10वीं की छात्रा की आत्महत्या :
गरीबी और सामाजिक दबाव की दर्दनाक कहानी

गरीबी से जूझती 10वीं की छात्रा की सांकेतिक पेंटिंग, स्कूल यूनिफॉर्म में बैठी उदास बच्ची, सामाजिक अपमान और मानसिक दबाव को दर्शाता दृश्य

✍️ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
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10वीं की छात्रा की आत्महत्या की यह घटना उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से सामने आई है, जिसने शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक संवेदनशीलता और पारिवारिक हालात—तीनों पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। पढ़ाई में होशियार, जिम्मेदार और परिवार का सहारा बनने की कोशिश कर रही एक नाबालिग छात्रा अंततः उन हालातों के आगे टूट गई, जिनसे लड़ने की उससे उम्र और सामर्थ्य—दोनों से ज़्यादा उम्मीद की जा रही थी।

गरीबी से जूझती एक मेधावी छात्रा

पूरा मामला गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के एक गांव का है। यहां रहने वाली 16 वर्षीय छात्रा अंजलि (बदला हुआ नाम) दसवीं कक्षा की छात्रा थी। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। पिता मजदूरी करते हैं और मां खेतों में चारा काटकर घर का खर्च चलाने में मदद करती थीं। ऐसे में अंजलि ने भी घर की जिम्मेदारी बांटने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ दूसरे लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा लगाने का काम शुरू किया।

उसका उद्देश्य साफ था—पढ़ाई जारी रहे और घर की हालत कुछ बेहतर हो सके। लेकिन समाज ने उसकी इस मजबूरी को सम्मान की बजाय उपहास बना दिया।

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स्कूल में अपमान, ताने और मारपीट

बताया जा रहा है कि अंजलि के ही मोहल्ले में रहने वाली दो छात्राएं उसे लगातार अपमानित करती थीं। वह उसके घरों में काम करने और गरीबी को लेकर ताने मारती थीं। स्कूल में भी यह व्यवहार जारी रहा। कई बार मजाक उड़ाया गया, कई बार शब्दों से चोट पहुंचाई गई और आरोप है कि मारपीट तक की गई।

4 फरवरी को स्कूल पहुंचने पर एक बार फिर दोनों छात्राओं ने अंजलि के साथ बदसलूकी की। इस घटना ने पहले से मानसिक दबाव झेल रही छात्रा को भीतर से तोड़ दिया।

टीचर की पिटाई ने बढ़ाया मानसिक दबाव

घटना यहीं नहीं रुकी। आरोप है कि दोनों छात्राओं ने स्कूल के एक शिक्षक से अंजलि की झूठी शिकायत कर दी। शिक्षक ने बिना छात्रा का पक्ष सुने ही उसे कई थप्पड़ मार दिए। परिजनों का कहना है कि संबंधित शिक्षक पहले भी छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार कर चुका है और डायल-112 पर उसकी शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं।

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सहपाठियों का अपमान और शिक्षक की पिटाई—इन दोनों घटनाओं ने अंजलि को गहरे मानसिक तनाव में धकेल दिया।

घर में अकेली थी, मां खेत पर गई थी

स्कूल से लौटने के बाद अंजलि बेहद चुप थी। उस समय घर पर कोई मौजूद नहीं था। मां खेत में चारा काटने गई हुई थी। इसी दौरान छात्रा ने घर में रखी कीटनाशक दवा पी ली।

कुछ समय बाद जब परिवार के लोग घर पहुंचे तो हालत गंभीर थी। आनन-फानन में उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

परिजनों का आरोप, पुलिस की कार्रवाई

घटना के बाद छात्रा के पिता ने स्कूल के शिक्षक और दोनों छात्राओं को बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने मोहम्मदाबाद थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की।

पुलिस ने पिता की शिकायत के आधार पर शिक्षक और दोनों छात्राओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की जांच की जा रही है।

यह सिर्फ एक मौत नहीं, सिस्टम की हार है

10वीं की छात्रा की आत्महत्या केवल एक पारिवारिक त्रासदी नहीं है। यह उस सामाजिक सोच की हार है, जहां गरीबी को अपराध बना दिया जाता है, और उस शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल है, जहां बच्चे की बात सुने बिना सज़ा दे दी जाती है।

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यह घटना बताती है कि स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षा और संवेदनशीलता का स्थान भी होना चाहिए। शिक्षक का एक थप्पड़ और समाज का एक ताना—किसी बच्चे की पूरी दुनिया उजाड़ सकता है।

समाचार सार:
गरीबी से जूझती 10वीं की छात्रा को स्कूल में अपमान, मारपीट और शिक्षक की पिटाई झेलनी पड़ी। मानसिक दबाव में आकर छात्रा ने आत्महत्या कर ली। पिता की शिकायत पर पुलिस ने शिक्षक और दो छात्राओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

10वीं की छात्रा की आत्महत्या ने गाजीपुर में शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े किए। गरीबी, अपमान और शिक्षक की पिटाई से टूटी मेधावी छात्रा की दर्दनाक कहानी।

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