उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से सामने आया यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि घरेलू विवादों, वैवाहिक तनाव और पुलिस-प्रशासन की संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। वजीरगंज थाना क्षेत्र के वार्ड 10 में रहने वाले एक युवक ने कथित तौर पर पत्नी की प्रताड़ना और धमकियों से परेशान होकर ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।
रात 10 बजे उठाया आत्मदाह जैसा खौफनाक कदम
मंगलवार की रात करीब 10 बजे उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब वार्ड 10 निवासी युवक ने खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाने का प्रयास किया। आग की लपटें उठती देख परिजनों और आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। तत्काल लोगों ने साहस दिखाते हुए आग बुझाने की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी।
गंभीर हालत में हायर सेंटर रेफर
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। युवक को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल में भी स्थिति में सुधार न होने पर डॉक्टरों ने उसे हायर सेंटर भेज दिया। फिलहाल युवक की हालत नाजुक बताई जा रही है।
चार साल में बिगड़ते गए रिश्ते
घायल युवक की पहचान मनोज मिश्रा के रूप में हुई है। उसके पिता डॉक्टर शिवओम मिश्रा ने बताया कि मनोज ने 25 फरवरी 2020 को गांव नदवारी निवासी नीतू से लव मैरिज की थी। शादी के शुरुआती कुछ महीने सामान्य रहे, लेकिन धीरे-धीरे दांपत्य जीवन में तनाव बढ़ता चला गया। बीते चार वर्षों से विवाद लगातार गहराते चले गए।
पत्नी पर लगातार उत्पीड़न और मुकदमों के आरोप
डॉ. शिवओम मिश्रा का आरोप है कि मनोज की पत्नी आए दिन उस पर और उसके परिवार के सदस्यों पर मुकदमे दर्ज कराती रही। बार-बार पुलिस और अदालत के चक्कर लगाने से मनोज मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था। परिवार का कहना है कि कानूनी दबाव और घरेलू तनाव ने उसकी मानसिक स्थिति को बेहद कमजोर कर दिया था।
थाने से न्याय न मिलने का आरोप
मनोज के पिता ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि घटना से एक दिन पहले पत्नी ने मनोज के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी। इसकी शिकायत लेकर मनोज थाने पहुंचा, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि जब पत्नी थाने पहुंची तो हल्का इंचार्ज ने फोन पर मनोज से अभद्र भाषा में बात की और उस पर मकान खाली करने का दबाव बनाया।
‘नीले ड्रम में भर दूंगी’ जैसी धमकियों का दावा
परिजनों के अनुसार, पत्नी द्वारा मनोज को जान से मारने और ‘नीले ड्रम में भरकर फेंक देने’ जैसी धमकियां दी जाती थीं। पिता का कहना है कि एक दिन पहले भी पत्नी ने चिमटे से मारपीट की थी। इस तरह की धमकियों ने मनोज को भीतर तक डरा दिया था और वह लंबे समय से भय व तनाव में जी रहा था।
पुलिस का पक्ष क्या है?
मामले को लेकर वजीरगंज के प्रभारी निरीक्षक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पारिवारिक विवाद के चलते युवक ने आत्मदाह का प्रयास किया। युवक को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस के अनुसार, पत्नी की ओर से पूर्व में मुकदमा दर्ज कराया गया था। पूरे मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घरेलू विवाद, मानसिक स्वास्थ्य और सिस्टम पर सवाल
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की पीड़ा तक सीमित नहीं है। यह घरेलू विवादों में पुरुष मानसिक स्वास्थ्य, कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग के आरोप और पुलिस की संवेदनशीलता जैसे मुद्दों को भी सामने लाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समय रहते काउंसलिंग, मध्यस्थता और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, ताकि किसी की जान खतरे में न पड़े।
फिलहाल पूरा परिवार सदमे में है और युवक की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद जारी है। यह घटना समाज और सिस्टम—दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी की तरह है, जिसे नजरअंदाज करना आने वाले समय में और भी भयावह परिणाम दे सकता है।






