संस्मरण

संस्मरण

गज़ब की भाषा बुंदेली — अपनापन भी, साहस भी

एक सफ़र जो रास्तों से ज़्यादा दिलों के भीतर उतर गया

अनिल अनूप आज से पांच छह साल पहले की बात है, किसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश

संस्मरण

वो बातें तुम्हारी बहुत याद आती…
धर्मेन्द्र से साहनेवाल, पंजाब में हुई वह अनुपम, आत्मा को छू लेने वाली मुलाक़ात
अनिल अनूप

कुछ स्मृतियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें समय के बीतने से पुराना होना चाहिए, परंतु वे उल्टा और भी चमकने लगती

Scroll to Top