संस्कृति

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आज 39 में सिर्फ 3 मंदिरों की घंटियाँ ही बज रही —क्या सनातनी सभ्यता का नामो-निशान मिटा दिया गया❓

✍️ सुनीता नायर की खास रिपोर्ट आज का रावलपिंडी दुनिया के नक़्शे पर मुख्यतः एक सैन्य नगर के रूप में

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जहाँ शब्द योद्धा बनते हैं और लोकगीत प्रेम की बंदगी — वहीं जन्म लेती है “डोगरी”

✍️ लेखक – अनिल अनूप भारत की विशाल संस्कृति केवल भौगोलिक विस्तार से नहीं, बल्कि भाषा और परंपराओं की विविधता

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यहाँ के जायके को मिला वैश्विक तडका ; छोटे शहरों का स्वाद चखेगी दुनिया

लखनऊ की पाक कला पर यूनेस्को की मुहर : छोटे शहरों के स्वाद को मिली वैश्विक प्रेरणा चुन्नीलाल प्रधान की

पारंपरिक कपड़ों में कुम्हार चाक पर मिट्टी के बर्तन बना रहा है, उसके हाथ मिट्टी से सने हुए हैं, और उसके पास मिट्टी के उपकरण रखे हैं। पोर्ट्रेट फॉर्मेट।
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कोशी की मिट्टी, मेहनत और मिटती पहचान : कुम्हारों का बदलता संसार

विनोद कुमार झा की रिपोर्ट बिहार के कोशी क्षेत्र की धरती हमेशा से अपनी उर्वरता और सांस्कृतिक जीवंतता के लिए

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आंसुओं के साथ मनाई दीपावली: वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज का वायरल वीडियो छू गया भक्तों का दिल

अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट आंसुओं के साथ मनाई दीपावली — सोशल मीडिया पर इन दिनों वृंदावन के प्रसिद्ध संत

सजावटी दीयों और सोने के सिक्कों से भरा कलश, पास में मिठाइयाँ और दीप प्रज्वलित हैं, बैकग्राउंड में खुशियों भरी लाइटें और सामने पीले रंग में लिखा "धनतेरस 2025"।
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धनतेरस 2025 ; जानते हैं क्या क्या होने वाला है कल यूपी में? आइए हम बताते हैं 👇

चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट धनतेरस 2025 का पर्व पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ 18 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा।

अनिल अनूप मंच से बोलते हुए और बगल में सावन की विरह में डूबी भारतीय स्त्री का चित्र — ठुमरी “गोरिया पाईं नाही सैंया के सवनमा में” की भावनात्मक झलक
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गोरिया पाईं नाही सैंया के सवनमा में : अनिल अनूप की विरह लेखनी और पंडित छन्नू लाल मिश्रा की आत्मा से उपजी अमर ठुमरी

गोरिया पाईं नांहि सैंया के सवनमा में — हंसराज तंवर की विशेष रिपोर्ट ✍️ हंसराज तंवर की विशेष रिपोर्ट 🌧️

भारतीय पारंपरिक शैली में चित्रित दो नायिकाएँ — एक के नयनों से निकलती कटार और दूसरी विरह में व्याकुल, जो प्रेम और पीड़ा के द्वंद्व को दर्शाती हैं।
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साहित्य में ऋंगार ; “नयन कटार” और “विरहिणी का विष” — साहित्य के दो छोर, जहाँ प्रेम आनंद भी है और तप भी।

साहित्य में ऋंगार ; “नयन कटार” और “विरहिणी का विष” — –अनिल अनूप यह विषय साहित्य के भाव-संसार का सबसे

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