उत्तर प्रदेश के बरेली हत्याकांड ने रिश्तों, भरोसे और प्रेम के नाम पर खड़े किए जाने वाले सामाजिक ढांचे को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला न सिर्फ एक हत्या की कहानी है, बल्कि उस मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक दबाव की परतें खोलता है, जिसमें आधुनिक रिश्ते कई बार दम तोड़ देते हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि दो महीने पहले ही शादी के बंधन में बंधे युवक की हत्या उसी महिला ने कर दी, जिसे उसने जीवनसाथी माना था।
पहले आत्महत्या, फिर हत्या का खुलासा
26 जनवरी की सुबह बरेली के इज्जतनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत गिरजा शंकर कॉलोनी, कैलाशपुरम में किराए के मकान से एक युवक का शव खिड़की की ग्रिल से मफलर के सहारे लटका मिला। शुरुआती तौर पर मामला आत्महत्या का प्रतीत हुआ। स्थानीय लोगों और पुलिस को भी यही बताया गया कि युवक ने फांसी लगाकर जान दे दी है। लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरे घटनाक्रम की दिशा ही बदल दी।
पोस्टमॉर्टम में साफ हो गया कि मौत फांसी से नहीं, बल्कि गला दबाने से हुई है। इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले को हत्या मानते हुए जांच शुरू की, तो एक-एक कर भयावह सच सामने आता चला गया।
कौन था मृतक जीतेन्द्र कुमार यादव
मृतक की पहचान जीतेन्द्र कुमार यादव (33 वर्ष) के रूप में हुई। वह इटावा जिले के भौपुरा गांव का रहने वाला था और बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) में कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत था। नौकरी के सिलसिले में वह अपनी पत्नी ज्योति के साथ बरेली में किराए के मकान में रह रहा था।
परिवार वालों के मुताबिक जीतेन्द्र मेहनती और शांत स्वभाव का व्यक्ति था। उसने प्रेम संबंध के बाद परिवार की सहमति से शादी की थी और नए जीवन की शुरुआत को लेकर काफी उम्मीदें थीं।
नौ साल का रिश्ता, दो महीने की शादी
पूछताछ के दौरान आरोपी पत्नी ज्योति ने पुलिस को बताया कि वह और जीतेन्द्र छात्र जीवन से एक-दूसरे को जानते थे। करीब नौ साल तक दोनों का प्रेम संबंध रहा और पिछले साल दोनों परिवारों की सहमति से शादी हुई। लेकिन शादी के महज दो महीने के भीतर ही यह रिश्ता खून में बदल गया।
ज्योति यूपी रोडवेज में कॉन्ट्रैक्ट बस कंडक्टर के तौर पर काम कर चुकी थी, जबकि जीतेन्द्र की नौकरी भी स्थायी नहीं थी। पुलिस के अनुसार, दोनों के बीच पैसों को लेकर अक्सर विवाद होता रहता था, जो धीरे-धीरे तनाव और झगड़े में तब्दील हो गया।
झगड़ा, बुलाए गए मायके वाले
पुलिस जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन भी पति-पत्नी के बीच पैसे को लेकर कहासुनी हुई थी। गुस्से में आकर ज्योति ने अपने माता-पिता को फोन कर बरेली बुला लिया। कुछ ही देर में उसके पिता कालीचरण, मां चमेली और भाई दीपक घर पहुंच गए।
यहां से विवाद घरेलू झगड़े से निकलकर एक साजिशन हत्या में बदल गया।
मां-बाप ने पकड़ा, पत्नी ने दबा दिया गला
पुलिस के अनुसार झगड़े के दौरान माता-पिता और भाई ने जीतेन्द्र के हाथ-पैर पकड़ लिए, ताकि वह विरोध न कर सके। इसी दौरान गुस्से में ज्योति ने उसका गला दबा दिया। कुछ ही मिनटों में जीतेन्द्र बेसुध हो गया और उसकी मौत हो गई।
हत्या के बाद चारों को अहसास हुआ कि अब मामला बिगड़ चुका है। इसके बाद उन्होंने शव को आत्महत्या का रूप देने की साजिश रची।
आत्महत्या का नाटक और पड़ोसियों को गुमराह करने की कोशिश
आरोपियों ने जीतेन्द्र के शव को मफलर के सहारे खिड़की की ग्रिल से लटका दिया और बाहर शोर मचाना शुरू कर दिया, ताकि पड़ोसियों को लगे कि युवक ने आत्महत्या की है। शुरुआती तौर पर यह योजना सफल भी होती दिखी, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने सारा खेल बिगाड़ दिया।
भाई की शिकायत से खुली परतें
मृतक के भाई अजय कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर संदेह जताया कि जीतेन्द्र आत्महत्या नहीं कर सकता। इसी शिकायत के आधार पर पहले आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया गया, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद धाराएं बढ़ाकर हत्या कर दी गईं।
तीन गिरफ्तार, एक फरार
शनिवार को पुलिस ने आरोपी पत्नी ज्योति, उसके पिता कालीचरण और मां चमेली को गिरफ्तार कर लिया। तीनों दुर्गा नगर इलाके के रहने वाले हैं। वहीं ज्योति का भाई दीपक अभी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या का है। सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
समाज के लिए गंभीर सवाल
बरेली हत्याकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या लंबे प्रेम संबंध और पारिवारिक सहमति भी रिश्तों की गारंटी नहीं रह गए हैं? आर्थिक असुरक्षा, आपसी अविश्वास और पारिवारिक हस्तक्षेप किस तरह एक सामान्य दांपत्य जीवन को अपराध में बदल सकता है, यह मामला उसकी भयावह मिसाल है।
फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूरे घटनाक्रम की कड़ियां और स्पष्ट होने की उम्मीद है।








