UP Voter List SIR 2026 : ड्राफ्ट मतदाता सूची में 2.89 करोड़ नाम कटे, विपक्ष ने उठाए सवाल लेकिन आम लोग क्या बोले?

UP Voter List SIR 2026 के तहत उत्तर प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची की जांच करते मतदाता और बीएलओ।

अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट
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UP Voter List SIR 2026 को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और आम मतदाताओं के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद 6 जनवरी को भारत निर्वाचन आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की, जिसमें राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 12 करोड़ 55 लाख से कुछ अधिक रह गई है। यह संख्या पिछली सूची की तुलना में लगभग 2 करोड़ 89 लाख कम है, जिसने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और समावेशिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

ड्राफ्ट सूची में क्यों घटी मतदाताओं की संख्या?

निर्वाचन आयोग के अनुसार, ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम हटने के पीछे कई तकनीकी और प्रशासनिक कारण बताए गए हैं। आयोग का दावा है कि लगभग 46.23 लाख मतदाता मृत पाए गए, जबकि 2.17 करोड़ मतदाता या तो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं या अपने पुराने पते पर निवास नहीं कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त 25.47 लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए, यानी एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज था। आयोग के अनुसार, वर्ष 2025 की मतदाता सूची में लगभग 15 करोड़ 44 लाख मतदाता दर्ज थे, जबकि SIR के बाद यह संख्या घट गई।

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मुख्य निर्वाचन अधिकारी का पक्ष

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया कि SIR से जुड़े सभी गणना प्रपत्र प्राप्त कर लिए गए हैं। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद मतदाताओं को एक माह का समय दिया गया है, जिसमें वे नाम जोड़ने, संशोधन कराने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं की 2003 की सूची से मैपिंग नहीं हो पाई है, उन्हें नोटिस भेजे जाएंगे और यह पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से की जा रही है।

75 जिलों में कटौती, लखनऊ सबसे आगे

ड्राफ्ट सूची के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में मतदाता संख्या में कटौती दर्ज की गई है। इनमें राजधानी लखनऊ सबसे ऊपर है, जहां लगभग 12 लाख नाम कटे हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 30 प्रतिशत है। अक्तूबर 2025 में लखनऊ में 39.94 लाख मतदाता थे, जो अब घटकर लगभग 28 लाख रह गए हैं। सबसे अधिक कटौती कैंट विधानसभा क्षेत्र में देखी गई है।

आम मतदाता की परेशानी

लखनऊ पश्चिम विधानसभा क्षेत्र की 70 वर्षीय मतदाता सुधा निगम का नाम भी ड्राफ्ट सूची में नहीं पाया गया। उन्होंने बताया कि 2014 से वह नियमित मतदान कर रही थीं, लेकिन इस बार उन्हें दावा प्रस्तुत करना होगा। इसी तरह हैदरगंज निवासी आरिफ और उनके पूरे परिवार का नाम भी सूची से गायब है। कई मतदाताओं का कहना है कि उन्होंने SIR का फॉर्म भरा था, फिर भी 2003 की सूची से मिलान न होने के कारण उनका नाम हट गया।

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शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा असर

प्रयागराज में लगभग 11 लाख, गाजियाबाद में 28 प्रतिशत, कानपुर में 9 लाख, आगरा में 8 लाख, बरेली में 7 लाख, मेरठ और गोरखपुर में 6-6 लाख से अधिक नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में भी करीब 6 लाख मतदाता कम हो गए हैं।

ऑनलाइन प्रक्रिया बनी चुनौती

ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद मतदाता अपने नाम ऑनलाइन जांचने के लिए साइबर कैफे का सहारा ले रहे हैं। कई लोगों के पास वोटर आईडी नंबर नहीं होने से समस्या बढ़ गई है। बीएलओ पर भी दबाव बढ़ा है, क्योंकि उन्हें न केवल फोन कॉल संभालने पड़ रहे हैं, बल्कि नोटिस वितरण और दावों की प्रक्रिया भी पूरी करनी है।

राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता गुरदीप सप्पल ने दावा किया कि उनका और उनके परिवार का नाम भी कट गया है, जबकि वे 2003 से उत्तर प्रदेश में रह रहे हैं। वहीं समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया से गरीब और वंचित वर्ग के मतदाता प्रभावित हुए हैं। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने इसे “लोकतंत्र के साथ मज़ाक” बताया।

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बीजेपी का जवाब

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि पार्टी ड्राफ्ट सूची की समीक्षा करेगी और कार्यकर्ता बूथ स्तर पर यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी वैध मतदाता छूटने न पाए। पार्टी का दावा है कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है और इसे पहले भी कई बार अपनाया जा चुका है।

आगे क्या?

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल ड्राफ्ट सूची है। 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दावे और आपत्तियाँ दर्ज की जा सकती हैं, जबकि 27 फरवरी तक सभी मामलों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च 2026 को प्रकाशित होगी। आयोग का दावा है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम अंतिम सूची से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा।

महत्वपूर्ण सवाल-जवाब

क्या ड्राफ्ट सूची में नाम न होने का मतलब मतदान से वंचित होना है?

नहीं, यह केवल ड्राफ्ट सूची है। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची जारी होगी।

नाम जोड़ने के लिए कौन सा फॉर्म भरना होगा?

नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6, संशोधन के लिए फॉर्म-8 और गलत नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भरना होगा।

अंतिम मतदाता सूची कब जारी होगी?

अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च 2026 को प्रकाशित की जाएगी।




उत्तर प्रदेश में अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले वोटर लिस्ट सत्यापन प्रक्रिया, 1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस और ऑनलाइन जांच।
उत्तर प्रदेश में 6 मार्च को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची से पहले मतदाताओं के लिए आवश्यक सत्यापन और दस्तावेज प्रक्रिया। एआई इमेज। पूरी खबर पढने के लिए फोटो को क्लिक करें☝☝☝☝

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