चलो गाँव की ओर

बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले में कोल आदिवासी समुदाय की ज़िंदगी, जहां शराब की लत, गरीबी और ज़मीन हड़पने की समस्या ने सामाजिक संकट पैदा किया है
चलो गाँव की ओर

शराब, ज़मीन और विस्मरण के बीच फँसी ज़िंदगी — बुंदेलखंड के कोल आदिवासियों का यथार्थ

संजय सिंह राणा की खास रिपोर्ट बुंदेलखंड की धरती इतिहास, आस्था और संघर्ष—तीनों की साक्षी रही है। इसी भूभाग में […]

बुंदेलखंड के पाठा क्षेत्र में आदिवासी और दलित समुदाय के बच्चों, महिलाओं और ग्रामीण परिवेश में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक तकनीक से आए सामाजिक बदलाव को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर
चलो गाँव की ओर

बुंदेलखंड के पाठा क्षेत्र के आदिवासी-दलित समुदाय की आरंभिक जीवन में आधुनिक बदलाव

📝 संजय सिंह राणा की खास रिपोर्ट बुंदेलखंड का पाठा क्षेत्र—जो भौगोलिक दृष्टि से पहाड़ियों, पथरीली ज़मीन, जंगलों और दूर-दराज़

चलो गाँव की ओर

91% पानी का दावा, पाठा में पानी नहीं सूखा है—यहाँ निगरानी, ईमानदारी और जवाबदेही सूख चुकी है

✍️ संजय सिंह राणा की खास रिपोर्ट सरकारी फाइलों और प्रस्तुतियों में सब कुछ संतोषजनक है। आँकड़े बताते हैं कि

चलो गाँव की ओर

बुंदेलखंड का पाठा : जहां सपने स्कूल जाने से पहले ही पथरीले रास्तों में दम तोड़ देते हैं

संजय सिंह राणा की खास रिपोर्ट बुंदेलखंड, जिसे अक्सर सूखे, पलायन और पिछड़ेपन की त्रयी के रूप में देखा जाता

घने जंगलों और पहाड़ी चट्टानों के बीच बसे बुंदेलखंड के पाठा क्षेत्र का आदिवासी गांव, मिट्टी-फूस के घर, मवेशी और पानी के घड़ों के साथ ग्रामीण आते-जाते लोग
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पाठा, दशकों पहलेजहाँ जंगल ही सरकार था, और सभ्यता का नाम तक अनसुना

📝 संजय सिंह राणा की खास रिपोर्ट बुंदेलखंड के पठारी भूभाग से आगे बढ़ते हुए अचानक एक ऐसी दुनिया शुरू

चलो गाँव की ओर

कथा, संस्कृति और आस्था एक मंच पर—परिक्रमा पथ के बाद वाल्मीकि आश्रम बनेगा बुंदेलखंड का तीर्थ केंद्र नंबर-1

महर्षि वाल्मीकि आश्रम पर्वत – परिक्रमा पथ बनने के बाद बुंदेलखंड का तीर्थ केंद्र नंबर-1 संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चलो गाँव की ओर

‘चलो गांव की ओर’ अभियान के बीच एक बड़ी मांग — पाठा में विश्वविद्यालय की स्थापना

संजय सिंह रणा की रिपोर्ट चित्रकूट। ‘जीत आपकी – चलो गांव की ओर’ जागरूकता अभियान के संस्थापक एवं अध्यक्ष संजय

बुंदेलखंड के पाठा गांव में जल के लिए संघर्ष करती महिला और ग्रामीण परिवार — बंजर पहाड़ व कच्चे घरों के बीच रोजमर्रा का संघर्ष
चलो गाँव की ओर

पाठा : भय, भूख और बंजर जमीन के बीच भी संस्कृति ने हार मानने से इंकार किया, क्योंकि यह इलाका टूटता नहीं, इतिहास रचता है

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट बुंदेलखंड के पाठा इलाके को हम अकसर कुछ शब्दों में समेट देने की गलती करते

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