भाजपा बीएलए पर गंभीर आरोप : जीवित मतदाताओं को मृत बताकर सूची बीएलओ को सौंपी

पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र के बूथ 283 पर मतदाता सूची विवाद के बीच ग्रामीणों से बातचीत करते सपा नेता और स्थानीय लोग

✍️इरफान अली लारी की रिपोर्ट
IMG_COM_202603020511552780
previous arrow
next arrow

भाजपा बीएलए पर गंभीर आरोप लगाते हुए पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मतदाता सूची की पारदर्शिता, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र संख्या 338 की ग्राम पंचायत कुर्मीपट्टी स्थित बूथ संख्या 283 पर भारतीय जनता पार्टी के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) ने कथित रूप से जीवित मतदाताओं को मृत दर्शाकर उनके नाम मतदाता सूची से हटवाने की कोशिश की।

72 जीवित मतदाताओं को मृत बताने का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार, भाजपा के बीएलए बृजभान दुबे ने बूथ संख्या 283 से जुड़े 72 मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटवाने के उद्देश्य से एक सूची तैयार कर संबंधित बीएलओ पुष्कर मिश्रा को सौंपी। आरोप है कि इस सूची में इन मतदाताओं को मृत दर्शाया गया, जबकि वे सभी जीवित हैं और गांव में ही निवास कर रहे हैं।

इसे भी पढें  डेढ़ करोड़ का गांजा— मक्के की बोरियों में छिपा नशे का जाल

जब बीएलओ ने सूची की प्रारंभिक जांच शुरू की, तो क्रम संख्या एक से लेकर चालीस तक दर्ज मतदाता पूरी तरह जीवित पाए गए। इनमें से कई लोग न केवल गांव में मौजूद थे, बल्कि उन्होंने स्वयं सामने आकर अपनी पहचान और जीवित होने के प्रमाण भी दिए। इस तथ्य के सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।

32 नामों की जांच अभी शेष

सूची में शामिल शेष 32 मतदाताओं की जांच फिलहाल पूरी नहीं हो सकी है। प्रशासनिक स्तर पर कहा जा रहा है कि जांच प्रक्रिया जारी है, लेकिन इस बीच जिस तरह से प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि हुई है, उसने ग्रामीणों और राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले को नहीं रोका गया, तो बड़ी संख्या में वास्तविक और जीवित मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। उनका आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई सुनियोजित साजिश के तहत की गई है।

इसे भी पढें  भाटपार रानी राष्ट्रीय मतदाता दिवस— लोकतंत्र की आत्मा को मजबूत करने का संकल्प

सूचना मिलते ही सपा नेतृत्व सक्रिय

मामले की जानकारी किसी माध्यम से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी तक पहुंची। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तुरंत स्थानीय नेताओं को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए।

उनके निर्देश पर पूर्व प्रमुख प्रतिनिधि संजय कुमार मल्ल, सपा विधानसभा उपाध्यक्ष राकेश राय, लोहिया वाहिनी के विधानसभा अध्यक्ष मुकेश सिंह सेंगर, सपा छात्र सभा के महासचिव मुराद अहमद सहित दर्जनों सपा कार्यकर्ता बूथ संख्या 283 पर पहुंचे।

ग्रामीणों संग सपा नेताओं का विरोध प्रदर्शन

सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों के साथ मिलकर बूथ परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भाजपा नेता जानबूझकर सपा समर्थक मतदाताओं, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटवाने का प्रयास कर रहे हैं।

सपा नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसी भी जीवित मतदाता का नाम सूची से हटाया गया, तो वे इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला मानते हुए आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे और आंदोलन को व्यापक स्तर तक ले जाएंगे।

इसे भी पढें  इंटर की मान्यता नहीं, फिर भी 12वीं में दाखिलाछात्रा का भविष्य दांव पर, डीएम के आदेश पर दो प्रधानाचार्यों पर केस

🔎 सवाल यह नहीं है कि जांच होगी या नहीं, सवाल यह है कि क्या मतदाता सूची जैसी संवेदनशील प्रक्रिया को राजनीतिक हथियार बनने से रोका जा सकेगा?

लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बीएलए स्तर पर इस तरह की मनमानी संभव है, तो यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने जैसा है। मतदाता सूची का उद्देश्य पात्र नागरिकों को मतदान का अधिकार देना है, न कि राजनीतिक लाभ के लिए उसे प्रभावित करना।

फिलहाल प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है, लेकिन ग्रामीणों और विपक्षी दलों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी कोशिशों पर पूरी तरह रोक लग सके।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top