जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवरिया के तत्वावधान में आज दिनांक 07 मार्च 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। इस अवसर पर माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवरिया श्री धनेन्द्र प्रताप सिंह ने दीवानी न्यायालय परिसर से जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अभियान का उद्देश्य आमजन को राष्ट्रीय लोक अदालत की उपयोगिता, उसके लाभ और उसमें निस्तारित होने वाले मामलों के बारे में जानकारी देना है।
लोक अदालत सुलह-समझौते का प्रभावी मंच
इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश श्री धनेन्द्र प्रताप सिंह ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि लोक अदालत सुलह-समझौते का एक सशक्त और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से आमजन अपने सुलहनीय वादों का शीघ्र और सरल निस्तारण करा सकते हैं। छोटे-छोटे फौजदारी मामलों में भी अभियुक्त अपने जुर्म को स्वीकार करके अपने मामले का समाधान कर सकते हैं, जिससे न्याय प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि “न्याय चला निर्धन के द्वार” की अवधारणा को साकार करने के लिए यह जागरूकता वाहन विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेगा। इसके माध्यम से लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित होने वाले मामलों के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
जनजागरूकता के लिए प्रचार वाहन की पहल
माननीय न्यायाधीश ने बताया कि यह प्रचार वाहन जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर आमजन को राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व से अवगत कराएगा। वाहन के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जाकर लोगों को यह बताया जाएगा कि वे अपने सुलह योग्य मामलों को लोक अदालत में प्रस्तुत कर शीघ्र न्याय प्राप्त कर सकते हैं।
इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से उन लोगों तक न्याय की जानकारी पहुंचाना है जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से न्यायालय की प्रक्रिया तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। प्रचार वाहन के माध्यम से लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय लोक अदालत में कई प्रकार के मामलों का त्वरित समाधान संभव है।
सचिव ने न्यायिक अधिकारियों से सहयोग का आह्वान किया
इस अवसर पर सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं सिविल जज (सी.डी.) श्रीमती शैलजा मिश्रा ने राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए सभी न्यायिक अधिकारियों तथा संबंधित विभागों से सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रचार वाहन के माध्यम से आमजन को उनके मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत में नियत कर निस्तारित कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि लोक अदालत के माध्यम से विभिन्न प्रकार के मामलों का निस्तारण किया जाता है, जिनमें धारा 138 एन.आई. एक्ट से संबंधित मामले, बैंक वसूली वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाएं, पारिवारिक वाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण वाद, विद्युत एवं जल संबंधी मामले, सेवा से संबंधित वाद, राजस्व एवं सिविल वाद तथा प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान शामिल है।
न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति
इस कार्यक्रम के दौरान कई न्यायिक अधिकारी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय श्री बद्री विशाल पाण्डेय, पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण श्री इफ्तिखार अहमद, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत श्री मनोज कुमार तिवारी, समस्त अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती मंजू कुमारी, सिविल जज (सी.डी.) श्री विवेक कुमार तथा अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में लीगल डिफेन्स काउंसिल, बैंक कर्मी तथा न्यायालय के कर्मचारीगण भी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने और आमजन तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने की पहल
राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को सरल, सस्ता और त्वरित बनाना है। इसके माध्यम से न केवल लंबित मामलों का निस्तारण होता है बल्कि लोगों को बिना लंबी न्यायिक प्रक्रिया के आपसी सहमति से अपने विवादों का समाधान करने का अवसर भी मिलता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा चलाया जा रहा यह जागरूकता अभियान लोगों को उनके अधिकारों और न्यायिक प्रक्रियाओं के बारे में जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
राष्ट्रीय लोक अदालत क्या है?
राष्ट्रीय लोक अदालत एक ऐसा मंच है जहां सुलह-समझौते के माध्यम से मामलों का त्वरित और सरल निस्तारण किया जाता है।
लोक अदालत में किन मामलों का निस्तारण किया जा सकता है?
धारा 138 एन.आई. एक्ट, बैंक वसूली वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर, पारिवारिक विवाद, श्रम वाद, भूमि अधिग्रहण, बिजली-पानी से जुड़े मामले और सिविल व प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण किया जा सकता है।
लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य क्या है?
लोक अदालत का उद्देश्य आमजन को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है।









