Panchayat elections in UP: समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बना अड़चन, क्या अप्रैल–मई में टलेंगे पंचायत चुनाव?

Panchayat elections in UP में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में देरी के कारण पंचायत चुनाव अप्रैल-मई में टलने की आशंका दर्शाती प्रतीकात्मक इमेज

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

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Panchayat elections in UP इस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन—दोनों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन चुके हैं। प्रदेश में अप्रैल–मई 2026 के दौरान प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर असमंजस की स्थिति लगातार गहराती जा रही है। इसकी मुख्य वजह अब तक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना है, जिसके बिना पंचायतों में आरक्षण की वैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती। यही कारण है कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे या टलेंगे—इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आ पा रही है।

समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग क्यों बना Panchayat elections in UP की सबसे बड़ी बाधा?

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि यह संवैधानिक दायरे में बंधे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी स्थानीय निकाय चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने से पहले एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन अनिवार्य है। यह आयोग स्थानीय निकाय-स्तर पर ओबीसी आबादी का वैज्ञानिक और तथ्यात्मक अध्ययन करता है, जिसके आधार पर आरक्षण तय किया जाता है।

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Panchayat elections in UP के संदर्भ में पंचायतीराज विभाग ने छह सदस्यीय आयोग के गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा है, लेकिन अब तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। आयोग के गठन में हो रही यह देरी चुनावी कैलेंडर को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है।

एससी–एसटी आरक्षण तय, OBC आरक्षण ने बढ़ाई उलझन

जनगणना 2011 के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति की आबादी 20.6982 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की आबादी 0.5677 प्रतिशत है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में इन दोनों वर्गों के लिए आरक्षण का प्रतिशत लगभग तय रहता है और इस पर किसी तरह का बड़ा विवाद नहीं होता।

लेकिन Panchayat elections in UP में असली पेच अन्य पिछड़ा वर्ग को लेकर है। 2011 की जनगणना में ओबीसी का पृथक डेटा उपलब्ध नहीं है, जिससे सरकार को वैकल्पिक सर्वे पर निर्भर रहना पड़ता है।

2015 रैपिड सर्वे और 2021 चुनावों का अनुभव

वर्ष 2015 में कराए गए रैपिड सर्वे के अनुसार, उत्तर प्रदेश की ग्रामीण आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 53.33 प्रतिशत बताई गई थी। इसी सर्वे के आधार पर 2021 के पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण तय किया गया था।

हालांकि न्यायिक सीमाओं के चलते यह व्यवस्था लागू की गई कि किसी भी ब्लॉक में ग्राम प्रधान पदों का आरक्षण 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। यदि ओबीसी आबादी 27 प्रतिशत से कम है, तो उसी अनुपात में आरक्षण दिया जाएगा। प्रदेश स्तर पर भी OBC आरक्षण की अधिकतम सीमा 27 प्रतिशत तय है।

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नगर निकाय चुनावों से पंचायतों तक: वही फार्मूला?

नगर निकाय चुनावों के दौरान भी ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था। इसके बाद सरकार को नगर निकायों के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित करना पड़ा था। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही आरक्षण तय हुआ और चुनाव संभव हो सके।

अब Panchayat elections in UP के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाने की तैयारी है। प्रस्तावित राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग जिलों में जाकर ओबीसी आबादी का सर्वे करेगा और रिपोर्ट सौंपेगा। इसके बाद ही आरक्षण की अंतिम अधिसूचना जारी हो पाएगी।

समय पर चुनाव का दावा: मंत्री का राजनीतिक संदेश

पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर
ने दावा किया है कि Panchayat elections in UP समय पर ही कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आयोग के गठन को लेकर वे शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।

राजभर का कहना है कि आयोग गठित होते ही उसे दो माह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए जाएंगे। हालांकि प्रशासनिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इतने कम समय में सर्वे, रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर पाना चुनौतीपूर्ण होगा।

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तो क्या वाकई टल सकते हैं Panchayat elections in UP?

मौजूदा हालात में पंचायत चुनावों का समय पर होना कई कारकों पर निर्भर करता है—आयोग का तत्काल गठन, तेज़ सर्वे, बिना कानूनी अड़चन रिपोर्ट को स्वीकार करना और फिर आरक्षण अधिसूचना जारी करना। इनमें से किसी भी चरण में देरी हुई, तो चुनावों की तारीख आगे बढ़ सकती है।

राजनीतिक बयानबाज़ी और प्रशासनिक वास्तविकताओं के बीच Panchayat elections in UP फिलहाल एक संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर खड़े नज़र आ रहे हैं।

Panchayat elections in UP: सवाल जो हर ग्रामीण पूछ रहा है (FAQ)

क्या पंचायत चुनाव तय समय पर होंगे?

सरकार का दावा है कि चुनाव समय पर होंगे, लेकिन आयोग के गठन में देरी से अनिश्चितता बनी हुई है।

समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग क्यों जरूरी है?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, OBC आरक्षण तय करने से पहले आयोग की रिपोर्ट अनिवार्य है।

OBC आरक्षण की अधिकतम सीमा क्या है?

किसी भी स्तर पर OBC आरक्षण 27 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।

यदि आयोग देर से बना तो क्या होगा?

ऐसी स्थिति में Panchayat elections in UP को आगे टाला जा सकता है।

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