओं की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर दबिश दी जा रही है। पुलिस प्रशासन का दावा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और मामले को उदाहरण बनाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।






