इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया। समाज में कई बीमारियाँ ऐसी होती हैं जिनके साथ केवल शारीरिक पीड़ा ही नहीं बल्कि सामाजिक दूरी और गलतफहमियाँ भी जुड़ जाती हैं। कुष्ठ रोग भी लंबे समय तक ऐसी ही धारणाओं का शिकार रहा है। हालांकि चिकित्सा विज्ञान ने वर्षों पहले यह स्पष्ट कर दिया है कि यह रोग पूरी तरह से उपचार योग्य है और समय पर इलाज मिलने पर मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। इसी जागरूकता को बढ़ाने और छिपे हुए रोगियों की पहचान करने के उद्देश्य से जनपद में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष कुष्ठ रोगी खोजी अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 9 मार्च से शुरू होकर 23 मार्च तक जारी रहेगा, जिसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर संभावित रोगियों की पहचान कर रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग की 3500 टीमें घर-घर कर रहीं जांच
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि जनपद में बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत लगभग 3500 टीमें गठित की गई हैं, जो गांवों और शहरों में घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। इन टीमों का उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों की पहचान करना है जिनमें कुष्ठ रोग के प्रारंभिक लक्षण मौजूद हों, ताकि उन्हें समय रहते उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि दो वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों की जांच की जा रही है। यदि किसी व्यक्ति में कुष्ठ रोग की पुष्टि होती है तो उसे मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) के माध्यम से निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे मरीज पूरी तरह से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकता है।
कुष्ठ रोगियों से भेदभाव न करें: सीएमओ
सीएमओ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने जनपदवासियों से अपील करते हुए कहा कि कुष्ठ रोग छुआछूत की बीमारी नहीं है। यह अन्य सामान्य रोगों की तरह ही एक संक्रमण है जिसका इलाज संभव है। उन्होंने कहा कि कई बार सामाजिक भय और भेदभाव के कारण लोग बीमारी को छिपा लेते हैं, जिससे रोग गंभीर रूप ले सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य विभाग की टीम घर पर पहुंचे तो लोग जांच कराने में सहयोग करें और किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाएं नहीं। समय पर जांच और उपचार से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है और समाज में सामान्य जीवन जी सकता है।
क्या है कुष्ठ रोग और कैसे होता है
जिला कुष्ठ रोग परामर्शदाता विशेषज्ञ डॉ. इरशाद आलम ने बताया कि कुष्ठ रोग माइक्रो बैक्टीरियम लैप्री नामक जीवाणु के कारण होता है। यह बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है और प्रारंभिक अवस्था में इसके लक्षण हल्के होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रोग साथ बैठने, खाने या सामान्य संपर्क से नहीं फैलता है।
डॉ. आलम के अनुसार कई बार समाज में फैली गलत धारणाओं के कारण लोग मरीजों से दूरी बना लेते हैं, जबकि वैज्ञानिक रूप से यह साबित हो चुका है कि उचित उपचार मिलने पर मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी को छिपाने के बजाय तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराना ही सबसे बेहतर उपाय है।
क्यों जरूरी है समय पर पहचान
विशेषज्ञों के अनुसार कुष्ठ रोग की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य त्वचा रोग की तरह दिखाई देते हैं। यदि समय पर पहचान न हो सके तो यह बीमारी शरीर के नसों को प्रभावित कर सकती है और बाद में दिव्यांगता का कारण भी बन सकती है।
इसी वजह से सरकार द्वारा समय-समय पर विशेष खोज अभियान चलाए जाते हैं ताकि ऐसे मरीजों को चिन्हित किया जा सके जो इलाज से वंचित रह गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सामूहिक प्रयासों और जागरूकता के माध्यम से ही इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
ऐसे पहचाने जा सकते हैं कुष्ठ रोग के लक्षण
कुष्ठ रोग के कुछ प्रमुख लक्षणों को पहचानना बेहद महत्वपूर्ण है। त्वचा के रंग में परिवर्तन होना, त्वचा का सुन्न पड़ जाना या सुन्नपन का अहसास होना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा चमकीली या तैलीय त्वचा, कान के पल्लव का मोटा होना, त्वचा पर गांठ या उभार दिखाई देना भी इसके लक्षण माने जाते हैं।
कुछ मामलों में आंखें बंद करने में कठिनाई, आंखों से पानी आना या भौहों का झड़ना भी देखा जाता है। हाथों या पैरों में दर्द रहित घाव होना, हथेली में छाले बनना, कपड़ों के बटन बंद करने में परेशानी या उंगलियों का मुड़ना भी इसके संकेत हो सकते हैं। चलते समय पैर का घिसटना भी गंभीर लक्षणों में शामिल है। ऐसे किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करानी चाहिए।
जागरूकता से ही खत्म होगा कुष्ठ रोग
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि कुष्ठ रोग के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार जागरूकता ही है। जब समाज इस बीमारी को समझेगा और मरीजों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएगा, तभी इसका उन्मूलन संभव होगा।
देवरिया जनपद में चलाया जा रहा यह अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव और मोहल्लों तक पहुंचकर लोगों को न केवल जांच के लिए प्रेरित कर रही हैं बल्कि उन्हें यह भी समझा रही हैं कि कुष्ठ रोग से डरने की नहीं बल्कि समय पर उपचार कराने की जरूरत है।
FAQ
कुष्ठ रोगी खोज अभियान कब तक चलेगा?
देवरिया जनपद में यह अभियान 9 मार्च से शुरू होकर 23 मार्च 2026 तक चलेगा।
क्या कुष्ठ रोग छुआछूत की बीमारी है?
नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार कुष्ठ रोग छुआछूत या आनुवंशिक बीमारी नहीं है और इसका इलाज संभव है।
कुष्ठ रोग का इलाज कैसे होता है?
कुष्ठ रोग का उपचार मल्टी ड्रग थेरेपी (MDT) से किया जाता है, जो सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है।
अगर किसी में लक्षण दिखें तो क्या करें?
यदि त्वचा पर सुन्नपन, दाग या अन्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करानी चाहिए।










