गढ़चिरौली जिले के सिरोंचा तालुका के दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्र गुम्मलकोंडा में इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन भर नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और संगठनात्मक एकता का एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभरा। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद (AHP) और राष्ट्रीय बजरंग दल की जिला कार्यकारिणी ने इस अवसर पर गांव में बैठक आयोजित कर न केवल धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की, बल्कि समाज को जोड़ने और सशक्त बनाने की दिशा में भी कई अहम निर्णय लिए।
📍 गुम्मलकोंडा: दूरियां नहीं, विश्वास जोड़ता है
सिरोंचा तालुका से लगभग 40 से 50 किलोमीटर दूर स्थित गुम्मलकोंडा गांव, जहां तक पहुंचना आज भी आसान नहीं है, वहां इस तरह का आयोजन अपने आप में एक बड़ी बात मानी जा रही है। घने जंगलों और सीमित संसाधनों के बीच बसे इस गांव में जब धार्मिक और सामाजिक संगठनों की सक्रियता पहुंचती है, तो यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विश्वास का विस्तार बन जाता है।
🛕 हनुमान मंदिर परिसर में हुई अहम बैठक
हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता गढ़चिरौली जिला कार्याध्यक्ष नरसिम्हा सिलवेरी ने की। बैठक में अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद सिरोंचा तालुका अध्यक्ष सदानंद इंगिली, राष्ट्रीय बजरंग दल के तालुका अध्यक्ष प्रशांत येनागंदूला, वरिष्ठ पत्रकार नागभूषणम चकिनारपु, सत्यम वेमुला, साईनाथ पडिशलवार और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इसके अलावा गांव के प्रमुख नागरिकों में नागेश जनगम, राजू पोट्टाला, वेंकटाय्या कोटरी, सत्यम कोंडागुर्ला, कमला दुर्गम, लक्ष्मी जनगम, विलास कुम्मारी, नितीन राल्लाबंडी, किरण सुनातकरी, श्रीदेवी पोट्टाला और शांता कोटारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि गांव स्तर पर भी इस पहल को सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।
📖 “हनुमान चालीसा सेंटर” अभियान की घोषणा
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु रहा—पूरे देश में “हनुमान चालीसा सेंटर” स्थापित करने की योजना। जिला कार्याध्यक्ष नरसिम्हा सिलवेरी ने बताया कि डॉ. प्रवीण तोगड़िया के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद ने देशभर में एक लाख हनुमान चालीसा केंद्र खोलने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इस अभियान का उद्देश्य केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से समाज में आध्यात्मिक जागरूकता, आपसी एकता और सुरक्षा की भावना को मजबूत करना है। हर गांव में मंगलवार और शनिवार को नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ आयोजित किया जाएगा, जिससे लोगों के बीच एक सामूहिक चेतना विकसित हो सके।
🤝 सामाजिक सहयोग: “मुट्ठी भर अनाज” पहल
बैठक में एक और महत्वपूर्ण पहल पर चर्चा हुई—“मुट्ठी भर अनाज” अभियान। इसके तहत प्रत्येक परिवार से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में अनाज एकत्र कर जरूरतमंद परिवारों की सहायता की जाएगी। यह पहल न केवल सहयोग की भावना को बढ़ावा देती है, बल्कि समाज में आत्मनिर्भरता और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी देती है।
इस प्रकार, यह अभियान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सहयोग का भी एक माध्यम बनता जा रहा है।
🥁 ढोलक-तळे वितरण: संस्कृति से जुड़ाव
गुम्मलकोंडा और आसपास के गांवों के दौरे के दौरान कार्यकर्ताओं ने स्थानीय ग्रामीणों को ढोलक और तळे (पारंपरिक वाद्ययंत्र) वितरित किए। इसका उद्देश्य गांवों में भजन, कीर्तन और धार्मिक आयोजनों को प्रोत्साहित करना है।
इन वाद्ययंत्रों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने की कोशिश की जा रही है, जिससे नई पीढ़ी भी अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी रह सके।
🌱 लक्ष्य: सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर समाज
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस पूरे अभियान का व्यापक उद्देश्य हिंदू परिवारों को “सेफ, रिच, हेल्दी और सेल्फ-रिलायंट” बनाना है। इसके लिए केवल धार्मिक कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि सामाजिक सहयोग, स्वास्थ्य जागरूकता और आर्थिक सशक्तिकरण पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इस दिशा में आने वाले समय में और भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जाएगा।
📊 निष्कर्ष: गांव से शुरू होकर देश तक
गुम्मलकोंडा जैसे दूरस्थ गांव में आयोजित यह बैठक यह दर्शाती है कि विकास और जागरूकता की शुरुआत छोटे स्तर से होती है। जब गांव स्तर पर लोग संगठित होते हैं, तो उसका प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई देता है।
हनुमान जन्मोत्सव के इस अवसर पर लिया गया यह संकल्प केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है—जो धर्म, संस्कृति और समाज को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास कर रहा है।
❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
हनुमान चालीसा सेंटर का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक जागरूकता, एकता और सुरक्षा की भावना को मजबूत करना है।
मुट्ठी भर अनाज अभियान क्या है?
यह एक सामाजिक पहल है जिसमें हर परिवार से थोड़ी मात्रा में अनाज लेकर जरूरतमंदों की मदद की जाती है।
इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस क्या था?
धार्मिक जागरूकता के साथ-साथ सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।
किस संगठन ने यह पहल शुरू की है?
अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल ने मिलकर यह अभियान शुरू किया है।


