“भागने की बीमारी” या समाज का छुपा सच? 3 महीने में 110 महिलाएं लापता, देवलोक में बढ़ी चिंता और सवाल

सार संक्षेप: क्या यह महज संयोग है या किसी गहरे सामाजिक संकट का संकेत? हिमाचल के शांत माने जाने वाले मंडी में अचानक महिलाओं का यूं गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
✍️नयन ज्योति की रिपोर्ट

आपने कई तरह की बीमारियों के बारे में सुना होगा—किसी को नींद में चलने की आदत, किसी को बिना वजह बोलते रहने की। लेकिन अगर कोई कहे कि एक “भागने की बीमारी” भी है, तो शायद आप पहले इसे मज़ाक समझेंगे। पर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में यह मज़ाक अब एक गंभीर सामाजिक पहेली बन चुका है।

यहाँ पिछले तीन महीनों में 110 महिलाएं अचानक अपने घरों से लापता हो गईं। कोई बिना बताए चली गई, कोई अपने छोटे बच्चे को लेकर गायब हो गई, तो कोई स्कूल से लौटते वक्त रास्ते में ही कहीं खो गई। धीरे-धीरे यह सिलसिला इतना बढ़ गया कि लोगों ने इसे नाम दे दिया—“भागने की बीमारी”।

📊 आंकड़ों में बढ़ता डर

मंडी जिले में सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 110 महिलाओं के गायब होने की घटनाएं केवल एक संख्या नहीं, बल्कि एक चेतावनी हैं। हालांकि पुलिस ने इनमें से 86 महिलाओं को खोज निकाला है, लेकिन 24 महिलाएं अब भी लापता हैं।

ये महिलाएं केवल मंडी के अंदर ही नहीं मिलीं, बल्कि दिल्ली, मध्य प्रदेश, चंडीगढ़ और हिमाचल के अन्य जिलों जैसे कांगड़ा, कुल्लू, बिलासपुर और शिमला से बरामद की गईं। यह बताता है कि मामला केवल स्थानीय नहीं, बल्कि व्यापक फैलाव वाला है।

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🔍 पुलिस की जंग: हर दिशा में तलाश

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अलग-अलग थानों में विशेष टीमें गठित की हैं। ये टीमें सर्विलांस, कॉल डिटेल, सोशल मीडिया और जमीनी सूचना नेटवर्क के जरिए लगातार काम कर रही हैं।

एसपी विनोद कुमार खुद इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर केस को गंभीरता से लिया जा रहा है और जल्द ही बाकी महिलाओं को भी ढूंढ लिया जाएगा।

📍 सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके

गोहर, जंजैहली और सुंदरनगर जैसे इलाकों से सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। इसके अलावा सदर थाना, महिला थाना और अन्य चौकियों में भी लगातार शिकायतें दर्ज हो रही हैं।

यह पैटर्न इस बात की ओर इशारा करता है कि यह केवल इक्का-दुक्का घटना नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित या बार-बार दोहराया जाने वाला ट्रेंड है।

🤔 सवाल जो जवाब मांगते हैं

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सच में कोई “भागने की बीमारी” है या इसके पीछे कोई गहरी सामाजिक सच्चाई छिपी है?

क्या यह घरेलू तनाव का परिणाम है? क्या महिलाएं किसी मानसिक दबाव या रिश्तों की उलझनों से निकलने का रास्ता खोज रही हैं? या फिर इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है?

कुछ मामलों में प्रेम संबंधों की बात सामने आई है, तो कुछ में पारिवारिक विवाद। लेकिन हर घटना का कारण अलग-अलग होना इस रहस्य को और गहरा बना देता है।

👩‍👧 संवेदनशील पहलू: परिवार और समाज

हर लापता महिला के पीछे एक परिवार है—जो इंतजार कर रहा है, चिंता में है, और जवाब तलाश रहा है। खासकर जब कोई महिला अपने छोटे बच्चे के साथ गायब हो जाए, तो मामला और भी संवेदनशील हो जाता है।

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यह घटनाएं केवल पुलिस की चुनौती नहीं, बल्कि समाज के लिए भी आईना हैं। यह दिखाती हैं कि कहीं न कहीं संवाद की कमी, भावनात्मक दबाव और सामाजिक अपेक्षाएं लोगों को ऐसे कदम उठाने पर मजबूर कर रही हैं।

📱 सोशल मीडिया और अफवाहों की भूमिका

कुछ मामलों में सोशल मीडिया भी एक माध्यम बनता दिखा है, जहां से संपर्क या प्रेरणा मिलती है। वहीं, अफवाहें भी इस पूरे घटनाक्रम को और रहस्यमय बना रही हैं।

“भागने की बीमारी” जैसा शब्द भले ही हल्का लगे, लेकिन यह असल में एक गंभीर सामाजिक चिंता को ढकने वाला पर्दा भी हो सकता है।

🌱 बदलाव की जरूरत

इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है—हमें केवल घटनाओं पर नहीं, उनके कारणों पर ध्यान देना होगा। महिलाओं की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक संवाद को मजबूत करना अब समय की मांग है।

अगर कारणों को समझा नहीं गया, तो यह “बीमारी” केवल मंडी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी फैल सकती है।

निष्कर्ष: यह कहानी केवल 110 महिलाओं की नहीं, बल्कि उस समाज की है जो बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सवाल यह नहीं कि महिलाएं क्यों जा रही हैं, बल्कि यह है कि उन्हें जाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है।

❓FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. क्या यह सच में कोई बीमारी है?
A: नहीं, यह एक सामाजिक स्थिति को दिया गया नाम है, असल में इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
Q2. कितनी महिलाएं अब भी लापता हैं?
A: कुल 110 में से 24 महिलाएं अभी भी लापता हैं।
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Q3. पुलिस क्या कर रही है?
A: विशेष टीमें गठित कर लगातार सर्च ऑपरेशन और सर्विलांस किया जा रहा है।
Q4. क्या यह किसी नेटवर्क का मामला हो सकता है?
A: जांच जारी है, अभी तक कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
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