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संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट जिले के कर्वी स्थित गोस्वामी तुलसीदास महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक प्रेरणादायी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें छात्राओं और विद्यार्थियों को नारी शक्ति की भूमिका, उसकी सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल महिला दिवस का औपचारिक आयोजन करना नहीं था, बल्कि युवा पीढ़ी के भीतर यह चेतना पैदा करना था कि महिलाओं का सशक्त होना समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए अनिवार्य है। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला और छात्र-छात्राओं ने पूरे मनोयोग से कार्यक्रम में भाग लिया।
महिला शक्ति समाज और राष्ट्र की आधारशिला
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रांत आरकेएम सह प्रमुख डॉ. सुनीता श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि महिला शक्ति केवल परिवार की संरक्षक ही नहीं है बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव भी है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति में सदैव नारी को शक्ति का प्रतीक माना गया है। इतिहास गवाह है कि जब भी समाज को दिशा देने की आवश्यकता हुई, महिलाओं ने अपने साहस, बुद्धिमत्ता और त्याग से समाज को नई राह दिखाई है। उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का समय अवसरों का समय है और महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल, साहित्य और राजनीति जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि नारी शक्ति अब किसी भी चुनौती से पीछे हटने वाली नहीं है।
शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही सशक्तिकरण का आधार
डॉ. सुनीता श्रीवास्तव ने छात्राओं को शिक्षा की महत्ता पर विशेष बल देते हुए कहा कि आत्मनिर्भर बनने के लिए शिक्षा सबसे बड़ा साधन है। उन्होंने कहा कि जब कोई लड़की शिक्षित होती है तो वह केवल स्वयं ही आगे नहीं बढ़ती बल्कि अपने परिवार और समाज को भी आगे ले जाने की क्षमता रखती है। उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे अपने भीतर आत्मविश्वास विकसित करें और जीवन में आने वाली चुनौतियों से घबराने के बजाय उन्हें अवसर के रूप में देखें। उनका कहना था कि आज की युवा पीढ़ी में अपार ऊर्जा और संभावनाएं हैं, आवश्यकता केवल सही दिशा और मार्गदर्शन की है।
विद्यार्थी परिषद का उद्देश्य : छात्राओं का सम्मान और सुरक्षा
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही कर्वी नगर अध्यक्ष डॉ. संध्या पांडेय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सदैव से छात्राओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति को सशक्त बनाना केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यदि समाज महिलाओं को समान अवसर और सम्मान देता है तो निश्चित ही एक सशक्त और संतुलित समाज का निर्माण संभव हो सकता है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आगे आएं।
युवा पीढ़ी से सामाजिक नेतृत्व की अपेक्षा
संगोष्ठी के दौरान इकाई मंत्री कु. शिवानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज की छात्राएं केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझना चाहिए। जब युवा पीढ़ी जागरूक होकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाती है, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होता है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में भी भागीदारी करें और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।
कार्यक्रम में दिखा छात्राओं का उत्साह
इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। संगोष्ठी के माध्यम से उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि समाज में महिलाओं की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है और किस प्रकार वे अपने प्रयासों से समाज को नई दिशा दे सकती हैं। कार्यक्रम का संचालन कु. वर्षा द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी प्रभावी शैली से पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने महिला सशक्तिकरण के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
समाज में बदलती नारी की भूमिका
आज का समय महिलाओं के लिए नए अवसरों का समय है। पिछले कुछ दशकों में समाज में महिलाओं की भूमिका तेजी से बदली है। जहां पहले महिलाओं को केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित समझा जाता था, वहीं अब वे समाज के हर क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। शिक्षा और जागरूकता के बढ़ते स्तर ने महिलाओं को नई पहचान दी है। यही कारण है कि आज महिलाएं प्रशासनिक सेवाओं, वैज्ञानिक अनुसंधान, उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं।
सकारात्मक समाज के लिए आवश्यक है समान अवसर
संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि एक स्वस्थ और सकारात्मक समाज के निर्माण के लिए महिलाओं को समान अवसर प्रदान करना आवश्यक है। यदि महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक नेतृत्व में बराबरी का अवसर मिलता है तो समाज का समग्र विकास संभव हो सकता है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि महिला सशक्तिकरण केवल नारे तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि इसे व्यवहार में भी उतारना आवश्यक है।
निष्कर्ष : नारी शक्ति से ही राष्ट्र की शक्ति
कार्यक्रम के अंत में यह स्पष्ट संदेश सामने आया कि नारी शक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। जब महिलाएं शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बनती हैं तो राष्ट्र की प्रगति स्वतः सुनिश्चित हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित यह संगोष्ठी केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक प्रेरणा थी, जिसने युवाओं के मन में यह विश्वास जगाया कि समाज में परिवर्तन की शुरुआत शिक्षा और जागरूकता से होती है।
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