लखनऊ में ‘जनता दर्शन’ का मार्मिक पल : जब एक छात्रा की सिसकियों ने डीएम विशाख जी की आंखें नम कर दीं

लखनऊ कलेक्ट्रेट के जनता दर्शन में डीएम के सामने फीस न जमा होने की पीड़ा बताते हुए रोती छात्रा

✍️सर्वेश यादव की रिपोर्ट
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लखनऊ जनता दर्शन मामला— उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कलेक्ट्रेट में आयोजित जनता दर्शन के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने प्रशासनिक गलियारों में अक्सर दिखने वाली औपचारिकता की दीवार को पलभर में तोड़ दिया। यह वह पल था, जब एक नन्ही छात्रा की सिसकियों ने न सिर्फ वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया, बल्कि खुद जिलाधिकारी विशाख जी की आंखें भी नम हो गईं।

हूक पॉइंट: “अंकल… पापा पिछले साल चल बसे, अब फीस कहां से लाऊं?”
बस इतना कहना था कि जनता दर्शन का माहौल बदल गया—फाइलें रुकीं, फोन लगे और एक बेटी का भविष्य सुरक्षित हो गया।

जब शिकायत नहीं, एक मासूम सवाल सामने था

लखनऊ कलेक्ट्रेट के जनता दर्शन में आमतौर पर जमीन, आवास, पेंशन और राशन जैसी समस्याएं आती हैं। कई बार शिक्षा से जुड़ी फीस माफी या परीक्षा संबंधी शिकायतें औपचारिक प्रक्रिया में उलझ जाती हैं। लेकिन उस दिन जो सामने आया, वह कोई फाइल नहीं थी—वह एक बेटी का टूटा हुआ आत्मविश्वास और एक मां की बेबसी थी।

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शंकरपुरवा से आई थी मां-बेटी की गुहार

शंकरपुरवा (गन्ने का पुरवा) की रहने वाली श्वेता मौर्य अपनी बेटी के साथ जनता दर्शन में पहुंचीं। मां ने भारी मन से बताया कि बेटी की यूपी बोर्ड परीक्षा सिर पर है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण फीस जमा नहीं हो पा रही है। डीएम कुछ प्रतिक्रिया देते, उससे पहले ही छात्रा फफक पड़ी।

“अंकल, पापा की डेथ हो गई है…”

बिटिया की आवाज कांप रही थी। उसने कहा— “अंकल, पापा पिछले साल ही चल बसे। हम किराए के मकान में रहते हैं। मम्मी के पास फीस देने के पैसे नहीं हैं।” यह सुनते ही कमरे में सन्नाटा पसर गया। वहां मौजूद अधिकारी, अधिवक्ता और कर्मचारी सभी कुछ क्षणों के लिए स्तब्ध रह गए।

हार्ट अटैक ने छीन लिया परिवार का सहारा

श्वेता मौर्य के पति की वर्ष 2025 में अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। इसके बाद तीन बेटियों की जिम्मेदारी अकेली श्वेता के कंधों पर आ गई। सीमित आमदनी, किराए का मकान और बढ़ती महंगाई—इन सबके बीच बेटी की पढ़ाई सबसे बड़ी चिंता बन गई थी।

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डीएम विशाख जी का त्वरित एक्शन

मां-बेटी की पीड़ा सुनते ही डीएम विशाख जी ने अन्य फरियादियों को रोक दिया। उन्होंने तुरंत शिक्षा विभाग के अधिकारियों को फोन मिलाया और स्पष्ट निर्देश दिए— “बच्ची को किसी भी हालत में बोर्ड परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा। प्रवेश पत्र तत्काल उपलब्ध कराया जाए।”

परीक्षा भी सुरक्षित, भविष्य भी

यह सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं था, बल्कि उस भरोसे की वापसी थी, जो अक्सर जरूरतमंद परिवारों में टूट जाता है। डीएम के निर्देश पर संबंधित विभाग ने तुरंत प्रक्रिया शुरू की और छात्रा के परीक्षा में बैठने का रास्ता साफ हो गया।

पीएम आवास योजना और पेंशन की सौगात

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि परिवार के पास गांव में जमीन तो है, लेकिन रहने के लिए पक्का घर नहीं। इस पर डीएम विशाख जी ने मौके पर ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2.5 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत करने के निर्देश दिए।

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बाल सेवा योजना से जुड़ेंगी छोटी बेटियां

इसके साथ ही श्वेता मौर्य को निराश्रित महिला पेंशन और उनकी दो छोटी बेटियों को बाल सेवा योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कराई गई। उद्देश्य साफ था—इस परिवार की पढ़ाई और जीवन दोनों पटरी से न उतरें।

एक ‘थैंक यू’ और भरी आंखें

सुनवाई खत्म होने के बाद मां और बेटी की आंखों में राहत साफ झलक रही थी। बिटिया ने मासूमियत से डीएम को “थैंक यू” कहा। यह शब्द शायद प्रशासनिक फाइलों में दर्ज नहीं होते, लेकिन उस पल वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल में दर्ज हो गए।

समाचार सार: लखनऊ कलेक्ट्रेट के जनता दर्शन में एक छात्रा की फीस न जमा हो पाने की मार्मिक गुहार ने प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। डीएम विशाख जी ने न केवल छात्रा को बोर्ड परीक्षा में बैठने का अवसर दिलाया, बल्कि परिवार को पीएम आवास, पेंशन और बाल सेवा योजना से जोड़कर उनके भविष्य को सुरक्षित किया।

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